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US से राहत मिलते अडानी को खुशखबरी, 800 मिलियन डॉलर के लोन का हुआ इंतजाम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका की अदालत से राहत मिलने के बाद अब गौतम अडानी समूह को एक और खुशखबरी मिली है। समूह ने डेटा सेंटर के कारोबार को बढ़ाने के लिए विदेशी कर्जदाताओं के एक ग्रुप से लगभग 800 मिलियन डॉलर का लोन लिया है। ब्लूमबर्ग की एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि एजकनेक्स (EdgeConneX) के साथ मिलकर बनाई गई ज्वाइंट वेंचर कंपनी अडानीकनेक्स प्राइवेट लिमिटेड (AdaniConneX Pvt.) ने DBS ग्रुप होल्डिंग्स लिमिटेड, मित्सुबिशी UFJ फाइनेंशियल ग्रुप और सिंगापुर की क्लिफर्ड कैपिटल जैसे कर्जदाताओं से यह लोन हासिल किया है।

क्या होगा लोन के पैसे का?

ब्लूमबर्ग की खबर में बताया गया है कि जुटाए गए फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में अडानीकनेक्स के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। यह लोन एक ‘ब्रिज फैसिलिटी’ के तौर पर लिया गया है और उम्मीद है कि बाद में इसे लंबी अवधि के कर्ज से रीफाइनेंस किया जाएगा। 18 महीने के इस लोन की लागत ‘सिक्योर्ड ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट’ (SOFR) से लगभग 200 बेसिस पॉइंट ज्यादा होगी।

अमेरिका से मिली है राहत

अमेरिका की एक अदालत ने अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर के खिलाफ प्रतिभूति धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामले को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही यह मुकदमा बिना सुनवाई के समाप्त हो गया। न्यूयॉर्क के ‘यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट’ ने न्याय विभाग के नियम 48(ए) के तहत दायर याचिका स्वीकार करते हुए आरोपपत्र में शामिल दूसरे, तीसरे और चौथे आरोपों को खारिज कर दिया। इसका मतलब है कि इन आरोपों को दोबारा दाखिल नहीं किया जा सकता।

इन आरोपों में सिक्योरिटीज धोखाधड़ी की साजिश, वायर धोखाधड़ी की साजिश और सिक्योरिटीज धोखाधड़ी के आरोप शामिल थे। वायर धोखाधड़ी की साजिश एक संघीय अपराध है जिसमें दो या उससे अधिक लोग धोखा देने के मकसद से, इंटरनेट, ईमेल या फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक संचार का इस्तेमाल करके दूसरों के पैसे या संपत्ति हड़पने की साजिश करते हैं।

गौतम अडानी ने क्या कहा?

अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम अडानी ने कहा कि यह सत्य की जीत है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान जताया और कार्यवाही के दौरान (अडानी) समूह के साथ खड़े रहने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया। बता दें कि नवंबर 2024 में सार्वजनिक किए गए आरोपपत्र में आरोप लगाया गया था कि अडानी समूह के अधिकारियों ने सौर ऊर्जा के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की साजिश रची थी।

इन ठेकों से दो अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का मुनाफा होने का अनुमान था। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि करीब चार अरब अमेरिकी डॉलर का फंड जुटाने में मदद करने वाले निवेशकों को गुमराह किया गया तथा अन्य आरोपियों ने साक्ष्य नष्ट किए और संघीय जांचकर्ताओं से झूठ बोला।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN