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₹59 करोड़ लगाए थे, अब सिर्फ 20% हिस्सेदारी से ₹295 करोड़ तक! NSE IPO की दिलचस्प कहानी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO 17 सितंबर 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। इस IPO ने न केवल आम निवेशकों बल्कि NSE के पुराने शेयरधारकों के शानदार रिटर्न की वजह से भी बाजार का ध्यान खींचा है। मॉरीशस स्थित सोच ग्लोबल स्ट्रेटजिक होल्डिंग्स (Soach Global Strategic Holdings) इस IPO के जरिए अपनी NSE हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच रही है। करीब एक दशक पहले किए गए निवेश की तुलना करें तो फंड को इस आंशिक बिक्री से लगभग 25 गुना तक का रिटर्न मिलने की स्थिति बन रही है। NSE IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय किया गया है।

फंड ने कुल लगाए थे ₹59.25 करोड़

सोच ग्लोबल (Soach Global) ने जनवरी 2016 में IFCI (Industrial Finance Corporation of India) से NSE के 1.5 लाख शेयर खरीदे थे। उस समय प्रति शेयर कीमत ₹3,950 थी और इस डील में फंड ने कुल ₹59.25 करोड़ लगाए थे। इसके बाद अलग-अलग कॉरपोरेट एक्शन के कारण बिना अतिरिक्त निवेश के फंड की हिस्सेदारी बढ़कर 82.50 लाख शेयर हो गई। इन बदलावों को समायोजित करने के बाद सोच ग्लोबल (Soach Global) की औसत खरीद लागत करीब ₹71.8 प्रति शेयर बैठती है। मौजूदा IPO प्राइस बैंड के मुकाबले यह लागत काफी कम है।

अब सोच ग्लोबल (Soach Global) NSE IPO के OFS (Offer for Sale) के जरिए 16.5 लाख शेयर बेच रही है। यह उसकी कुल 82.5 लाख शेयरों की हिस्सेदारी का करीब 20% हिस्सा है। ₹1,700 से ₹1,785 के प्राइस बैंड पर इन शेयरों की बिक्री से लगभग ₹280 करोड़ से ₹295 करोड़ मिलने का अनुमान है, यानी फंड ने मूल रूप से ₹59.25 करोड़ का निवेश किया था और केवल अपनी 20% मौजूदा हिस्सेदारी बेचकर ही वह रकम कई गुना मूल्य की बिक्री में बदल रही है। हालांकि, इसे सीधे 25 गुना कैश रिटर्न समझना सही नहीं होगा, क्योंकि बाकी हिस्सेदारी अभी भी फंड के पास रहेगी।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि सोच ग्लोबल (Soach Global) अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने के बजाय 66 लाख शेयर अपने पास रखेगी। IPO प्राइस बैंड के आधार पर इस बची हुई हिस्सेदारी का मूल्य लगभग ₹1,120 करोड़ से ₹1,180 करोड़ के बीच बैठता है, यानी फंड की रणनीति केवल मुनाफा निकालना नहीं, बल्कि NSE में लंबे समय तक बने रहने की भी है। फंड के फाउंडर और डायरेक्टर अनुभव दयाल (Anubhav Dayal) के मुताबिक, आंशिक हिस्सेदारी बेचने का एक उद्देश्य रिटेल निवेशकों को NSE में हिस्सेदार बनने का अवसर देना भी है।

NSE की वैल्यू में लंबे समय में हुई बढ़ोतरी को समझने के लिए यह निवेश एक उदाहरण है। दयाल (Dayal) ने NSE की तुलना परिवार में लंबे समय तक रखे जाने वाले सोने से की है और कहा कि एक्सचेंज भारत के कैपिटल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक, NSE के पास इक्विटी के अलावा कमोडिटी, बिजली से जुड़े फ्यूचर्स, बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स और दूसरे ट्रेडेबल प्रोडक्ट्स के जरिए भविष्य में कारोबार बढ़ाने की गुंजाइश है। हालांकि, किसी भी निवेश की तरह NSE में भी वैल्यूएशन, रेगुलेटरी बदलाव और बाजार की गतिविधि से जुड़े जोखिम मौजूद हैं।

NSE का मौजूदा IPO पूरी तरह OFS है, यानी IPO से मिलने वाला पैसा सीधे NSE के कारोबार में नहीं जाएगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। IPO में शेयरों का प्राइस बैंड ₹1,700-₹1,785 है और यह इश्यू 21 सितंबर को बंद होगा। NSE ने IPO से पहले एंकर निवेशकों से ₹6,746 करोड़ जुटाए हैं। ऐसे में सोच ग्लोबल (Soach Global) का निवेश सफर यह दिखाता है कि शुरुआती दौर में किसी मजबूत कारोबार में लंबे समय तक निवेश रहने से किस तरह बड़ी वैल्यू बन सकती है, लेकिन नए निवेशकों के लिए IPO की मौजूदा कीमत, कंपनी का वैल्यूएशन और भविष्य की कमाई को अलग से समझना जरूरी है।

नोट:- सोच ग्लोबल (Soach Global) के लिए 25 गुना रिटर्न मुख्यतः उसके समायोजित ₹71.8 प्रति शेयर अधिग्रहण मूल्य और मौजूदा NSE IPO प्राइस बैंड की तुलना पर आधारित है। यह किसी नए IPO निवेशक के संभावित रिटर्न का अनुमान नहीं है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN