Home National news hindi छह महीने के बच्चे पर पिटबुल का हमला, ख़तरनाक नस्लों पर...

छह महीने के बच्चे पर पिटबुल का हमला, ख़तरनाक नस्लों पर क्या हैं भारत के नियम?

3
0

Source :- BBC INDIA

पिटबुल नस्ल की शुरुआत 1800 के दशक में इंग्लैंड में हुई थी.

इमेज स्रोत, Renee DeKona/MediaNews Group/Boston Herald via Getty Images

जानवरों में आमतौर पर कुत्ते को इंसान का सबसे अच्छा दोस्त कहा जाता है. लेकिन सभी कुत्ते दोस्त हों, ये ज़रूरी नहीं है. दुनिया में कुछ नस्ल के कुत्ते बेहद ख़तरनाक माने जाते हैं.

भारत में भी हाल के वर्षों में पालतू कुत्तों के हमलों के कई मामले सामने आए हैं. इन हमलों में लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. कुछ मामलों में मौत भी हो गई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के इंटीग्रेटेड डिसीज़ सर्विलांस प्रोग्राम के आंकड़ों के मुताबिक़, साल 2024 में भारत में 37 लाख से ज़्यादा डॉग बाइट या कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए.

साल 2025 के पहले महीने में ही 4,29,664 मामले सामने आए. यहां ध्यान रखना होगा कि ये आंकड़े सिर्फ़ दर्ज मामलों के हैं जबकि माना जाता है कि कई ऐसे हमले रिपोर्ट नहीं होते.

छह महीने के बच्चे पर पिटबुल का हमला

दिल्ली से सटे सोनीपत के सिक्का कॉलोनी में 14 सितंबर, 2026 की शाम छह महीने के एक बच्चे पर पड़ोसी के पालतू पिटबुल ने हमला कर दिया.

बच्चे की बुआ उसे गोद में लेकर गली में घूम रही थीं. तभी कुत्ता बाहर निकला और उन पर झपटा. बच्चे को कई जगह गंभीर चोटें आईं है. फ़िलहाल बच्चा रोहतक के पीजीआईएमएस अस्पताल में भर्ती है.

बच्चे को बचाने की कोशिश में उसकी बुआ भी घायल हुईं. पूरी घटना सीसीटीवी में क़ैद है. इस मामले में परिवार से संपर्क किया गया मगर उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया.

हालांकि यह जानकारी मिली है कि फ़िलहाल परिवार की ओर से कोई पुलिस शिक़ायत दर्ज नहीं करायी गई है.

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोग भारत में ख़तरनाक माने जाने वाले कुत्तों ख़ासकर पिटबुल जैसी नस्लों को लेकर नियम, मालिक की ज़िम्मेदारी और सार्वजनिक सुरक्षा का सवाल उठा रहे हैं.

पहले भी कई मामले हुए

साल 2024 में भारत में 37 लाख से ज़्यादा डॉग बाइट या कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए.

इमेज स्रोत, Peerapon Boonyakiat/SOPA Images/LightRocket via Getty Images

इससे पहले भी पिटबुल के कई हमले सामने आए हैं.

अगस्त 2026 में पंजाब के पटियाला के घुम्मन नगर में एक जोड़े पर पिटबुल ने हमला किया. उस वक़्त अंकित सभरवाल और उनकी पत्नी शेफाली किराए के लिए एक मकान देखने गए थे.

गेट खुलते ही कुत्ता बाहर आया और उन पर झपटा. दोनों गंभीर रूप से घायल हुए. इस घटना के बाद पुलिस ने मालिक के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया.

अगस्त 2025 में चेन्नई में 55 साल के करुणाकरण की मौत पड़ोसी के पिटबुल के हमले से हो गई थी. घर लौटते समय उन्हें कुत्ते ने काट लिया. मालिक भी घायल हुईं. पुलिस ने लापरवाही के आरोप में केस दर्ज किया.

साल 2022 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिटबुल का एक हमला काफ़ी सुर्खियों में रहा था, जब उसने अपनी 82 साल की बूढ़ी मालकिन पर ही हमला कर दिया. महिला को कुत्ते ने इस कदर ज़ख़्मी कर दिया कि उनकी मौत हो गई.

पिटबुल कहां का है

पिटबुल

इमेज स्रोत, Roy Rochlin/Getty Images for Westminster Kennel Club

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के साल 2022 में एक वीडियो के मुताबिक़, पिटबुल नस्ल की शुरुआत 1800 के दशक में इंग्लैंड में हुई. उस समय इन्हें मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

इन कुत्तों का बाड़े में बांधे गए सांड या भालू के साथ मुक़ाबला कराया जाता था.

सन 1835 में इस खेल को प्रतिबंधित कर दिया गया. इसके बाद इन कुत्तों में आपस में लड़ाई का खेल शुरू हो गया जो अधिकांश देशों में बैन है, मगर फिर भी इससे जुड़े अवैध मामले सामने आते रहते हैं.

1960 के दशक में अमेरिका में ड्रग तस्करों ने पिटबुल रखना शुरू किया.

इनमें मजबूत जबड़े, ज़्यादा दर्द सहन करने की क्षमता, शिकार करने की आदत और दृढ़ता होती हैं. ये मध्यम आकार के मज़बूत मांसपेशियों वाले और शक्तिशाली कुत्ते होते हैं.

कई मालिक इन्हें वफ़ादार और परिवार के अनुकूल बताते हैं. लेकिन सही प्रशिक्षण, सामाजिक आदतों और नियंत्रण के बिना ये ख़तरनाक साबित हो सकते हैं.

पिटबुल के हमले से बचना मुश्किल क्यों माना जाता है?

पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने पिटबुल टेरियर समेत करीब 23-24 नस्लों (मिश्रित और क्रॉस ब्रीड सहित) को

इमेज स्रोत, MICHAL CIZEK/AFP via Getty Images

पिटबुल नस्ल के कुत्तों को आमतौर पर आक्रामक क्यों माना जाता है?

इसके जवाब में पेटा इंडिया के प्रवक्ता सचिन एस बंगेरा ने बीबीसी न्यूज हिंदी को बताया, “पिटबुल नस्ल के कुत्तों को ऐतिहासिक रूप से ख़ास तौर पर ताक़तवर और लड़ाई के लिए तैयार किया गया था. इन्हें बैलों को काबू करने और बाद में अन्य कुत्तों से लड़ने के लिए सिलेक्टिव ब्रीडिंग के ज़रिए विकसित किया गया. इस वजह से इन कुत्तों में असाधारण शारीरिक ताक़त, मज़बूत पकड़ और शिकार पर हमला करने के बाद उसे नहीं छोड़ने जैसी आदतें देखी जाती हैं.”

हालांकि वह यह भी कहते हैं कि किसी भी कुत्ते का व्यवहार केवल उसकी नस्ल पर निर्भर नहीं करता. उसके स्वभाव पर सामाजिक आदतें, प्रशिक्षण, देखभाल और परिवेश का भी बड़ा असर पड़ता है.

वहीं, स्वतंत्र रूप से काम कर रहीं एनिमल एक्टिविस्ट सराहना कहती हैं कि पिटबुल जैसी नस्ल के कुत्तों को ज़्यादातर लोग सोशल स्टेट्स के लिए पालते हैं, इन्हें जन्म से ही आक्रामक व्यवहार की ट्रेनिंग दी जाती है, इन्हें इनकी मांओं के पास नहीं रखा जाता, जिससे भी इनके व्यवहार पर असर पड़ता है.

साथ ही वह कहती हैं कि जब ज़्यादा उम्र के ये कुत्ते कमज़ोर हो जाते हैं तो उन्हें उनके मालिक छोड़ देते हैं, लेकिन इन नस्ल के कुत्तों को सेल्टर में अन्य कुत्तों के साथ रखने में भी समस्या आती है.

पिटबुल की पकड़ इतनी मजबूत कैसे होती है?

इस पर पेटा के बंगेरा ने कहा कि पिटबुल जैसे कुत्ते बेहद शक्तिशाली और मज़हूत मांसपेशियों वाले होते हैं. उनका चौड़ा सीना, मजबूत जबड़ा और बड़े जॉल्स उन्हें शिकार को मज़बूती से पकड़ने में सक्षम बनाते हैं.

एक बार हमला शुरू हो जाए तो कुत्ते को शिकार से अलग करना बहुत मुश्किल होता है.

इसलिए जब कोई गंभीर हमला होता है, तो उससे होने वाली चोटें बेहद गंभीर या कई बार जानलेवा भी हो सकती हैं, ख़ासकर अगर शिकार कोई छोटा बच्चा हो.

भारत में पिटबुल पर नियम क्या हैं?

इंडियन पिटबुल

इमेज स्रोत, Nasir Kachroo/NurPhoto via Getty Images

मार्च 2024 में केंद्र के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा.

इसमें पिटबुल टेरियर समेत क़रीब 23-24 नस्लों (मिश्रित और क्रॉस ब्रीड सहित) को “ख़तरनाक” बताया गया.

इनके आयात, प्रजनन और बिक्री पर रोक लगाने की सलाह दी गई. पहले से पाले जा रहे कुत्तों की नसबंदी कराने की भी सिफ़ारिश की गई.

सूची में पिटबुल टेरियर, अमेरिकन स्टैफ़र्डशायर टेरियर, रॉटवाइलर, अमेरिकन बुलडॉग, डोगो अर्जेंटीनो, फ़िला ब्राजीलरो, केन कॉर्सो, मास्टिफ़, वुल्फ़ डॉग, कांगाल और कोकेशियन शेफ़र्ड जैसी नस्लें शामिल हैं.

यह केंद्रीय निर्देश पूरी तरह कानूनी बैन नहीं था. दिल्ली हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट समेत कुछ अदालतों ने इसमें हस्तक्षेप किया.

मई 2024 में केंद्र ने नोटिस जारी कर कहा कि आगे के आदेश तक इसे लागू न किया जाए.

यानी पिटबुल को पालने पर देशभर में कोई सख्त कानूनी बैन नहीं है. लेकिन प्रजनन, बिक्री और पालन के नियम राज्य और स्थानीय निकायों पर निर्भर करते हैं.

कुछ जगहों पर स्थानीय प्रशासन ने कदम उठाए हैं.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ और गाजियाबाद में इन नस्लों के लाइसेंस न देने और नसबंदी के निर्देश दिए गए.

गोवा ने 2025 में कानून पास किया, जिसमें सरकार किसी भी नस्ल को “ख़तरनाक जानवर” घोषित कर सकती है.

एक बार घोषित होने पर उस नस्ल को पालना, प्रजनन कराना और राज्य में लाना प्रतिबंधित हो जाता है.

पहले से पाले गए कुत्तों की नसबंदी करानी जरूरी है, वरना 15 दिन से 3 महीने की जेल और 50 हज़ार तक जुर्माना हो सकता है.

पेटा के प्रवक्ता बताते हैं कि कानपुर नगर निगम ने पिटबुल और रॉटवाइलर रखने पर रोक लगाई.

चंडीगढ़ में छह खतरनाक नस्लों पर बैन की प्रक्रिया चल रही है.

पीड़ित के क़ानूनी विकल्प और मालिक की ज़िम्मेदारी

पिटबुल

इमेज स्रोत, JOSH EDELSON/AFP via Getty Images

अगर पिटबुल किसी पर हमला करता है तो पीड़ित पुलिस में शिक़ायत कर सकता है. चिकित्सा खर्च समेत नुक़सान का मुआवज़ा सिविल केस के जरिए मांगा जा सकता है.

बंगेरा के मुताबिक़, गंभीर चोट या लापरवाही के मामले में भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक प्रावधान भी लागू हो सकते हैं. अगर मालिक को जोख़िम का पता था फिर भी नियंत्रण नहीं किया तो ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है.

मालिकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

इस पर पेटा ने जानकारी दी कि पिटबुल-टाइप कुत्ते की नसबंदी, टीकाकरण और जहां जरूरी हो रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए. सुरक्षित जगह पर रखना, परिवार का हिस्सा समझना और सार्वजनिक जगह पर मजबूत हार्नेस व पट्टा लगाना जरूरी है.

कुत्ते को कभी जंजीर से न बांधें, हमला करने के लिए न उकसाएं और लड़ाई या गार्डिंग के लिए इस्तेमाल न करें.

ब्रीडर अक्सर बिना चेतावनी के पिटबुल बेचते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

SOURCE : BBC NEWS