Source :- LIVE HINDUSTAN
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज सुबह ही ब्रेंट की कीमत करीब 1.44% बढ़कर 99.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI करीब 94.42 डॉलर प्रति बैरल पर था। सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों और ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने से दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।
भारत के लिए यह चिंता इसलिए बड़ी है क्योंकि देश अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची रहने पर इसका सीधा असर भारत के तेल आयात बिल, रुपये, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।
ईरान के महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग पर धमाकों की खबर ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी। अगर इस इलाके से तेल का निर्यात बाधित होता है तो दुनिया के बाजार में पहले से मौजूद सप्लाई दबाव और बढ़ सकता है।
भारत पर सबसे बड़ा असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत में हर बड़ी तेजी देश के लिए महंगी पड़ती है। अप्रैल-जुलाई के दौरान भारत का कच्चे तेल का आयात बिल पहले ही 56% से ज्यादा बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो चुका है। पिछले साल इसी अवधि में यह 40.5 अरब डॉलर था।
खास बात यह है कि आयात की मात्रा लगभग उतनी ही रही। यानी ज्यादा तेल खरीदने के बजाय तेल महंगा होने की वजह से भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़े।
भारतीय क्रूड बास्केट भी 100 डॉलर पार
भारत के लिए चिंता सिर्फ ब्रेंट के 100 डॉलर के करीब पहुंचने तक सीमित नहीं है। PPAC के मुताबिक भारत जिस क्रूड बास्केट को आयात करता है, उसकी औसत कीमत सोमवार को 106.26 डॉलर प्रति बैरल रही।
सितंबर में अब तक भारतीय क्रूड बास्केट का औसत 100.75 डॉलर प्रति बैरल है। यह में जुलाई 82.04, अगस्त में 90.19 और सितंबर में औसतन 100.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यानी कुछ ही महीनों में भारत के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत में जबरदस्त उछाल आया है।
पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल फ्रीज, लेकिन दबाव बढ़ा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल तीन महीने से ज्यादा समय से नहीं बदली हैं। आज भी बेंचमार्क दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है।
आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। मई के दूसरे हिस्से में कुल चार बार में पेट्रोल की कीमत 7.35 रुपये और डीजल की कीमत 7.53 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय कीमतें फिर ऊपर जा रही हैं। ऐसे में तेल कंपनियों पर कीमत बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है।
तेल कंपनियों का मार्जिन भी दबाव में
महंगे कच्चे तेल का असर सिर्फ ग्राहक पर नहीं पड़ता। इसका दबाव IOC, BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ता है। अगर कंपनियां अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों की पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक नहीं पहुंचातीं तो उनके मार्केटिंग मार्जिन पर असर पड़ता है। ICRA के मुताबिक मौजूदा तेजी के कारण ऑटो फ्यूल पर मार्केटिंग मार्जिन नकारात्मक हो सकता है।
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