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स्मार्टफोन क्यों हो रहे हैं महंगे, आगे सस्ते होंगे या कीमतों में आएगी और तेजी?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़त के पीछे सबसे बड़ी वजह DRAM और NAND मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें हैं, जिस पर AI डेटा सेंटर की मांग का भी असर पड़ा है। सवाल है कि आगे कीमतें कम होंगी या नहीं। 

आपने महसूस किया होगा कि स्मार्टफोन अब पहले के मुकाबले ज्यादा महंगे हो गए हैं और कई प्रैंड्स अपने मौजूदा डिवाइसेज की कीमत बढ़ा रही हैं। 2026 में मोबाइल कंपनियों की लागत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह मेमोरी चिप्स यानी DRAM और NAND की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है। इसका असर खासतौर पर बजट और मिड-रेंज फोन्स पर दिखाई दे रहा है। Counterpoint Research के मुताबिक 2026 की दूसरी तिमाही में समान कॉन्फिगरेशन वाले लो-एंड स्मार्टफोन की कंपोनेंट लागत एनुअली करीब 70 प्रतिशत बढ़ गई। मिड-रेंज फोन की लागत में भी 52 फीसदी की बढ़त हुई।

AI ने बढ़ाई मेमोरी की मांग

मेमोरी की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह AI का तेजी से विस्तार है। AI डेटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में DRAM और खास तरह की हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की जरूरत होती है। Samsung, SK Hynix और Micron जैसी प्रमुख कंपनियां AI से जुड़ी मेमोरी की मांग को पूरा करने के लिए प्रोडक्शन क्षमता का बड़ा हिस्सा इस दिशा में लगा रही हैं। इसका असर सामान्य DRAM और NAND की सप्लाई पर पड़ा है, जिनका इस्तेमाल स्मार्टफोन में RAM और स्टोरेज के लिए होता है।

ऐसे में समस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मेमोरी अब फोन की लागत का छोटा हिस्सा नहीं रह गई है। Counterpoint के अनुसार 2026 की दूसरी तिमाही में स्मार्टफोन मेमोरी की कीमतों में तिमाही आधार पर 80 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई। प्रीमियम स्मार्टफोन में DRAM अब चिपसेट यानी SoC से भी महंगा कंपोनेंट बन गया है।

फीचर्स भी घटा सकती हैं कंपनियां

मेमोरी महंगी होने का असर केवल फोन की कीमत बढ़ने तक सीमित नहीं है। कंपनियों के पास लागत संभालने के लिए दूसरा रास्ता फोन के स्पेसिफिकेशंस में बदलाव करना भी है। उदाहरण के लिए, जिस कीमत पर पहले 12GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलती थी, उसी कीमत के आसपास अब कुछ कंपनियां 8GB RAM और 128GB स्टोरेज वाला मॉडल पेश कर सकती हैं। IDC ने भी अनुमान जताया है कि बढ़ती मेमोरी लागत के कारण मैन्युफैक्चरर कुछ डिवाइस में RAM और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन कम कर सकते हैं।

भारत में इसका असर मार्केट पर भी पड़ रहा है। Counterpoint के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में भारत में नए स्मार्टफोन की औसत लॉन्च कीमत सालाना आधार पर 11 फीसदी बढ़कर करीब 37,200 रुपये पहुंच गई। वहीं दूसरी तिमाही में भारत के स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई। यानी कीमत बढ़ने का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी पड़ रहा है।

क्या आगे स्मार्टफोन सस्ते होंगे?

यह सबसे बड़ा सवाल है और इसका जवाब फिलहाल पूरी तरह साफ नहीं है। मेमोरी की सप्लाई बढ़ने पर कीमतों में राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तुरंत बड़ी गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है। Counterpoint के अगस्त 2026 के अनुमान के मुताबिक मोबाइल DRAM की कीमतें तीसरी तिमाही में भी करीब 10 फीसदी क्वॉर्टर ग्रोथ कर सकती हैं।

मतलब यह है कि आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। खासतौर पर 15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि इस सेगमेंट में कंपनियों का मार्जिन पहले ही कम होता है। महंगे फोन में कंपनियां बढ़ी हुई लागत को कीमत में शामिल करना आसान समझ सकती हैं। हालांकि लंबे वक्त में तस्वीर बदल सकती है।

अगर मेमोरी प्रोडक्शन बढ़ता है, AI डेटा सेंटर की मांग और सप्लाई के बीच बैलेंस सुधरता है और DRAM-NAND की कीमतें नीचे आती हैं, तो स्मार्टफोन कंपनियों को लागत में राहत मिलेगी। उस कंडीशंस में नए फोन सस्ते हो सकते हैं या कम से कम उसी कीमत में बेहतर RAM, स्टोरेज और दूसरे फीचर्स मिलने लग सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN