Source :- LIVE HINDUSTAN
इस तुगलकी फरमान का खुलासा तब हुआ जब स्कूल के ही एक टीचर ने स्टाफ मीटिंग में दिखाए गए पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) की तस्वीर इंटरनेट पर लीक कर दी। पीपीटी के इस स्लाइड में क्लासरूम मैनेजमेंट के जो कड़े नियम लिखे थे, वे हैरान करने वाले हैं।
क्लास चल रही हो और टॉयलेट जाना पड़ जाए, तो यह बेहद सामान्य बात है। लेकिन चीन के एक स्कूल ने इस बुनियादी इंसानी जरूरत पर ही ऐसा अजीबोगरीब नियम थोप दिया है कि लोग सन्न रह गए। दक्षिण चीन के गुआंगडोंग प्रांत स्थित रूयुआन काउंटी हाई स्कूल ने फरमान जारी किया है कि पूरे 6 महीने के सेमेस्टर के दौरान छात्र सिर्फ एक बार ही क्लास के दौरान टॉयलेट जा सकते हैं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल के इस नियम के सार्वजनिक होते ही चीन के सोशल मीडिया पर गुस्सा फूट पड़ा है। मामला इतना बढ़ गया कि स्थानीय शिक्षा विभाग को जांच बिठाानी पड़ी।
दूसरी बार गए तो पेरेंट्स तलब, तीसरी बार पर एक्शन
इस तुगलकी फरमान का खुलासा तब हुआ जब स्कूल के ही एक टीचर ने स्टाफ मीटिंग में दिखाए गए पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) की तस्वीर इंटरनेट पर लीक कर दी। पीपीटी के इस स्लाइड में क्लासरूम मैनेजमेंट के जो कड़े नियम लिखे थे, वे हैरान करने वाले हैं।
पहली बार (इमरजेंसी): पूरे सेमेस्टर में सिर्फ एक बार टॉयलेट जाने की छूट होगी, वो भी बेहद गंभीर इमरजेंसी हालात में।
दूसरी बार: अगर कोई छात्र दोबारा टॉयलेट जाता है, तो उसके माता-पिता को तुरंत स्कूल बुलाया जाएगा और बच्चे के “आचरण और अनुशासन” पर बातचीत होगी।
तीसरी बार: छात्र के खिलाफ सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हद तो तब हो गई जब स्कूल प्रशासन ने इस नियम का बोझ शिक्षकों की रीढ़ पर डाल दिया। स्लाइड पर साफ लिखा था, “शिक्षकों का मूल्यांकन इस बात से होगा कि उनकी क्लास के छात्र कितना अनुशासन मानते हैं। इन नियमों का पालन कराने के आधार पर ही टीचरों का प्रमोशन, सालाना इंक्रीमेंट और अवॉर्ड तय होंगे।”
यह स्कूल है या कोई जेल?
जैसे ही यह स्लाइड वायरल हुई, चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों का गुस्सा उबल पड़ा।
एक यूजर ने लिखा, “यह स्कूल है या जेल? कैदियों को भी इससे ज्यादा आजादी मिलती है। बुनियादी शारीरिक जरूरत को कोई अनुशासन का मुद्दा कैसे बना सकता है?”
दूसरे यूजर ने मांग की, “प्रशासन को तुरंत इस अमानवीय नियम को रद्द करना चाहिए और स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
वहीं, एक और छात्र ने अपना पुराना दर्द बयां करते हुए लिखा कि उनके स्कूल में क्लास के दौरान टॉयलेट जाने के लिए क्लास टीचर के दस्तखत वाला पास लेना पड़ता था।
पहले बताया अफवाह, अब शिक्षा विभाग करेगा जांच
मामले की तूल पकड़ते ही जब स्थानीय मीडिया ने स्कूल प्रशासन से जवाब मांगा, तो पहले तो एक स्टाफ मेंबर ने इसे “महज एक गलतफहमी” बताया। दबाव बढ़ा तो स्कूल अपनी बात से पलट गया और इसे “विरोधी तत्वों की फैलाई अफवाह” करार दे दिया।
हालांकि, स्थानीय शिक्षा ब्यूरो ने साफ किया है कि उन्हें अभिभावकों और आम जनता से ढेरों शिकायतें मिली हैं। शिक्षा विभाग ने इस तुगलकी फरमान की सच्चाई जांचने के लिए स्कूल के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू कर दी है।
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