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NSE IPO क्या सचमुच सस्ता है? BSE के मुकाबले कैसी है स्थिति; क्या दांव लगाना रहेगा फायदेमंद

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Source :- LIVE HINDUSTAN

NSE IPO: एनएसई का आईपीओ कल 16 सितंबर को एंकर निवेशकों के लिए खुल जाएगा। वहीं, 17 सितंबर से आईपीओ पर रिटेल निवेशक भी दांव लगा पाएंगे। कंपनी ने आईपीओ के लिए 1700 रुपये से 1785 रुपये प्रति शेयर प्राइस बैंड तय किया है। जोकि अनिस्टेड मार्केट की तुलना में 10 प्रतिशत कम है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सचमुच एनएसई का आईपीओ सस्ते कीमत पर आ रहा है?

साइज में हुई कटौती

एनएसई के आईपीओ का साइज पहले 30,000 करोड़ रुपये होने वाला था। लेकिन अब इसे घटाकर 22560 करोड़ रुपये कर दिया गया है। शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति और निवेशकों के बीच आईपीओ को आकर्षक बनाए रखने के लिए एनएसई के मैनेजमेंट ने यह फैसला किया है।

क्या बीएसई के मुकाबले सस्ता है आईपीओ?

वित्त वर्ष 2026 एनएसई का प्राइस-टू-अर्निंग का मल्टीपल 43 है। वहीं, बीएसई का 56 है। इस हिसाब से 23 प्रतिशत सस्ता नजर आ रहा है। लेकिन चालू वित्त वर्ष के पहले क्वार्टर में तस्वीर पूरी बदल जाती है। एनएसई का प्रॉफिट सालाना आधार पर जून में 11 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं, बीएसई का 65 प्रतिशत बढ़ा है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार यह ट्रेंड पूरे सालभर देखने को मिल सकता है।

हालांकि, कैश और डेरिवेटव ट्रेडिंग वैल्यूम्स में अब भी एनएसई लीडर बना हुआ है। चिंता की एक बात यह है कि बीएसई के पास जहां वित्तीय स्थिति और बेहतर करने के कई विकल्प हैं तो वहीं एनएसई की अपनी सीमा है। उदाहरण के तौर पर ऑप्शन ट्रांजैक्शन को अगर देखें। बीएसई यहां 3250 करोड़ रुपये चार्ज कर रहा है। जबकि एनएसई 3550 करोड़ रुपये ले रहा है। ऐसे में बीएसई के पास रेवन्यू बढ़ाने का विकल्प है। वहीं, फ्यूचर्स वैल्यूम में गिरावट होने पर एनएसई की कमाई पर असर पड़ेगा।

एनएसई मौजूदा समय में इंडेक्स फ्यूचर्स और स्टॉक फ्यूचर्स ट्रांजैक्शन पर 183 करोड़ रुपये चार्ज कर रहा है। लेकिन बीएसई ने अब भी इसे फ्री रखा है। अगर बीएसई की तरफ से शुल्क वसूला गया तो उससे उसकी कमाई बढ़ेगी। बता दें, बीएसई के पास कैश मार्केट में भी हिस्सेदारी बढ़ाने का विकल्प है।

NSE कैसे बदल सकता है खेल?

एनएसई को अपनी कमाई का जरिया बढ़ाना होगा। इसके लिए इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट फिर से ग्रोथ हासिल करना होगा। पहली तिमाही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कुल रेवन्यू में 11 प्रतिशत योगदान डाटा सर्विसेज का है। जोकि दुनिया के अन्य एक्सचेंज की तुलना में अधिक चार्ज होने के बाद है।

क्या एनएसई के आईपीओ पर दांव लगाना चाहिए?

यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फार सेल पर आधारित है। ऐसे में निवेशक इसमें हिस्सा लेने से पहले यह सोच लें कि आगे की ग्रोथ पूरी तरह से भविष्य में होने वाली कमाई पर निर्भर करेगा। अगर कमाई बढ़ती है तो स्टॉक अच्छा प्रदर्शन करेगा।

(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सूझ-बूझ के साथ फैसला करें। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी हैं। लाइव हिन्दुस्तान इस आधार पर शेयरों को खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN