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होर्मुज में US का खतरनाक प्लान, Xbox कंट्रोलर से ‘लेजर की मार’; जानें कैसे काम करेगा सिस्टम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी सेना होर्मुज में हाई-एनर्जी लेजर हथियार तैनात कर रही है। ये हथियार ड्रोन और आने वाली क्रूज मिसाइलों को पारंपरिक मिसाइलों से काफी सस्ते में मार गिराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। कभी भी फिर से जंग शुरू हो सकती है। इस बीच खबर आई है कि अमेरिकी सेना होर्मुज स्ट्रेट में हाई-एनर्जी लेजर हथियार लगा रही है। ये हथियार ड्रोन और आने वाली क्रूज मिसाइलों को गिराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि ये लेजर पारंपरिक मिसाइलों से काफी सस्ते पड़ते हैं। सैनिक इन्हें बदले हुए Xbox गेम कंट्रोलर से चला रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका पिछले करीब 50 साल से इस तकनीक पर काम कर रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इस समय किसी और देश की सेना के पास इतनी मजबूत लेजर क्षमता नहीं है। अब यही तकनीक मध्य पूर्व के साथ अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर भी टेस्ट की जा रही है।

क्यों सस्ते माने जा रहे हैं ये हथियार?

सामान्य एंटी-ड्रोन या एंटी-मिसाइल सिस्टम में हर हमले के लिए अलग गोला या इंटरसेप्टर चलाना पड़ता है। लेजर में ऐसा नहीं है। एक बार बिजली मिल जाए तो वही सिस्टम बार-बार फायर कर सकता है। इसी वजह से हर हमले की कीमत बहुत कम बताई जा रही है। फिर भी पूरा प्रोजेक्ट सस्ता नहीं है। अमेरिकी सेना इस काम पर करीब 50 करोड़ डॉलर खर्च कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्मी ने युद्ध के लिए तैयार लेजर सिस्टम बनाने का बड़ा ठेका भी दिया है। इसमें AeroVironment के E-HEL यानी एंड्योरिंग हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम का जिक्र है। ये आर्मी का पहला बड़ा प्रोडक्शन कॉन्ट्रैक्ट माना जा रहा है।

लेजर असल में कैसे काम करता है?

ये हथियार जनरेटर या बैटरी से बिजली लेता है। बिजली को प्रकाश कणों यानी फोटॉनों में बदला जाता है। फिर ये कण एक तेज किरण में इकट्ठा हो जाते हैं। किरण टारगेट की सतह पर कुछ सेकंड तक टिकी रहती है। इसी समय को ‘ड्वेल टाइम’ कहा जाता है। गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि ड्रोन का सेंसर खराब हो जाए, हिस्सा जल जाए या पूरा ड्रोन फट जाए।

डायरेक्टेड एनर्जी कंसल्टेंट्स के प्रेसिडेंट मार्क नीस ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि हम ड्रोन को बहुत सटीक तरीके से ट्रैक कर सकते हैं। किरण ठीक उसी जगह लगा सकते हैं जहां चाहें। इससे उसके कैमरे बंद किए जा सकते हैं या ड्रोन को नष्ट किया जा सकता है। लेजर वॉर्स न्यूजलेटर के जेरेड केलर के अनुसार, अब ये हथियार सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रहे। इन्हें असली मैदान में उतारना समझदारी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्मी का आधा अरब डॉलर का ठेका सबसे बड़ा कदम है।

Xbox कंट्रोलर से क्यों चलाए जा रहे हैं?

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि सैनिक इन लेजर हथियारों को रीकॉन्फिगर किए गए Xbox कंट्रोलर से चलाते हैं। सेना का तर्क है कि गेमिंग इंडस्ट्री पहले ही अच्छा कंट्रोलर बना चुकी है। फिर नया और महंगा सिस्टम बनाने की जरूरत क्यों हो? केलर ने कहा कि अगर आपने गेम में लेजर चलाया है, तो असल जिंदगी में भी ये हथियार चला सकते हैं।

होर्मुज से लेकर मेक्सिको सीमा तक?

मध्य पूर्व में ये सिस्टम खासकर अमेरिकी युद्धपोतों पर लगाए गए हैं। इनमें HELIOS यानी हाई-एनर्जी लेजर विद इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैज़लर एंड सर्विलांस शामिल है। ये करीब 60 किलोवाट की लेजर किरण फोकस कर सकता है। किरण दिखती नहीं, लेकिन टारगेट को गर्म करके नष्ट कर सकती है। कुछ मामलों में ये ड्रोन के कैमरे या सेंसर को अंधा भी कर सकती है। इसे ‘डैजलर’ कहा जाता है। दावा है कि ये ग्रुप-3 ड्रोन तक गिरा सकता है। ऐसे ड्रोन का वजन करीब 1300 पाउंड तक हो सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN