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सीजेपी एफ़आईआर रद्द न होने से नाराज़, सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर्ड कमेटी क्या करेगी?

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Source :- BBC INDIA

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता

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नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाइयों और पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक कमिटी गठित करने का फ़ैसला किया है.

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को रद्द करने की मंशा जताई है.

दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा है कि प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स पर दर्ज एफ़आईआर के मामले में सरकार की मंशा सही नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को नीट पेपर लीक के ख़िलाफ़ हुए आंदोलन के दौरान सामने आए कई मुद्दों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.

कोर्ट की ओर से बना जा रही ये हाई पावर्ड कमिटी नीट-यूजी पेपर लीक के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों के दौरान सामने आए सभी मुद्दों की जांच करेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कैसी कमेटी बनाई?

जस्टिस सूर्यकांत

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने संकेत दिए हैं कि इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, हाई कोर्ट के एक पूर्व जज और डीजीपी रैंक के एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी होंगे.

क़ानूनी मामलों को कवर करने वाली बेवसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई-पावर्ड पैनल को फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग का काम सौंपा जाएगा और समय-समय पर रिपोर्ट जमा करने को कहा जाएगा ताकि कोर्ट ज़रूरी निर्देश दे सके.

बेंच ने कहा, “हम कमेटी को सभी ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देंगे. हमें पूरा यकीन है कि कमेटी अपने पास आने वाले किसी भी पीड़ित को तुरंत अपनी बात कहने का मौका देगी. हम उन सुझावों का इंतज़ार करेंगे जो कमेटी समय-समय पर देगी, और ज़रूरी कानूनी नतीजे भी सामने आएंगे.”

कोर्ट ने यह भी कहा कि कमेटी महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन हिंसा और ऑनलाइन उत्पीड़न और सोशल मीडिया के ज़रिए दूसरे कमज़ोर लोगों को परेशान करने के आरोपों की भी जांच करेगी.

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “जो भी ज़िम्मेदार है, उसके पास कोई बहाना या कोई वजह नहीं हो सकती. इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसके लॉजिकल नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए. इसीलिए हम एक हाई-पावर्ड कमेटी बना रहे हैं. कमेटी इन मामलों के हर पहलू पर गौर करेगी.”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हमने सीबीआई के एक पूर्व महानिदेशक को सदस्य बनने के लिए राज़ी कर लिया है, जो एक बहुत ही प्रतिष्ठित अधिकारी हैं और कुछ साल पहले रिटायर हुए हैं. हमने एक राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक की भी सहमति ले ली है, जिनका इससे कोई संबंध नहीं है. वह भी एक रिटायर अधिकारी हैं.”

जस्टिस सूर्यकांत ने पक्षों से कहा कि दो विकल्प खुले रखे गए थे ताकि अदालत नहीं चाहती कि भविष्य में कोई भी सीबीआई अधिकारी की मौजूदगी पर किसी तरह के आरोप लगाए.

उन्होंने कहा, “हम नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते क्योंकि हम अधिकारियों को किसी भी तरह की उलझन से बचाना चाहते हैं. दोनों में से आपको क्या लगता है कि हमें किसे कमेटी में शामिल करना चाहिए? या यह फैसला आप हम पर छोड़ते हैं.”

कोर्ट ने कहा कि अगर पक्षकार कमेटी पर अपने सुझाव देते हैं, तो बुधवार को ही आदेश जारी किया जा सकता है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “एक बार आपके सुझाव आ जाएं, तो हम कल आदेश जारी कर पाएंगे.”

प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफ़आईआर का क्या होगा?

प्रदर्शनकारी

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जंतर-मंतर पर बीते महीने हुए प्रदर्शन के दौरान सीजेपी की कई मांगों में से एक मांग ये भी थी कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफ़आईआर रद्द हो. इस मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी है.

बार एंड बेंच के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह आर्टिकल 142 (सुप्रीम कोर्ट की पूरी तरह न्याय करने की ख़ास शक्ति) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके स्टूडेंट्स से जुड़ी एफ़आईआर को रद्द करने पर विचार करेगा, लेकिन गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामलों को अलग से देखा जा सकता है.

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस बात से सहमत थे कि स्टूडेंट प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर रद्द होनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने कहा कि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी प्रदर्शन में घुस आए थे और उनकी जांच होनी चाहिए.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2,873 लोगों को छोड़कर, जिनके ख़िलाफ़ हत्या, रेप, अपहरण जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामले हैं, बाक़ी लोगों के ख़िलाफ़ मामले रद्द किए जा सकते हैं.

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि राज्य सरकारें उन एफ़आईआर की लिस्ट जमा कर सकती हैं जिनमें सिर्फ़ स्टूडेंट्स शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इस कोर्ट की पावर के बारे में कानून अच्छी तरह से तय है और हम उस पावर का इस्तेमाल कर सकते हैं. जहां तक उन लोगों से जुड़ी एफ़आईआर की बात है जिनके बारे में आप कहते हैं कि उनका क्रिमिनल रिकॉर्ड है, हमने पिछली बार इस बात को सही ठहराया था.”

सीजेपी ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स पर दर्ज एफ़आईआर के मामले में सरकार की मंशा सही नहीं है.

उन्होंने कहा, “सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में हां बोल रहे हैं, कोर्ट जब मांग रहा है कि एफ़आईआर की लिस्ट दीजिए, जो हमें ख़त्म करनी है तो आप वो लिस्ट दे क्यों नहीं रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारी स्टूडेंट के ख़िलाफ़ एफ़आईआर रद्द होनी चाहिए. यह कैसे किया जाए, माननीय न्यायाधीश तय कर सकते हैं. साथ ही प्रदर्शनों में घुसपैठ करने वाले असामाजिक तत्वों की जांच होनी चाहिए.”

सौरव दास ने कहा, “इस मुद्दे पर पिछली सुनवाई कई दिन पहले हुई थी, आज फिर वही स्थिति है. मैं आपको बता रहा हूं, मंशा सही नहीं है. उन लोगों ने क़रीब 2800 अपराधियों की पहचान की है, उनके ख़िलाफ़ अगर एक्शन लेना है तो वो अलग मुद्दा है.”

“लेकिन स्टूडेंट का, प्रदर्शनकारियों का जो मुद्दा है वो एफ़आईआर से जुड़ा हुआ है. आप कोर्ट में हां बोल रहे हैं लेकिन जो एक्शन लेना है उस पर हिचक रहे हैं, तो आपकी मंशा नहीं दिखती है. हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे. हमारे साथ ‘देर करने वाली रणनीति’ मत खेलिए.”

उन्होंने कहा, “अगर ऐसे लोगों (पहले से गंभीर अपराध में शामिल) ने प्रदर्शन में शामिल होकर कोई अपराध किया है तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई कीजिए. लेकिन इसकी आड़ में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे तो उसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS