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फ़ॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के सहयोगी देश ओमान को धमकी दी है कि अगर वह ईरान के साथ उनके प्रशासन की वार्ता में “बाधा डालता है” तो उस पर बमबारी की जाएगी.
नेटवर्क के एक रिपोर्टर ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को एक फ़ोन कॉल के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के साथ सीधा गुप्त संपर्क है.
बाद में आईआरजीसी ने अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल होने से इनकार किया. लेकिन ईरानी अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों के आवागमन को लेकर ओमान के साथ एक समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं.
इस बीच, 60 दिनों का समझौता ज्ञापन (एमओयू) सोमवार को समाप्त हो रहा है. यह ज्ञापन अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए आगे की बातचीत के लिए अमेरिका और ईरान दोनों के बीच एक प्रतिबद्धता थी.
आईआरजीसी ने दावे को किया ख़ारिज
ओमान, जो इस संघर्ष में ख़ुद को तटस्थ देश बताता है, संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान की ओर से कई हमलों का सामना कर चुका है. हालांकि, अब वह जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए ईरान के साथ बातचीत में भूमिका निभा रहा है.
फरवरी में अमेरिका और इसराइल के हमले के बाद से ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को लगभग पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया है, जिससे होकर दुनिया का लगभग 20 फ़ीसदी तेल और लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस का परिवहन होता है. इसे फिर से खोलना चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा है.
अमेरिका ने भी इसे फिर से खोलने के लिए अपने स्तर पर प्रयास किए हैं. फॉक्स न्यूज़ के पत्रकार ट्रे यिंगस्ट ने ट्रंप के हवाले से कहा, “अगर ओमान इसमें बाधा डालता है, तो हम उस पर बमबारी करके उसे तबाह कर देंगे.”
आईआरजीसी के एक प्रवक्ता ने ट्रंप के उस दावे का खंडन किया, जो उन्होंने उसी साक्षात्कार में किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका आईआरजीसी के साथ गुप्त वार्ता में शामिल था. आईआरजीसी ईरान में एक प्रमुख सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक शक्ति है.
एक प्रवक्ता ने अर्ध-सरकारी ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम न्यूज़ को बताया, “आईआरजीसी अधिकारियों और अमेरिकियों के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है, और ट्रंप का यह झूठ युद्ध में हार और हताशा के परिणामस्वरूप उनके द्वारा झेले गए भ्रम और बुरे सपनों से पैदा हुए सिर्फ़ काल्पनिक विचार हैं.”
ईरान और ओमान के बीच समझौते पर सहमति
ट्रंप ने ओमान को तब धमकी दी है जब सोमवार को ईरान ने कहा था कि दोनों पक्षों (ईरान और ओमान) के बीच जलडमरूमध्य से जहाज़ों के आवागमन के लिए एक समझौता हो गया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने तेहरान में पत्रकारों को बताया कि “ट्रांज़िट रूट के नक्शे के संबंध में एक सहमति बन गई है.”
बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस न्यूज द्वारा प्रकाशित बयान में, बगाई ने कहा कि दोनों पक्ष संयुक्त बयान जारी करने से पहले विवरणों को अंतिम रूप देंगे. ओमान ने पहले इन वार्ताओं को सकारात्मक बताया था.
इस महीने की शुरुआत में, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा था कि समझौते के उल्लंघन के लिए अमेरिका से मुआवजे़ मिलने पर ही पूर्ण रूप से संबंध फिर से खुलेंगे.
रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया था कि ईरान उन जहाज़ों से माल की कीमत का 5% से 7% के बीच शुल्क वसूल रहा था जो होर्मुज़ से गुज़रते हैं.
ट्रंप ने फ़ॉक्स न्यूज़ के साथ बातचीत में कहा कि उनका आईआरजीसी के साथ सीधा गुप्त संपर्क है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें युद्ध को समाप्त करने की कोई जल्दी नहीं है.
उन्होंने कहा, “वे अच्छे पोकर खिलाड़ी हैं, लेकिन उनकी हालत बहुत ख़राब है. मेरे पास कोई समय सीमा नहीं है. मुझे कोई जल्दी नहीं है.”
राष्ट्रपति ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों का “मेरी सोच से कोई लेना-देना नहीं है.”
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका के इकट्ठा करके रखे गए हथियारों के कम होने से उसे कोई परेशानी नहीं है, और कहा कि “हमने जितना इस्तेमाल किया है वह नाममात्र का है.”
गोला-बारूद पर हुए खर्च और बचे हुए स्टॉक के बारे में अभी कुछ नहीं बताया गया है. लेकिन वॉशिंगटन डीसी में मौजूद सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (सीएसआईएस) के इकट्ठा किए गए पब्लिक डेटा ने हाल ही में कम होते स्टॉक की एक साफ़ तस्वीर दिखाई है, जिसे कम समय में बदलना मुश्किल है.
सीएसआईएस में रिटायर्ड कोर कर्नल और सीनियर सलाहकार ने पहले बीबीसी को बताया था कि एक मिसाइल बनाने में आम तौर पर “एक से पांच साल” लगते हैं.
“और आप इसे तेज़ करने के लिए कुछ नहीं कर सकते.”
18 जून को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों पक्षों को स्थायी युद्धविराम पर लाना था, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर हमले शुरू करने के बाद अस्थायी शांति कुछ ही समय बाद भंग हो गई.
8 जुलाई को ट्रंप ने युद्धविराम की समाप्ति की घोषणा की.
सोमवार को युद्धविराम की औपचारिक समाप्ति नज़दीक आने पर, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया: “हमारा सबसे पहला लक्ष्य है, और हमेशा रहेगा, कि ईरान किसी भी रूप में परमाणु हथियार हासिल न कर सके.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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