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भारत में Xiaomi पर फिर शिकंजा! अब SFIO ने की डिटेल्ड जांच की मांग, इस ‘कांड’ में फंसी कंपनी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

शाओमी के लिए SFIO की जांच एक और झटका साबित हो सकती है। कंपनी 2022 से अपने भारतीय बैंक खातों में जमा 55.51 अरब रुपये (करीब 584 मिलियन डॉलर) की जब्ती को हटाने में असफल रही है। यह जब्ती गैर-कानूनी तरीके से पैसे भेजने (रेमिटेंस) के आरोप में लगाई गई थी, जिसे शाओमी नकारती है।

भारत में Xiaomi की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। एक सरकारी दस्तावेज से पता चलता है कि भारत के ‘सीरियस फ्रॉड ऑफिस’ ने शाओमी के बिजनेस मॉडल और विदेशी निवेश कानूनों के पालन में कथित गड़बड़ियों की जांच की सिफारिश की है। इससे इस स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है। चीन की शाओमी कभी भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला स्मार्टफोन ब्रांड थी, लेकिन ऐप्पल और सैमसंग से कड़ी टक्कर के कारण उसका मार्केट शेयर कम हो गया है। कंपनी कई टैक्स से जुड़े दावों और रॉयल्टी पेमेंट के विवादों का भी सामना कर रही है।

भारत के ‘सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस’ (SFIO) की सिफारिश में कहा गया है कि जांच में फंड के लेन-देन की पड़ताल होनी चाहिए। साथ ही, यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या शाओमी ने निवेश के लिए जरूरी मंजूरी ली थी, क्योंकि 2020 में दोनों देशों के बीच सीमा पर हुई हिंसक झड़पों के बाद भारत ने चीनी निवेश की जांच-पड़ताल कड़ी कर दी थी। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि सरकार उस मेमोरैंडम की जांच कर रही है, जिसे मई में तैयार किया गया था और रॉयटर्स ने उसकी समीक्षा की थी।

SFIO ने की डिटेल जांच की मांग

यह खुलासा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए होने वाले संभावित दौरे से ठीक पहले आया है। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशी निवेशकों और समूह संस्थाओं के लाभकारी स्वामित्व की जांच होना चाहिए।

जांच में यह जांचना चाहिए कि किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभकारी स्वामित्व, नियंत्रण या नियंत्रण में बदलाव का सही तरीके से खुलासा और मंजूरी ली गई थी या नहीं। साथ ही यह सिफारिश की गई है कि एसएफआईओ द्वारा विस्तृत जांच की जाए।

रॉयटर्स को दिए एक बयान में, शाओमी के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी को SFIO से कोई नोटिस या सूचना नहीं मिली है। उन्होंने आगे कहा: “हम देश के कानूनों को सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं और हर समय उनका पूरी तरह से पालन करते हैं।”

SFIO की मूल संस्था, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और SFIO के प्रवक्ता ने सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। बता दें कि SFIO भारत की मुख्य एजेंसी है जो कॉर्पोरेट धोखाधड़ी की जांच करती है और इसके पास दोषियों को गिरफ्तार करने और उन पर मुकदमा चलाने का अधिकार है। Xiaomi Technology India Private Limited और उससे जुड़ी कंपनियों के लिए इसका प्रस्ताव अपनी मूल मिनिस्ट्री से मंजूरी का इंतजार कर रहा है, जो ऐसे मामलों में एक सामान्य प्रक्रिया है।

भारतीय लॉ फर्म ‘कॉन्सेक्रो लॉ’ की फाउंडर मेघाव गुप्ता ने कहा, “ऐसे मामलों में फैसला लेने के लिए मंत्रालय के पास कोई समय-सीमा नहीं होती – इसमें महीनों लग सकते हैं। हो सकता है कि मंत्रालय को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त जानकारी न मिले या वह SFIO को जांच शुरू करने की मंजूरी दे दे। वह दूसरे विभागों से भी इस मामले की जांच करने के लिए कह सकता है।”

2020 में लागू किए गए सख्त विदेशी निवेश नियमों के मुताबिक किसी भी चीनी कंपनी द्वारा भारत में निवेश करने से पहले सरकार की मंजूरी लेना जरूरी था। कंपनियों, जिनमें शाओमी भी शामिल है, ने कहा था कि इससे देरी होती थी।

इस साल की शुरुआत में, भारत सरकार ने कुछ प्रतिबंधों में ढील दी, क्योंकि नई दिल्ली और बीजिंग सीमा पर शांति बनाए रखने पर काम कर रहे हैं। शी की अपेक्षित यात्रा को संबंधों को और अधिक स्थिर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

भारत में Xiaomi के सामने कई चुनौतियां

शाओमी के लिए SFIO की जांच एक और झटका साबित हो सकती है। कंपनी 2022 से अपने भारतीय बैंक खातों में जमा 55.51 अरब रुपये (करीब 584 मिलियन डॉलर) की जब्ती को हटाने में असफल रही है। यह जब्ती गैर-कानूनी तरीके से पैसे भेजने (रेमिटेंस) के आरोप में लगाई गई थी, जिसे शाओमी नकारती है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार कंपनी भारत के स्मार्टफोन बाजार में चौथे स्थान पर फिसल गई है और उसकी हिस्सेदारी घटकर 13% रह गई है, जो पहले 19% थी। 2025 में इसकी भारत से कमाई 2.52 अरब डॉलर रही, जो तीन साल पहले की तुलना में 40% कम है।

SFIO के प्रस्ताव में कहा गया है कि एजेंसी सरकार के कॉमर्स मिनिस्ट्री से मिली शिकायतों और जानकारी के आधार पर Xiaomi के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर रही है। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने भी रॉयटर्स के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। SFIO ने दूसरी सरकारी एजेंसियों के साथ “तालमेल” बनाने की भी बात कही, ताकि एक-दूसरे से जुड़े उल्लंघनों को आपस में जोड़ा जा सके।

मेमोरेंडम में SFIO द्वारा देखी गई जानकारी के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया, लेकिन इसमें जांच का 21-सूत्रीय ढांचा पेश किया गया। इसमें जांच का दायरा, तरीका और कार्य-योजना शामिल थी, साथ ही जरूरत पड़ने पर कंपनी के अधिकारियों को समन भेजने की संभावना भी बताई गई थी।

SFIO ने कहा कि भारत सरकार के पास जमा किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट और ऑडिटर की रिपोर्ट की “बड़ी गलतियों (मटेरियल मिसस्टेटमेंट) के लिए जांच” की जानी चाहिए। साथ ही, मौजूदा और पूर्व डायरेक्टर, CFO और कंप्लायंस ऑफिसर के बयान भी दर्ज किए जाने चाहिए।

ई-कॉमर्स की जांच

Xiaomi जैसे ब्रांड Amazon और Walmart के Flipkart पर अपने प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन बिक्री के जरिए भारत में बहुत लोकप्रिय हो गए हैं। लेकिन छोटे ऑफलाइन रिटेलर्स ने बार-बार इन दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों पर सेलर्स के साथ एक्सक्लूसिव समझौते करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे छोटे ऑफलाइन बिजनेस को नुकसान होता है, जबकि भारत के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) कानूनों के तहत ऐसे समझौते प्रतिबंधित हैं। Amazon और Flipkart इन आरोपों से इनकार करते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत की एंटी-ट्रस्ट एजेंसी ने आरोप लगाया कि Xiaomi उन स्मार्टफोन कंपनियों में शामिल थी जिन्होंने इन दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ मिलकर कॉम्पिटिशन कानूनों का उल्लंघन करते हुए अपने प्रोडक्ट्स को एक्सक्लूसिव तौर पर ऑनलाइन लॉन्च किया था। Xiaomi ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

SFIO की जांच के प्रस्ताव में इस मामले पर Xiaomi की और जांच करने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि क्या भारतीय सेलर्स या लॉन्च पार्टनर्स पर कंपनी का “असल कंट्रोल” था, जबकि उसने इन समझौतों को “आर्म्स लेंथ” (यानी बिना किसी खास प्रभाव या मिलीभगत के) पर काम करने वाला बताया था।

SFIO ने कहा, “जांच में खास तौर पर यह देखा जाना चाहिए कि क्या चुनिंदा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर Xiaomi के प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता के साथ और एक्सक्लूसिव तौर पर लॉन्च करने से… ई-कॉमर्स (कंपनियों) पर लागू FDI पॉलिसी का मकसद नाकाम हुआ है।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN