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जिस बच्चे को छोड़ दिया गया उसने 65 साल बाद अपने परिवार को कैसे तलाशा

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Source :- BBC INDIA

एक सॉफ़्टवेयर कंपनी में काम करने वाले डेविड स्टीवेन्सन ने कहा कि अपने जन्म देने वाले परिवार को तलाशना अद्भुत था

इमेज स्रोत, Julie Stevenson

डेविड स्टीवेन्सन ने 65 साल तक अपनी ज़िंदगी एक सवाल के साथ के साथ जूझते हुए गुजारी. वो सवाल था- ‘मैं कहां से आया हूं?’

पीटरबरो के रहने वाले डेविड एक ‘फ़ाउंडलिंग’ थे. यह शब्द उन बच्चों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें उनके जन्म देने वाले माता-पिता छोड़ देते हैं और अजनबी लोग उन्हें पाते हैं.

1960 में लंदन के गोल्डर्स ग्रीन में फ़्लैट्स की एक बिल्डिंग के हॉलवे में वो मिले थे. तब वो बस कुछ ही दिन के थे. उन्हें क्यों छोड़ा गया, इसकी कोई जानकारी नहीं थी. बाद में स्टीवेन्सन परिवार ने उन्हें गोद ले लिया.

उन्होंने कहा, “बड़े होते हुए मुझे पता था कि मैं एक ‘फ़ाउंडलिंग’ हूं. मेरे गोद लेने वाले माता-पिता ने मुझे यह बात बताई थी. लेकिन जब मेरे अपने बच्चे हुए, तब मैंने सोचना शुरू किया कि मैं कहां से आया हूं.”

1960 में, डेली मेल ने लंदन में हॉलवे में छोड़े गए बच्चे के बारे में एक खबर छापी

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1960 में, ‘डेली मेल’ ने लंदन की एक बिल्डिंग की दूसरी मंज़िल पर छोड़े गए “रेनबो बेबी” की पहचान करने के लिए एक अपील की थी. अख़बार ने 2009 में इस कहानी को फिर से उठाया ताकि नई जानकारी मिल सके.

सालों की खोज के बावजूद, डेविड ने बताया कि उनके गोद लेने से जुड़े रिकॉर्ड में उनके जन्म देने वाले माता-पिता के बारे में बहुत कम जानकारी थी.

उन्होंने कहा, “यह भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा था.”

“लेकिन मेरी पत्नी ने इसमें दिलचस्पी ली और उन्हें पता चला कि रिकॉर्ड में एक पुलिस रिपोर्ट मौजूद थी. वह उस महिला पुलिस कॉन्स्टेबल, टेगवेन कर्ल को ढूंढ पाईं, जिन्होंने उस समय मेरा मामला संभाला था. वह हमें उस दिन के बारे में और जानकारी दे पाईं, जब मैं मिला था.”

उनकी पत्नी जूली स्टीवेन्सन पीटरबरो शहर की पूर्व काउंसलर हैं. उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी ने बताया कि वह डेविड को बचाने की घटना कभी नहीं भूल पाईं. यह उनके करियर की सबसे यादगार और भावुक घटनाओं में से एक थी.”

डेविड स्टीवेन्सन 17 साल पहले टेगवेन कर्ल से मिले थे

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आखिरकार खोजबीन से डेविड को जन्म देने वाली मां पेट्रा के बारे में जानकारी मिली. पेट्रा का जन्म 1940 में नीदरलैंड्स में हुआ था और वह एक कैथोलिक परिवार में पली-बढ़ी थीं.

जूली ने बताया कि 19 साल की उम्र में वह ‘ऑ-पेयर’ के तौर पर काम करने के लिए फ्रांस और बाद में इंग्लैंड गईं. साल 1960 में वह डेविड की मां बनीं.

उन्होंने कहा, “हालांकि यह साफ़ नहीं है कि लंदन पहुंचने पर उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में पता था या नहीं. लेकिन उन्होंने बच्चे को पूरे समय तक गर्भ में रखा और ऐसा लगता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें अपने आस-पास के लोगों का साथ मिला.”

जूली और डेविड स्टीवेन्सन 2002 से साथ हैं

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‘मुझे उनके लिए सहानुभूति है’

डेविड सबसे पहले 2015 में फ़ाउंडलिंग म्यूज़ियम की यात्रा के दौरान आईटीवी की ‘लॉन्ग लॉस्ट फ़ैमिली’ टीम के संपर्क में आए.

उन्होंने कहा, “डीएनए और जेनियालोजिकल रिसर्च के ज़रिए मेरी असली मां की पहचान करने में इस प्रोग्राम को बड़ी कामयाबी मिली, जो वाकई कमाल की बात है.”

“दुर्भाग्य से 2010 में उनका निधन हो गया. लेकिन मेरे नए रिश्तेदारों ने उनके बारे में जो कहानियां मुझे सुनाई हैं. उनसे वह मेरे लिए फिर से ज़िंदा हो उठी हैं. वह बहुत प्यार करने वाली महिला थीं.”

डेविड ने कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने मेरी देखभाल के लिए कोई इंतज़ाम किया था. लेकिन शायद उस इंतज़ाम में कुछ गड़बड़ हो गई. जिसकी वजह से मुझे देखभाल के लिए सरकारी सिस्टम में भेज दिया गया.”

“लेकिन मेरे मन में उनके लिए सिर्फ़ हमदर्दी है. 1950 और 60 के दशक में बिना शादी के मां बनना लड़कियों के लिए मुश्किल था. मुझे लगता है कि उन्होंने जो सबसे अच्छा हो सकता था, वही किया.”

जूली ने कहा: “हमें यह मानना ​​होगा कि उनके सामने आने में न हिचकिचाने या न आ पाने की अपनी वजहें रही होंगी. और यह ठीक है. हम कौन होते हैं फैसला करने वाले? हमने उनकी ज़िंदगी नहीं जी है. बस जो हुआ वह बहुत दुखद था.”

डेविड स्टीवेन्सन को स्टीवेन्सन परिवार ने तब गोद लिया था, जब वे सिर्फ़ कुछ दिन के थे

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तब से डेविड रॉटरडैम में अपनी मां की बहन मैरिएन और कज़िन्स से दोबारा जुड़ गए हैं. उन्होंने इसे एक ‘दिलचस्प कहानी’ बताया.

उन्होंने कहा: “परिवार ने बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया और वे बहुत अच्छे लोग हैं. उनसे मिलकर बहुत खुशी हुई.”

“यह सब डीएनए टेक्नोलॉजी की वजह से मुमकिन हो पाया. कनाडा की एक लड़की का डीएनए इस डीएनए साइट पर मुझसे मैच हुआ. जिससे हम इस परिवार तक पहुंच पाए. अब मुझे यह भी पता चला है कि मेरी परदादी इंडोनेशिया से थीं.”

“यह जानना बहुत संतोषजनक है कि मैं कहाँ से आया हूं. हालांकि, अभी पिता की तरफ़ के परिवार के बारे में भी पता लगाना बाकी है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS