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Don’t Be Shy Review: आलिया भट्ट की फिल्म OTT पर हुई रिलीज, दिखाई Gen Z के दुख-सुख की कहानी, पढ़ें रिव्यू

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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Don’t Be Shy Review in Hindi: आलिया भट्ट के प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘डोंट बी शाय’ ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। अगर आपकी उम्र 15 साल से कम है तो मत देखिए यह फिल्म। 

आलिया भट्ट के प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘डोंट बी शाय’ (Don’t Be Shy) अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। स्रीति मुखर्जी ने इस फिल्म को डायरेक्ट करने के साथ इसकी कहानी भी लिखी है। फिल्म में हाईस्कूल, रोमांस, ब्रेकअप और खूब सारा ड्रामा है, बस पढ़ाई का नामोनिशान नहीं है। पूरे सेमेस्टर में पढ़ाई के अलावा लगभग हर चीज होती दिखाई देती है। फिल्म देखते हुए करण जौहर की ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ याद आती है। हालांकि, यहां ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ जैसा ग्लैमर देखने को नहीं मिलता।

फिल्म: डोंट बी शाय

डायरेक्टर: स्रीति मुखर्जी

लीड एक्टर: आरुषि बजाज, पीयूष खाती, बियांका अरोड़ा, अंश दुग्गल, कुणाल रॉय कपूर और अनुराग बसु

ओटीटी: अमेजन प्राइम वीडियो

म्यूजिक: राम संपत

रेटिंग: 2/5

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी श्यामाली ‘शाई’ दास (आरुषि बजाज) के इर्द-गिर्द घूमती है। शाई अपने अमीर और अरबपति बॉयफ्रेंड मयंक झुनझुनवाला (पीयूष खाती) के सहारे जिंदगी में बड़ा मुकाम हासिल करने के सपने देखती है। लेकिन उसकी सारी प्लानिंग तब बिगड़ जाती है, जब मयंक अचानक उससे ब्रेकअप कर लेता है। इसके बाद शाई बदला लेने के लिए मयंक की नई गर्लफ्रेंड तारा (बियांका अरोड़ा) के सामने आ जाती है। इसके बाद कहानी एक टीनेजर लड़की के खुद को समझने और अपनी पहचान बनाने के सफर पर आगे बढ़ती है। शाई इस दौरान कई चीजों से गुजरती है और धीरे-धीरे ज्यादा समझदार होती है। हालांकि, फिल्म का पहला आधा घंटा यह समझने में ही निकल जाता है कि आखिर फिल्म कहना क्या चाहती है।

कहां मात खाती है फिल्म?

फिल्म में जेन-जी कल्चर को ऊपर-ऊपर से दिखाया गया है। यह टीनेजर्स की कहानी कम और बड़ों की नजर से टीनेजर्स को देखने की कोशिश ज्यादा लगती है। फिल्म टीनेजर्स के स्ट्रेस और उनके फ्यूचर को लेकर उनकी उम्मीदों की बात करना चाहती है, लेकिन कमजोर और बोरिंग स्क्रीनप्ले की वजह से ये बातें असर नहीं छोड़ पातीं।

15 साल से ज्यादा उम्र के दर्शकों के लिए फिल्म में ऐसा बहुत कुछ नहीं है, जो उन्हें बांधकर रख सके। स्कूल प्रोफेसर के रोल में कुणाल रॉय कपूर और शाई के पिता के किरदार में फिल्ममेकर अनुराग बसु जैसे कलाकार भी कुछ खास नहीं कर पाए हैं। दोनों के किरदारों को कहानी में ठीक से इस्तेमाल नहीं किया गया है। कई जगह ऐसा लगता है कि इन किरदारों को बस फिल्म का हिस्सा बनाने के लिए रखा गया है।

एक्टिंग और म्यूजिक

नए कलाकारों का अभिनय फिल्म का मजबूत पक्ष है। अपनी पहली फिल्म में आरुषि बजाज ने एक उलझी हुई टीनेजर का रोल अच्छे से निभाया है। बियांका अरोड़ा, पीयूष खाती और अंश दुग्गल ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। खासकर आरुषि अपने किरदार की उलझन और इमोशंस को पर्दे पर ठीक तरह से दिखाती हैं। जहां तक म्यूजिक की बात है तो राम संपत का संगीत फिल्म देखते समय हल्का-फुल्का और फ्रेश लगता है। हालांकि, फिल्म खत्म होने के बाद इसके गाने ज्यादा देर तक याद नहीं रहते।

देखें या नहीं?

‘डोंट बी शाय’ में एक अच्छी कमिंग-ऑफ-एज कहानी बनने की पूरी गुंजाइश थी, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले ने इसे काफी फीका कर दिया। नए कलाकारों की एनर्जी फिल्म को संभालने की कोशिश करती है, लेकिन कहानी में नयापन नजर नहीं आता। अगर आपकी उम्र 15 साल से कम है तो हो सकता है कि आपको यह फिल्म थोड़ी पसंद आए। लेकिन बाकी दर्शकों के लिए यह ऐसी स्कूल असेंबली जैसी लग सकती है, जिसमें शुरुआत में तो दिलचस्पी रहती है, लेकिन आधे रास्ते में ही ध्यान भटकने लगता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN