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मंदिरों को दिया गया आपका डोनेशन कितना सुरक्षित है?

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Source :- BBC INDIA

मंदिर

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मंदिरों में किस तरह का प्रशासन स्थापित कर दान की चोरी को रोका जा सकता है? अगर पूछा जाए तो यह एक अजीब सवाल होगा.

लेकिन दुर्भाग्य से जब से अयोध्या में राम मंदिर में लाखों रुपये के दान की चोरी की शिकायतों का पता चला है, यही सवाल, देश भर के अधिकांश घरों में धार्मिक मान्यताओं की परवाह किए बिना, बातचीत का हिस्सा बन गया है.

एक स्वाभाविक अगला सवाल यह है कि क्या मंदिरों का संचालन किसी ट्रस्ट या व्यक्तियों के समूह या सरकार के हाथों में हो या फिर एक कॉर्पोरेट निकाय की तरह एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का होना बेहतर विकल्प होगा.

इन अलग-अलग सवालों के पूछे जाने की वजह यह है कि धार्मिक स्थलों के चंदा के चोरों की चालाकी ने कई भक्तों के भरोसे को तोड़ दिया है.

कथित चंदा चोरी की ये बहस या इससे जुड़े सवाल नए नहीं हैं. राम मंदिर से पहले, देश का सबसे अमीर मंदिर, तिरुपति का भगवान वेंकटेश्वर मंदिर भी इस तरह के विवाद से अछूता नहीं रहा है. और न ही इसने सबरीमाला मंदिर को बख़्शा है.

मुंबई के मशहूर सिद्धिविनायक मंदिर में भी दान राशि में धांधली के आरोप का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में तूल पकड़ता जा रहा है.

राम मंदिर और तिरुपति का भगवान वेंकटेश्वर मंदिर दोनों ही प्रसिद्ध मंदिर क़ानूनी बोर्डों द्वारा चलाए जाते हैं जिनमें नागरिक सेवा अधिकारी और विभागीय कर्मचारी हैं.

और ऐसा माना जाता है कि ये व्यवस्था अचूक (वॉटर-टाइट) प्रणालियों के साथ काम कर रही है.

आइए हम इन दोनों मंदिरों में अपनाई जाने वाली प्रणालियों को देखें.

भगवान वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुपति

भगवान वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुपति

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सबसे पहले, आइए भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में लागू प्रशासनिक ढांचे को देखें जिसे तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) संचालित करती है.

टीटीडी, आंध्र प्रदेश धर्मार्थ और हिंदू धार्मिक संस्थान और बंदोबस्ती अधिनियम, 1987 के तहत स्थापित एक वैधानिक बॉडी है.

यह पहली बार 1933 में तत्कालीन मद्रास (टीटीडी) अधिनियम के तहत सरकारी नियंत्रण में आया था.

दैनिक प्रशासन का संचालन अधिशासी कार्यालय के हाथ में होता है और इसके प्रमुख आमतौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी होते हैं.

इस कार्यालय में 14,890 कर्मचारी हैं और आउटसोर्स कर्मचारियों की भी एक बड़ी फ़ौज है. इसके अलावा हज़ारों श्रीवारी सेवक भी यहां सेवा देते हैं.

बोर्ड में राजनीतिक प्रतिनिधि और पदेन सदस्य होते हैं, लेकिन यह केवल एक पॉलिसी बॉडी है जो बजट को भी मंजूरी देती है.

इसके खातों का ऑडिट राज्य सरकार करती है, जिससे यह राज्य विधायिका की निगरानी के दायरे में आता है.

टीटीडी के एक अधिकारी ने बीबीसी न्यूज हिन्दी को दिए एक बयान में कहा, “बोर्ड की बैठक साल में कई बार जब भी ज़रूरत होती है बुलाई जाती है, 2026-27 के वार्षिक बजट के लिए हुई बैठक भी इसमें शामिल है. साल 2025-26 में, बोर्ड की बैठक आठ अलग-अलग महीनों में हुई.”

डोनेशन

सिद्धिविनायक मंदिर

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टीटीडी के बोर्ड के सदस्य भानुप्रकाश रेड्डी ने बीबीसी न्यूज हिन्दी को बताया, “अकेले हमारी जमा राशि (डिपॉजिट) 20,000 करोड़ रुपये है और हमारे पास दानदाताओं की संख्या 1.97 लाख है. ये दानदाता सालाना एक लाख रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक दान करते हैं. ऐसे कई लोग हैं जो एक करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक का दान देते हैं. लगभग एक दर्जन ट्रस्ट हैं जो दान प्राप्त करते हैं. सबसे बड़ी राशि, हमेशा की तरह, अन्नप्रसादम में जाती है, जोकि 2500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि है.”

उन्होंने यह भी कहा कि हुंडियों (दान-पात्रों) से प्राप्त होने वाली राशि, औसतन, प्रतिदिन “3.5 करोड़ रुपये से लेकर 4.5 करोड़ रुपये के बीच होती है. इसलिए, हम ये कह सकते हैं कि अकेले हुंडियां ही पांच करोड़ रुपये का योगदान देती हैं.”

1987 के अधिनियम की धारा 80 स्पष्ट रूप से कहती है कि फ़िक्स्ड डिपॉजिट को लिस्टेड बैंकों में छह साल से अधिक समय के लिए निवेश नहीं किया जाना चाहिए और अगर निवेश टीटीडी कर्मचारी सहकारी बैंक में किया जा रहा है तो यह राशि 15 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए.

भक्त प्रतिदिन छह से बारह हुंडियों में नकदी, सिक्के, सोने और चांदी के आभूषण, सोने की छड़ें और यहाँ तक कि संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज (प्रॉपर्टी टाइटल डीड) और डीमैट शेयर भी डालते हैं.

यह हुंडिया ऑनलाइन दान, ई-हुंडी और डिजिटल दान कियोस्क के अतिरिक्त है.

एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा, “सोने और चांदी के आभूषणों को सुरक्षित रूप से इकट्ठा किया जाता है, उनका मासिक मूल्यांकन किया जाता है और उन्हें तिरुपति में टीटीडी खजाने में ट्रांसफ़र कर दिया जाता है. संपत्ति के मालिकाना हक़ के दस्तावेजों को रेवेन्यू विभाग संभालता है ताकि मालिकाना हक़ के दस्तावेजों को टीटीडी के नाम पर ट्रांसफ़र किया जा सके.”

अधिकारी के मुताबिक़, “खाते आंध्र प्रदेश सरकार के ऑडिट विभाग द्वारा आंतरिक ऑडिट और वैधानिक ऑडिट से गुजरते हैं और “इन्हें नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) के ऑडिट के तहत लाया जा रहा है.”

परकामणि में चोरी

 परकामणि

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अप्रैल 2023 के अंतिम सप्ताह में, परकामणि में तैनात एक सहायक सतर्कता और सुरक्षा अधिकारी वाई. सतीश कुमार ने तिरुमला के टाउन-1 पुलिस स्टेशन में सीवी रवि कुमार के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई.

रवि कुमार का काम उन्हें आवंटित करेंसी बास्केट से अमेरिकी डॉलर को अलग करना था.

सतीश कुमार ने आरोप लगाया कि उन्होंने रवि कुमार के हाथों को उनके निजी अंगों की ओर अजीब तरह से जाते देखा.

बोर्ड के एक पूर्व सलाहकार के मुताबिक़, “कर्मचारियों और सेवकों को केवल धोती पहनकर ही गिनती कक्षों में जाने की अनुमति दी जाती है. उन्हें उनके अंतःवस्त्रों (अंडरवियर) के साथ जाने की अनुमति नहीं है.”

अपनी शिकायत में, सतीश ने आरोप लगाया कि रवि कुमार ने 100 अमेरिकी डॉलर के नौ नोट चुराए थे. शिकायत की जांच की गई और पुलिस ने चार्जशीट दायर की.

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक आदेश के मुताबिक़, इस चार्जशीट में सीवी रवि कुमार को आईपीसी की धारा 379 और 381 के तहत आरोपी बनाया गया. यह चार्जशीट 30.5.23 को तिरुपति के द्वितीय अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में दायर की गई थी.

अजीब बात यह है कि “वास्तविक शिकायतकर्ता ने स्वेच्छा से समझौता (कंपाउंड) कर लिया और नतीजा ये हुआ कि आरोपी को आईपीसी की धारा 320(8) के तहत बरी कर दिया गया.

19 सितंबर, 2025 के अपने आदेश में, न्यायमूर्ति गन्नमनेनी रामकृष्ण प्रसाद ने लोक अदालत के आदेश को निलंबित कर दिया और स्वतः संज्ञान लेते हुए आईजीपी, सीबी-सीआईडी को जांच करने और टीटीडी से पूरा रिकॉर्ड तुरंत जब्त करने का आदेश दिया.

14 नवंबर को 2025 को, सतीश कुमार का शव ताड़ीपत्री के पास एक रेलवे ट्रैक से बरामद किया गया था. यह मामला फिर से हाई कोर्ट गया और अदालत ने 2 दिसंबर 2025 तक पूरा ब्योरा पेश करने का आदेश दिया.

कुछ दिनों बाद, रवि कुमार एक वीडियो में दिखाई दिए जो वायरल हो गया. इस वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने पाप किया था और उन्होंने प्रायश्चित के रूप में अपनी 90 प्रतिशत संपत्तियां, जिनकी कीमत 14 करोड़ रुपये बताई जा रही है, मंदिर को दान कर दी थीं.

हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और सीआईडी ने रवि कुमार और टीटीडी के अन्य अधिकारियों से कथित तौर पर जुड़े मामले में अदालत को एक सीलबंद लिफाफा सौंपा.

यह मामला अभी अदालत के सामने आना बाकी है.

जनवरी में, सीआईडी को सतीश कुमार की मृत्यु की जांच में तेज़ी लाने के लिए कहा गया था. जांच का मक़सद यह पता लगाना था कि क्या वह अनंतपुर ज़िले में ट्रेन से गिर गए थे या यह हत्या का मामला था.

संक्षेप में कहे तो परकामणि चोरी का मामला व्यवस्था के मज़बूत रहने के बावजूद पारदर्शिता पर सवाल उठाता है.

सबरीमाला गोल्ड केस

सबरीमाला

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स्वामी अयप्पा के निवास स्थान सबरीमाला मंदिर में घोटाला कुछ और आगे बढ़ जाता है.

तिरुपति में जहां डॉलर चोरी होने के आरोप सामने आए थे, वहीं सबरीमाला में सोना ग़ायब हो गया.

ग़ायब हुआ सोना साढ़े चार किलो बताया गया है. दावों के मुताबिक़, ग़ायब हुए इस सोने को दरवाजों और द्वारपालकों (रक्षक देवता) पर तांबे के आवरण से बदल दिया गया.

1988 में सोने की परत चढ़ाने का काम हुआ था.चौंकाने वाली बात यह है कि 2019 और 2025 के बीच, उस सोने को तांबे से बदल दिया गया था.

इसकी पुष्टि हाल ही में राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) की एक रिपोर्ट ने की है.

दरअसल, मंदिर से 30.29 किलोग्राम सोना बाहर ले जाया गया था. जब दरवाजों, स्तंभों और स्वामी अयप्पा की कहानियों को दर्शाने वाले पैनलों को वापस लाया गया, तो पाया गया कि कथित तौर पर 4.54 किलोग्राम सोना गायब था.

केरल हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया. लेकिन हाई कोर्ट एक कदम और आगे बढ़ गया और आदेश दिया कि एसआईटी सीधे अदालत को रिपोर्ट करेगी.

देवस्वम बोर्ड के मंत्री के मुरलीधरन ने बीबीसी न्यूज हिन्दी को बताया, “सबरीमाला मामला पूरी तरह से हाई कोर्ट के नियंत्रण में है. जब तक एसआईटी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करती और हाई कोर्ट निर्णय नहीं लेता, हम इसमें दख़ल नहीं कर सकते.”

लेकिन लोगों के लिए सबसे हैरानी की बात वो लोग हैं जिन्हें इस कथित चोरी के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.

मंदिर के मुख्य पुजारी, कंदवारू राजीवरू, उनके सहायक उन्नीकृष्णन पोट्टी को आपराधिक विश्वासघात, जालसाज़ी और साज़िश के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. उन्नीकृष्णन पोट्टी को मुख्य आरोपी माना गया है.

इसके अलावा टीडीबी के दो पूर्व अध्यक्ष ए पद्माकुमार और एन वासु, बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी जैसे आयुक्त केएस बैजू और आरजी राधाकृष्णन, पूर्व टीडीबी सदस्य एन विजयकुमार और केपी शंकरदास, चेन्नई स्थित स्मार्ट क्रिएशन्स के मालिक पंकज भंडारी को अन्य लोगों के साथ गिरफ़्तार किया गया है.

मुरलीधरन ने बीबीसी से कहा, “टीडीबी एक क़ानूनी बॉडी है. कम से कम एक साल तक, हम कोई कार्रवाई शुरू नहीं कर सकते. हालांकि, हमने विजिलेंस विभाग से दान के उन फ़ंड के उपयोग की जांच करने को कहा है जो विशेष रूप से मंदिर के विकास के लिए उपयोग किए जाते हैं,”

पूर्व देवस्वम बोर्ड मंत्री जी सुधाकरन ने बीबीसी न्यूज हिन्दी से कहा, “यदि टीडीबी सही तरीके से काम करता है और पुजारी स्वामी अयप्पा के प्रति सच्चे हैं, तो ऐसी धोखाधड़ी नहीं होगी.”

इसका मतलब है कि एक बार जब हाई कोर्ट पेश की गई एसआईटी की रिपोर्ट पर विचार करेगा, तो और भी बहुत कुछ सामने आ सकता है.

लेकिन एक ऐसा धर्मस्थल भी है जिसमें किसी भी तरह का कोई सरकारी नियंत्रण नहीं हैं और जहां दान की चोरी का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है, हालांकि पूरी हुंडी के ही चोरी हो जाने की इक्का-दुक्का घटनाएं ज़रूर सामने आई हैं.

इस स्थान का संचालन पूरी तरह भक्तों की पूर्ण लोकतांत्रिक शक्ति से हो रहा है. हम जल्द ही इस धर्मस्थल पर भी एक रिपोर्ट पेश करेंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS