Source :- LIVE HINDUSTAN
बांग्लादेश में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला है। यहां देश को आजादी दिलाने वाले शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीरें हटाई जा रही हैं। इनकी जगह लगाई गई हैं जिन्ना की तस्वीरें…
बांग्लादेश में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला है। यहां देश को आजादी दिलाने वाले शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीरें हटाई जा रही हैं। और जानते हैं, इनकी जगह किसकी फोटो लगाई जा रही है? इसकी जगह लगाई जा रही है, पाकिस्तान के संस्थापक कहे जाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें। ऐसा ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन के म्यूजियम में भी हुआ है। इस कदम का विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी धमकी दी जा रही है। बता दें कि यह छात्र यूनियन, इस्लामी चित्र शिबिर के समर्थन से चलाई जा रही है, जो बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा है।
बांग्लादेशी अखबारों, प्रथोम आलो और बीडीन्यूज24.कॉम ने इस बारे में खबरें प्रकाशित की हैं। ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन में रेनोवेशन का काम चल रहा था। इसे रविवार को खोला गया था। गौरतलब है कि बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपति, शेख मुजीबुर रहमान, अक्सर उन लोगों का निशाना रहे हैं जो शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के विरोधी हैं। जुलाई 2024 के विद्रोह के दौरान हसीना के हटने के बाद, बांग्लादेश भर में मुजीबुर रहमान की कई प्रतिमाओं को तोड़ दिया गया या नष्ट कर दिया गया। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति के कार्यालय से मुजीबुर रहमान का चित्र भी हटा दिया था। साथ ही देश की करेंसी से उनकी तस्वीर हटाने संबंधी कदम भी उठाए थे।
शेख मुजीब की कौन सी फोटो हटाई
रेनोवेशन के बाद खोले गए छात्र यूनियन के म्यूजियम में अब शेख मुजीब के सोलो प्रोर्टेट्स नजर नहीं आ रहे हैं। यह तस्वीरें, बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में उनकी भूमिका को दर्शाती थीं। प्रथोम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन तस्वीरों को हटाया गया है, उनमें 1952 के भाषा आंदोलन, 1954 के यूनाइटेड फ्रंट चुनाव, 1966 के छह बिंदु आंदोलन, 1968 के अगरतला साजिश मामले, 1969 के जनआंदोलन, 1970 के आम चुनाव और शेख मुजीब का ऐतिहासिक 7 मार्च, 1971 के भाषण की तस्वीरें थीं। इसमें उन्होंने बांग्लादेश की वास्तविक आजाजी का ऐलान किया था। अब मुजीब से जुड़ी केवल तस्वीरें उनकी दो बेटों की 1974 में हुई शादी की फोटो और उनके चित्र वाले फ्रेम किए हुए समाचार पत्र के कटिंग तक ही सीमित हैं।
जिन्ना की तीन तस्वीरें
इन तस्वीरों को हटाने के बाद पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की कम से कम तीन तस्वीरें लगाई गईं। यह तस्वीरें हैं, जिन्ना द्वारा 21 मार्च 1948 को पाकिस्तान की एकमात्र राज्य भाषा उर्दू घोषित करते हुए भाषण देने की। 1940 के ऑल इंडिया मुस्लिम लीग सम्मेलन में लाहौर की और 1970 के चुनाव पर ‘डॉन’ अखबार की रिपोर्ट में छपी तस्वीर। छात्र यूनियन की अधिकारी फातिमा तसनीम जुमा ने प्रथोम आलो को बताया कि पांच अगस्त 2024 के बाद, ‘फासीवाद के प्रतीक’ माने गए लोगों की तस्वीरें हटा दी गईं। जुमा ने कहा कि जिन्ना की तस्वीरें ऐतिहासिक घटनाओं को दर्ज करने के लिए रखी गई हैं, ना कि उन्हें महिमामंडित करने के लिए। वहीं, बीडीन्यूज24.कॉम को यूनियन के एक कर्मचारी ने बताया कि शेख मुजीब की कई तस्वीरें 2025 के छात्रसंघ चुनाव से पहले भी मौजूद थीं। लेकिन यूनाइटेड स्टूडेंट्स अलायंस और इस्लामी छात्र शिबिर के अधिकार में यूनियन के आने के बाद इन्हें हटा दिया गया।
छात्रों में गुस्सा
हालांकि शेख मुजीब की तस्वीरों को हटाकर जिन्ना की तस्वीरें लगाने का विरोध भी हो रहा है। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों को यह कदम पसंद नहीं आया। प्रथोम आलो के मुताबिक अबू तैय्यब हबीदार नाम का एक छात्र सोमवार दोपहर म्यूजियम में गया और उसने, जिन्ना के तीनों पोर्ट्रेट फाड़ दिए। पत्रकारों से बातचीत में, तय्यब ने कहा कि जिन्ना, ने बंगाली भाषा का विरोध किया। उन्होंने 1948 में ढाका विश्वविद्यालय के कर्जन हॉल में छात्रों की गिरफ्तारी का आदेश दिया। उनके लिए छात्र संघ में कोई जगह नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या जिन्ना की महिमा मंडन करना छात्र संघन चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा है। साथ ही बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिबिर पर विवादास्पद हस्तियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
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