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रोजगार से लेकर जरूरी चीजों के दाम तक, सुबह की 4 अच्छी खबरें

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण लागत बढ़ने के बावजूद देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां त्योहारी सीजन में अपने उत्पादों की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से बच सकती हैं। कंपनियों का फिलहाल जोर कीमत बढ़ाने के बजाय बिक्री की मात्रा बढ़ाने और उपभोक्ता मांग को बनाए रखने पर है।

उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, कंपनियां जून तिमाही में ही लागत बढ़ने के असर को कम करने के लिए चुनिंदा उत्पादों की कीमतों में करीब 2 से 5 फीसदी तक बढ़ोतरी कर चुकी हैं। ऐसे में दिवाली तक फिर बड़ी कीमत बढ़ोतरी की संभावना कम है।

एफएमसीजी कंपनियों की लागत पर चीनी, खाद्य तेल, कॉफी, कोको और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल आधारित उत्पादों की बढ़ती कीमतों का असर पड़ा है। हालांकि कंपनियां लागत घटाने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और उत्पादों के पोर्टफोलियो में बदलाव के जरिये बढ़ी लागत का एक हिस्सा खुद वहन कर रही हैं। इससे मुनाफे पर दबाव बना हुआ है लेकिन कंपनियां फिलहाल कीमत बढ़ाने के बजाय बिक्री की मात्रा में वृद्धि पर ध्यान दे रही हैं।

ढाई लाख रोजगार के अवसर बनेंगे

देश के छोटे शहर अब बड़े प्रतिभा केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं और पिछले दो वर्षों में ज्यादातर नियोक्ताओं ने दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से नियुक्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है। कार्यबल प्रबंधन और मानव संसाधन समाधान प्रदाता जीनियस एचआरटेक लिमिटेड की रिपोर्ट के अनुसार भारत में भर्ती का परिदृश्य अब पारंपरिक महानगरों से आगे बढ़ रहा है।

सर्वेक्षण में शामिल 69 प्रतिशत संगठनों ने बताया कि उन्होंने पिछले दो वर्षों के दौरान दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से अपनी नियुक्तियों में 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की है।

2.5 लाख मौसमी और ‘गिग’ नौकरियां पैदा होने की संभावना: भारत में जुलाई से दिसंबर 2026 के दौरान दो से 2.5 लाख मौसमी और ‘गिग’ नौकरियां पैदा होने की संभावना है और त्योहारों के दौरान नियुक्तियों में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। वैश्विक प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल टैलेंट समाधान प्रदाता एनएलबी सर्विसेज की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है।

ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले अस्थायी कर्मियों को ‘गिग’ कहा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में त्योहारी सत्र शुरू होने के साथ ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, आतिथ्य, यात्रा और उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कारोबार साल के सबसे व्यस्त मांग वाले दौर के लिए तैयारी कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारों के दौरान भर्ती का दायरा भौगोलिक रूप से भी बढ़ रहा है। कुल त्योहारी भर्ती मांग में से करीब 45 प्रतिशत हिस्सेदारी दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से रहने की उम्मीद है, जबकि इन बाजारों में भर्ती 25-30 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। ई-कॉमर्स के नेटवर्क विस्तार से जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में रोजगार की मांग बढ़ रही है।

आयकर नोटिस में डिजिटल हस्ताक्षर जरूरी नहीं

इसी के साथ आयकर विभाग से मिलने वाली कुछ सूचनाओं और नोटिस की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आयकर नियमों में संशोधन करते हुए कुछ मामलों में डिजिटल हस्ताक्षर की अनिवार्यता हटा दी है। अब ऐसी सूचनाएं निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजी जा सकेंगी। यह बदलाव आयकर नियम-2026 के नियम 176 में किया गया है। पहले कुछ सूचनाओं के लिए डिजिटल हस्ताक्षर का प्रावधान था।

इनकम टैक्स प्रोफेशनल के लिए गुड न्यूज

नए आयकर कानून के तहत इनकम टैक्स प्रोफेशनल और टैक्स का मूल्यांकन करने वालों के लिए पंजीकरण की समयसीमा बढ़ा दी गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अब पंजीकरण के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय दिया है।

पहले इसकी अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 थी। समयसीमा बढ़ाने के साथ सीबीडीटी ने पंजीकरण के लिए आवेदन पत्र और प्रक्रिया में भी बदलाव किए हैं। समयसीमा बढ़ाने से उन कर मूल्यांकनकर्ताओं और आयकर पेशेवरों को राहत मिलेगी, जिन्होंने नए कानून के तहत अब तब पंजीकरण नहीं किया है। मूल्यांकनकर्ता वह पेशेवर होता है, जो किसी संपत्ति या परिसंपत्ति का मूल्य तय करता है।

नया फॉर्म जारी : मूल्यांककर्ता को पंजीकरण के लिए संशोधित फॉर्म 169 भरना होगा। इसमें संपत्तियों की 11 श्रेणियां रखी गई हैं। इनमें अचल संपत्ति, कृषि भूमि, शेयर एवं प्रतिभूतियां, आभूषण, कलाकृतियां समेत अन्य संपत्तियां शामिल हैं। किसी व्यक्ति को जिस श्रेणी की संपत्ति का मूल्यांकन करना है, उसके लिए निर्धारित योग्यता और अनुभव की शर्त पूरी करनी होगी। इसी तरह आयकर पेशेवरों को भी पंजीकरण के लिए नया फॉर्म 171 भरना होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN