Source :- LIVE HINDUSTAN
ईरान के राष्ट्रपति ने UNGA में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सीधा जवाब दिया। ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान को आतंकवादी देश बताया और सख्त चेतावनी दी थी। पेजेशकियन ने कहा कि यह आरोप गलत है। उन्होंने कहा कि ईरान खुद आतंकवाद का शिकार रहा है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में तीखा भाषण दिया। यह भाषण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के ठीक एक दिन बाद हुआ। ट्रंप ने मंगलवार को ईरान को सख्त चेतावनी दी थी। पेजेशकियन ने उसी चेतावनी का सीधा जवाब दिया और कहा कि ईरान आतंकवादी देश नहीं है, बल्कि खुद आतंकवाद का शिकार रहा है। पेजेशकियन ने कहा कि कल अमेरिका के राष्ट्रपति ने हमें आतंकवादी बताया। हम आतंकवाद के शिकार रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने सिर्फ अपना बचाव किया है, आक्रमण नहीं किया। उनके अनुसार ईरान के आम नागरिक कायरतापूर्ण हमलों के निशाने बने, फिर भी देश झुका नहीं।
तस्वीरें दिखाकर भाषण की शुरुआत
ईरानी राष्ट्रपति भाषण की शुरुआत में तस्वीरें उठाकर दिखाईं। इनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की तस्वीर और मिनाब स्कूल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें शामिल थीं। उन्होंने कब्रों और पीड़ित बच्चों की तस्वीरों वाले पेज भी दिखाए। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ये तस्वीरें उन निर्दोष नागरिकों की हैं, जो लड़ाई में मारे गए। उन्होंने कहा कि मैं ऐसे ईरान से आता हूं जहां हमारे सम्मानित सर्वोच्च नेता की बिना किसी कानूनी ढांचे या वजह के हत्या कर दी गई। मैं ऐसे ईरान से आता हूं जहां सच में एक स्कूल पर बमबारी की गई। आप इन बच्चों को देख रहे हैं? ये बच्चे अमेरिका और इजरायल के बमों और हथियारों से मारे गए। वे बेगुनाह थे। उन्होंने कोई जुर्म नहीं किया था।
बता दें कि मिनाब स्कूल पर हमला युद्ध के शुरुआती दिनों में हुआ। तेहरान के अनुसार, इस हमले में सौ से ज्यादा बच्चे और शिक्षक मारे गए। पेजेशकियन ने महासभा में इन्हीं पीड़ितों को दुनिया के सामने रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने आधुनिक तकनीक से हमला किया, स्कूल, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और विश्वविद्यालयों जैसे नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। गौरतलब है कि जब पेजेशकियन बोल रहे थे, तब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल महासभा हॉल से बाहर चला गया। यह दृश्य इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि एक दिन पहले ट्रंप के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी हॉल छोड़कर बाहर गया था।
ट्रंप को करारा जवाब
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा था कि अगर बातचीत से मामला नहीं सुलझा, तो उनके पास दो रास्ते हैं। एक रास्ता तेहरान से समझौता करना है, दूसरा इस्लामी गणराज्य को खत्म करना है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि वे ईरान को बिना बचने के मौके के नरक में धकेल सकते हैं। पेजेशकियन ने इन धमकियों का जवाब देते हुए कहा कि ईरान ने अपना बचाव पूरी ताकत से किया, लेकिन जानबूझकर आम लोगों को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि हमारे देश पर किए गए कायरतापूर्ण हमलों में हमारे बेगुनाह लोग मारे गए। हमने पूरी ताकत से अपना बचाव किया। अमेरिका और इजरायल ने हमें नवीनतम तकनीक से मारा, लेकिन हमने घुटने नहीं टेके।
इस दौरान उन्होंने इजरायल पर आतंकवाद का आरोप लगाया। पेजेशकियन ने कहा कि इजरायल ने नागरिक ढांचे पर हमले किए। उन्होंने कहा कि हमने जवाब दिया, लेकिन आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने गाजा का जिक्र किया और कहा कि वहां 80 हजार से ज्यादा निर्दोष नागरिकों की बेरहमी से हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि वे अपनी कथित तकनीक से नरसंहार कर रहे हैं। फिर दूसरों को आतंकवादी कहते हैं। क्या हम अस्थिरता के स्रोत हैं? हम केवल स्वतंत्र रूप से जीना चाहते हैं।
धमकी और दबाव स्वीकार नहीं
ईरानी राष्ट्रपति ने बार-बार यह बात दोहराई कि ईरान दो सौ साल से किसी दूसरे देश या इलाके पर हमला नहीं करता। उनके अनुसार जब खतरा आता है, तब ईरान अपना बचाव करता है। उन्होंने सवाल किया कि फिर ईरान को इस क्षेत्र में अशांति का स्रोत और आतंकवादी देश क्यों कहा जा रहा है। पेजेशकियन ने यह भी कहा कि तेहरान अपनी ताकत का इस्तेमाल किसी पर दबदबा बनाने या दूसरे देशों की कीमत पर अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि ईरान शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा चाहता है, बम नहीं। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी और दबाव की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।
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