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AI ने चुना टारगेट या पुराने डेटा ने कराई तबाही? ईरान के स्कूल पर हमले की चौंकाने वाली रिपोर्ट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका-इजरायल अभियान के पहले दिन ईरान के मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर दो मिसाइलें गिरीं। 123 बच्चे समेत 157 लोग मारे गए। अब जो रिपोर्ट सामने आई है, वह हैरान करने वाली है।

ईरान के मिनाब शहर में एक स्कूल पर अमेरिकी हमले में 123 बच्चों समेत 157 लोग मारे गए थे। फरवरी में हुए हमले को लेकर अब बड़ा खुलासा हुआ है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट से जो खुलासा हुआ है, उससे अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह हमला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( AI) ने टारगेट चुना या पुरानी खुफिया जानकारी और पुरानी सैटेलाइट तस्वीरों ने तबाही मचाई? रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल पहले सैन्य इलाके का हिस्सा था, लेकिन सालों पहले स्कूल बन चुका था। सिस्टम ने इसे अब भी सैन्य ठिकाना समझा और हमला हो गया।

बता दें कि 28 फरवरी को शाजराह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर दो क्रूज मिसाइलें गिरी थीं। यह हमला ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान के पहले दिन हुआ था। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि आम नागरिकों पर हमला युद्ध अपराध हो सकता है। ब्लूमबर्ग ने पेंटागन जांच से जुड़े दो दर्जन से ज्यादा मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों से बात की। कुछ अधिकारियों ने इसे ‘रोकी जा सकने वाली गलतियों का सिलसिला’ बताया है।

स्कूल टारगेट कैसे बना?

गौरतलब है कि यह स्कूल उस जगह पर बना था, जो पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सैन्य इलाके का हिस्सा था। लेकिन सालों पहले यहां बदलाव हो चुका था और यह स्कूल बन चुका था। कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि 2017 तक स्कूल को पास के सैन्य इलाके से अलग करने के लिए दीवारें और अलग गेट बन चुके थे। 2018 की तस्वीरों में रंगीन दीवारें, फुटबॉल मैदान और बच्चों की गतिविधियां साफ दिख रही थीं।

अमेरिकी खुफिया विश्लेषकों ने 2019 की शुरुआत में ही ये बदलाव देख लिए थे। लेकिन यह जानकारी उस मुख्य सैन्य डेटाबेस में नहीं गई, जिसका इस्तेमाल टारगेट चुनने में होता है। इसलिए मुख्य सिस्टम उस जगह को अब भी IRGC की सैन्य सुविधा मानता रहा। टारगेटिंग में इस्तेमाल हुई तस्वीरें भी पुरानी थीं। उनमें स्कूल का नया रूप नहीं दिखा।

एआई की भूमिका क्या थी?

रिपोर्ट में पेंटागन के मावेन स्मार्ट सिस्टम का जिक्र है। यह पैलंटिर टेक्नोलॉजीज का एआई प्लेटफॉर्म है। यह सैकड़ों सोर्सेज से जानकारी जोड़कर संभावित टारगेट बताता है। अधिकारियों के मुताबिक, एआई ने अकेले स्कूल को टारगेट नहीं चुना। समस्या यह थी कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कुछ लोगों ने सिस्टम पर बहुत ज्यादा भरोसा कर लिया। उन्हें उम्मीद थी कि एआई पुरानी या गलत जानकारी अपने आप पकड़ लेगा। ऐसा नहीं हुआ। पैलंटिर ने कहा कि उसका सॉफ्टवेयर हमले का जिम्मेदार नहीं है। कंपनी का कहना है कि वह अंदरूनी डेटा या खुफिया कमियों की जांच के लिए जिम्मेदार नहीं थी।

जल्दबाजी भी वजह बनी

रिपोर्ट के अनुसार, बड़े हवाई हमले की जल्दबाजी में टारगेट चुनने का समय बहुत कम रह गया। युद्ध के पहले 24 घंटों में 1000 से ज्यादा ईरानी ठिकानों पर हमला हुआ। पुरानी जानकारी, नागरिक सुरक्षा स्टाफ में कटौती और ऑटोमेटिक सिस्टम पर ज्यादा निर्भरता ने मिलकर यह हादसा पैदा किया। मिनाब का मामला अब एआई वाले युद्ध के खतरों की बड़ी मिसाल बन गया है।

बता दें कि पेंटागन की पूरी जांच अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। लेकिन रिपोर्ट से साफ है कि जमीन पर स्थिति बदल चुकी थी, जबकि सिस्टम पुरानी जानकारी पर चल रहा था। उसी जानकारी को तेज गति से प्रोसेस करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा रहा था। जिसका परिणाम अब सबके सामने है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN