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शाहिद अफ़रीदी: अपने ही कप्तान के ख़िलाफ़ क़ुरान की कसम खाने वाला वाक़या

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Source :- BBC INDIA

शाहिद अफ़रीदी का जीवन काफ़ी हलचल भरा रहा है.

अक्सर कहा जाता है कि सपने सच हो जाते हैं. लेकिन तेज़ और आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए मशहूर पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफ़रीदी ने शायद ही सोचा होगा कि उनका देखा एक सपना इतनी जल्दी सच हो जाएगा.

शाहिद अफ़रीदी का जीवन काफ़ी हलचल भरा रहा है. शोएब अख़्तर की तरह वह भी अपने करियर के दौरान और उसके बाद सुर्ख़ियों में बने रहे. पहले अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी के कारण और फिर अपने बयानों की वजह से.

उनके इस अंदाज़ की झलक उनकी आत्मकथा ‘गेम चेंजर’ में भी दिखाई देती है.

वेस्टइंडीज़ नहीं, नैरोबी में चमकी क़िस्मत

शाहिद अफ़रीदी ने पहली बार चार अक्तूबर 1996 को पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था.

उन्होंने नैरोबी में श्रीलंका के ख़िलाफ़ केवल 37 गेंदों पर शतक बनाया था. उस समय ये वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट का सबसे तेज़ शतक था.

हालांकि, शाहिद अफ़रीदी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहुँचना भी किसी सपने से कम नहीं था.

वह पाकिस्तान की शुरुआती टीम में शामिल नहीं थे. उस समय वह पाकिस्तान की अंडर-19 टीम के साथ वेस्टइंडीज़ के दौरे पर थे.

पाकिस्तान की सीनियर टीम के लेग स्पिनर मुश्ताक़ अहमद के चोटिल होने के बाद अफ़रीदी को अचानक वेस्टइंडीज़ से नैरोबी भेजने का फ़ैसला किया गया.

उस समय पाकिस्तान की अंडर-19 टीम के कोच हारून रशीद थे.

उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, “मुझे अच्छी तरह याद है कि मैंने शाहिद को बुलाकर बताया कि तुम्हें वेस्टइंडीज़ से वापस भेजकर कीनिया भेजा जा रहा है. वहाँ तुम्हें पाकिस्तान की सीनियर टीम के साथ जुड़ना है. एक पल के लिए उन्हें यक़ीन ही नहीं हुआ कि ऐसा भी हो सकता है.”

पाकिस्तान की अंडर-19 टीम के वेस्टइंडीज़ दौरे के में क्रिकेटर ज़ीशान परवेज़ से जुड़ा एक विवाद भी सामने आया था. उसी समय शाहिद अफ़रीदी को नैरोबी भेजने का फ़ैसला हुआ.

लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि अफ़रीदी को वेस्टइंडीज़ से वापस क्यों भेजा जा रहा है. कुछ लोग यह भी सोचने लगे कि कहीं उनका नाम भी उस विवाद से तो नहीं जुड़ा है.

हारून रशीद बताते हैं, “शाहिद के बड़े भाई तारिक़ अफ़रीदी का भी मुझे फ़ोन आया. उन्होंने पूछा कि शाहिद को वेस्टइंडीज़ से वापस क्यों भेजा जा रहा है. मैंने उनसे कहा कि आपको तो ख़ुश होना चाहिए, क्योंकि वह पाकिस्तान की सीनियर टीम में शामिल होने जा रहे हैं. तब उन्हें असली वजह समझ आई.”

सपने में जयसूर्या और मुरलीधरन को लगाए छक्के

मैंने सपना देखा है कि मैं मुरलीधरन और जयसूर्या को छक्के मार रहा हूं- शाहिद अफ़रीदी

नैरोबी में हुए उस टूर्नामेंट में पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर शादाब कबीर, शाहिद अफ़रीदी के साथ एक ही कमरे में ठहरे थे. वह अफ़रीदी से जुड़ी एक दिलचस्प घटना के गवाह भी हैं.

शादाब कबीर ने बीबीसी हिंदी से कहा, “हमारी प्रैक्टिस दिन में हुई थी. वापस लौटने के बाद हम बहुत थके हुए थे और सो गए. शाम को मैंने शाहिद को जगाया और कहा कि मग़रिब की नमाज़ का समय हो रहा है.”

“जागने के बाद उन्होंने बताया कि मैंने सपना देखा है कि मैं मुरलीधरन और जयसूर्या को छक्के मार रहा हूँ. मैंने मज़ाक़ में कहा कि बाक़ी रन मैच में बना लेना.”

वह बताते हैं, “बात आई-गई हो गई. लेकिन उसी रात मैं गहरी नींद में सो रहा था, तभी शाहिद अचानक उठे और मैच की तैयारी करने लगे. उन्होंने मुझे भी जगाकर कहा कि उठो, मैच के लिए जाना है.”

“मैंने उनसे कहा, भाई सो जाओ, अभी रात के ढाई बजे हैं.”

शादाब कबीर के मुताबिक़, “वह मैच को लेकर बहुत ज़्यादा उत्साहित थे. ये सब अल्लाह की तरफ़ से होता है कि इंसान के दिल में क्या है और वह क्या कह रहा है. अल्लाह ने उन्हें इज़्ज़त देनी थी और वह उन्हें मिली.”

वक़ार और वसीम का अंदाज़ भी बदल गया

पाकिस्तान की टीम में शामिल होने के बाद शाहिद अफ़रीदी ने नेट प्रैक्टिस में वसीम अकरम और वक़ार यूनुस की गेंदों पर आक्रामक बल्लेबाज़ी की.

यह देखकर सभी हैरान रह गए कि लेग स्पिनर के रूप में टीम में आया यह खिलाड़ी इतनी अच्छी बल्लेबाज़ी भी कर सकता है.

अगले दिन नेट प्रैक्टिस में वसीम और वक़ार का अंदाज़ भी बदल गया. दोनों तेज़ गेंदबाज़ों ने अपनी गेंदों की रफ़्तार बढ़ाकर अफ़रीदी को परखने की कोशिश की.

लेकिन गेंदों की रफ़्तार जितनी बढ़ती गई, अफ़रीदी के बल्ले की ताक़त भी उतनी ही बढ़ती गई. वह दोनों गेंदबाज़ों की गेंदों पर और ज़ोरदार शॉट खेलने लगे.

इस दौरान वसीम अकरम को अचानक पाकिस्तान लौटना पड़ा. जाते समय उन्होंने अपनी जगह टीम की कप्तानी संभाल रहे सईद अनवर से कहा कि युवा शाहिद अफ़रीदी में बहुत दम है. उनकी बल्लेबाज़ी का फ़ायदा उठाना मत भूलना.

एक मैच से पहले बात करते शाहिद अफ़रीदी और वक़ार यूनुस.

इसके बाद जो हुआ, वह क्रिकेट इतिहास का हिस्सा बन गया

शाहिद अफ़रीदी (फ़ाइल फोटो)

अफ़रीदी ने जिस श्रीलंकाई टीम के ख़िलाफ़ सबसे तेज़ शतक बनाया था, वह उस समय वनडे क्रिकेट की विश्व चैंपियन थी.

उन्होंने जिन गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ चौकों और छक्कों की बारिश की, उनमें मुरलीधरन, जयसूर्या, चामिंडा वास और धर्मसेना शामिल थे.

जयसूर्या ने अपने 10 ओवरों में 94 रन दिए थे, जबकि मुरलीधरन के 10 ओवरों में 73 रन बने थे.

शाहिद अफ़रीदी ने उस पारी में 40 गेंदों पर 102 रन बनाए थे. इसमें 11 छक्के और छह चौके शामिल थे.

श्रीलंका के क्रिकेटर रोशन महानामा भी उस मैच में खेले थे. उन्होंने अपनी किताब ‘रिटायर्ड हर्ट’ में अफ़रीदी की उस पारी का ज़िक्र किया है.

उन्होंने लिखा है कि अफ़रीदी के कुछ छक्कों पर गेंद मैदान से बाहर पार्किंग में जाकर गिरी थी.

रोशन महानामा ने बीबीसी हिंदी से कहा, “हमें ख़ुद पर पूरा भरोसा था. उस समय श्रीलंका ने पाकिस्तान और भारत को हराया हुआ था. लेकिन हमने न शाहिद अफ़रीदी को देखा था और न उनके बारे में सुना था.”

“वह हम सभी के लिए नए थे. इसलिए उनकी पारी हमारे लिए एक बड़ा सरप्राइज़ थी. उन्होंने हमें हैरान कर दिया था.”

“उन्होंने बिल्कुल अलग तरह की क्रिकेट खेली. हालांकि, हम भी ऐसी क्रिकेट खेलने के आदी थे. हमारी टीम में जयसूर्या और अरविंदा डी सिल्वा जैसे आक्रामक बल्लेबाज़ मौजूद थे. लेकिन वह दिन पूरी तरह अफ़रीदी का था.”

आपने मेरे लिए क्या छोड़ा है?

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान रमीज़ राजा भी उस मैच को याद करते हैं.

उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, “शाहिद अफ़रीदी की तरह मैं भी शुरुआती टीम में शामिल नहीं था. मुझे इंग्लैंड से बुलाया गया था.”

“जब हम नेट प्रैक्टिस कर रहे थे, तो साथी खिलाड़ियों ने मुझे चेतावनी दी कि शाहिद अफ़रीदी की लेग स्पिन में आने वाली तेज़ गेंद से बचना. वह बहुत ख़तरनाक होती है.”

“हुआ भी ऐसा ही. उनकी तेज़ गेंद मेरे पैर के पंजे पर बहुत ज़ोर से लगी.”

रमीज़ राजा कहते हैं, “जहाँ तक शाहिद की बल्लेबाज़ी की बात है, उन्होंने जिस सोच के साथ बल्लेबाज़ी की थी, उसमें न डर था और न किसी तरह का ख़ौफ़. हाल में रज़ा उल्लाह की बल्लेबाज़ी में भी हमें ऐसा ही अंदाज़ दिखाई दिया है.”

वह बताते हैं, “सबसे तेज़ शतक बनाकर शाहिद अफ़रीदी आउट हुए और वापस लौट रहे थे. उसी समय मैं बल्लेबाज़ी करने मैदान पर जा रहा था.”

“मैं रास्ते में रुका और उनसे मज़ाक़ में पूछा, आपने मेरे लिए क्या छोड़ा है?”

इसका मतलब यह था कि अफ़रीदी ने इतनी तेज़ बल्लेबाज़ी कर दी थी कि अब कोई कितनी भी तेज़ी से खेले, उस तरह रन नहीं बना सकता था.

रमीज़ राजा कहते हैं, “उस समय के हिसाब से वह एक बेहद अनोखी पारी थी. इस तरह की क्रिकेट का चलन श्रीलंका के खिलाड़ियों ने शुरू किया था, लेकिन एक नए खिलाड़ी ने अपनी बल्लेबाज़ी से उन्हीं को हैरान कर दिया.”

दिलचस्प बात यह भी है कि रमीज़ राजा ने ही शाहिद अफ़रीदी को बताया था कि उन्होंने सबसे तेज़ शतक का विश्व रिकॉर्ड बना दिया है.

शाहिद सबसे तेज़ शतकों की सूची में तीसरे नंबर पर

शाहिद अफ़रीदी का यह शतक अब सबसे तेज़ शतकों की सूची में तीसरे नंबर पर है.

शाहिद अफ़रीदी का यह शतक अब सबसे तेज़ शतकों की सूची में तीसरे नंबर पर हैं.

सबसे पहले न्यूज़ीलैंड के कोरी एंडरसन ने केवल एक गेंद के अंतर से उनका रिकॉर्ड तोड़ा था. इसके बाद दक्षिण अफ़्रीका के एबी डिविलियर्स ने 31 गेंदों पर शतक लगाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया.

लेकिन 30 साल बाद भी अफ़रीदी की उस पारी की चर्चा उसी तरह होती है.

विकेटकीपर मोईन ख़ान भी उस मैच में पाकिस्तान की टीम का हिस्सा थे.

उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, “अफ़रीदी ऐसे क्रिकेटर थे, जिन्होंने अपनी पहली पारी से लेकर करियर ख़त्म होने तक ऐसा असर छोड़ा कि विरोधी टीम हमेशा परेशान रहती थी.”

“चाहे बल्लेबाज़ी हो या गेंदबाज़ी, वह कुछ भी कर सकते थे. केवल नैरोबी की पारी ही नहीं, उन्होंने अपने करियर में ऐसी कई यादगार पारियां खेलीं.”

वह बल्ला सचिन का नहीं, गांगुली का था

शाहिद अफ़रीदी ने जिस बल्ले से 37 गेंदों पर शतक बनाया था, उसके बारे में लंबे समय तक यही कहा जाता रहा कि वह सचिन तेंदुलकर का बल्ला था.

कहा जाता था कि सचिन ने वह बल्ला वक़ार यूनुस को दिया था.

शाहिद अफ़रीदी ने भी अपनी किताब में लिखा है कि वह सचिन तेंदुलकर का बल्ला था, जो वक़ार यूनुस के पास था. वक़ार ने बल्लेबाज़ी के लिए वह बल्ला अफ़रीदी को दिया था.

लेकिन अब वक़ार यूनुस ने इस बल्ले के बारे में एक अलग बात कही है. उनका कहना है कि वह बल्ला सचिन तेंदुलकर का नहीं, बल्कि सौरव गांगुली का था.

पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली (फ़ाइल फ़ोटो).

वक़ार यूनुस ने बीबीसी हिंदी से कहा, “मेरी सौरव गांगुली से दोस्ती थी. एक दिन उन्होंने मुझे अपना एक बल्ला दिखाया.”

“मैं उस बल्ले को जांचने लगा तो उन्होंने कहा कि इसका संतुलन बहुत अच्छा है. अगर आपको पसंद है तो आप इसे रख लीजिए.”

“मैंने उनसे कहा कि अगर आपको इस बल्ले से खेलने में आसानी होती है तो मैं कोशिश करूंगा कि सियालकोट से इसी तरह के कुछ बल्ले बनवाकर आपको भेज दूं.”

वक़ार यूनुस कहते हैं, “यह बल्ला मेरे पास था. नैरोबी में शाहिद अफ़रीदी ने नेट में बहुत आक्रामक बल्लेबाज़ी की थी.”

“जब वह श्रीलंका के ख़िलाफ़ बल्लेबाज़ी करने जा रहे थे, तो मैंने वह बल्ला उन्हें दे दिया और कहा कि इससे बल्लेबाज़ी करें.”

“उन्होंने उस बल्ले से ऐतिहासिक पारी खेली. इसके बाद मैंने बल्ला उन्हें तोहफ़े में दे दिया. एक युवा खिलाड़ी ने रिकॉर्ड बनाने वाली पारी खेली थी, इसलिए उस बल्ले पर उनका हक़ ज़्यादा था. वह बल्ला अब यक़ीनन अफ़रीदी के पास ही होगा.”

सबसे पहले ‘बूम-बूम’ किसने कहा था?

लोग अक्सर पूछते हैं कि शाहिद अफ़रीदी के लिए ‘बूम-बूम’ शब्द पहली बार किसने और कब इस्तेमाल किया था.

इसका जवाब 15 अप्रैल 2005 को भारत और पाकिस्तान के बीच कानपुर में खेले गए वनडे मैच से जुड़ा है.

उस मैच में शाहिद अफ़रीदी ने 10 चौकों और नौ छक्कों की मदद से 45 गेंदों पर शतक बनाया था.

उस दौरान कमेंट्री बॉक्स से ‘बूम-बूम’ शब्द सुनाई दिए थे. शाहिद अफ़रीदी को सबसे पहले ‘बूम-बूम’ कहने वाले रवि शास्त्री थे.

इसके बाद ‘बूम-बूम’ अफ़रीदी के नाम का ऐसा हिस्सा बन गया कि आज भी लोग उन्हें इसी नाम से बुलाते हैं.

‘तुमने मैच फ़िक्स किया है’

शाहिद अफ़रीदी ने अपनी किताब में कनाडा के टोरंटो में सहारा कप के दौरान भारत के ख़िलाफ़ बनाए एक शतक का भी ज़िक्र किया है.

उन्होंने दावा किया कि उस पारी के दौरान उनके कप्तान ने उन पर मैच फ़िक्सिंग का आरोप लगाया था.

अफ़रीदी लिखते हैं, “मैंने सईद अनवर के साथ पारी की शुरुआत की थी. सईद अनवर के आउट होने के बाद कप्तान आमिर सोहेल बल्लेबाज़ी करने आए.”

“मैं उस समय आक्रामक अंदाज़ में खेल रहा था. आमिर सोहेल पिच के बीच में आए. मैं उनके पास गया, क्योंकि मुझे लगा कि वह मुझसे कुछ कहना चाहते हैं.”

“लेकिन मेरी हैरानी की कोई सीमा नहीं रही, जब उन्होंने अपशब्द कहते हुए मुझ पर चिल्लाकर कहा, ‘मुझे मालूम है कि तुमने वसीम अकरम के साथ मिलकर यह मैच फ़िक्स किया है.'”

अफ़रीदी लिखते हैं, “यह सुनकर मेरा दिल बैठ गया. मैं सोचने लगा कि वह क्या कह रहे हैं. उस समय मैं एक युवा क्रिकेटर था. मेरी आंखों में आंसू आ गए.”

“लेकिन मैंने ख़ुद को संभाला और शतक बनाने में कामयाब रहा.”

उन्होंने आगे लिखा, “जब मैं ड्रेसिंग रूम में वापस आया तो आमिर सोहेल ने मुझसे कहा, मेरा साथ दो और मेरी तरफ़ रहो. मैं तुम्हें सही लोगों से मिलवाऊंगा. मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूं, ताकि तुम पाकिस्तान क्रिकेट को चला सको.”

अफ़रीदी के मुताबिक़, उन्होंने पूरी घटना के बारे में वसीम अकरम और इंज़माम-उल-हक़ को बताया.

इसके बाद दोनों ने उनसे कहा कि इस मामले को अपने तक ही रखो और चुपचाप इसे संभालो.

कप्तान के ख़िलाफ़ बग़ावत का मास्टरमाइंड कौन था?

साल 2009 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के दौरान पाकिस्तान की लगभग पूरी टीम ने कप्तान यूनुस ख़ान के ख़िलाफ़ बग़ावत कर दी थी.

खिलाड़ियों को यूनुस ख़ान के सख़्त व्यवहार से शिकायत थी और वे उनकी कप्तानी में खेलने के लिए तैयार नहीं थे.

एक कमरे में खिलाड़ियों की बैठक हुई. इसमें शामिल खिलाड़ियों ने क़ुरान पर कसम भी खाई थी.

इन खिलाड़ियों में टीम के उप कप्तान शाहिद अफ़रीदी भी शामिल थे.

अफ़रीदी ने अपनी किताब में इस पूरी घटना के लिए अपने एक साथी क्रिकेटर को ज़िम्मेदार ठहराया है. हालांकि, उन्होंने उस खिलाड़ी का नाम नहीं बताया.

अफ़रीदी ने किताब में ख़ुद को बेगुनाह बताते हुए लिखा कि उन्होंने साथी खिलाड़ियों को समझाने की कोशिश की थी.

उनका कहना था कि इस मामले पर सीधे यूनुस ख़ान से बात की जाए या फिर टीम मैनेजर से चर्चा की जाए. लेकिन सभी खिलाड़ी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन एजाज़ बट से मिलना चाहते थे.

दिलचस्प बात यह है कि इस बग़ावत में शामिल शाहिद अफ़रीदी, मोहम्मद यूसुफ़ और सईद अजमल बाद में एक टीवी कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

कार्यक्रम के दौरान तीनों ने इस बग़ावत की ज़िम्मेदारी ख़ुद लेने के बजाय एक-दूसरे पर डाल दी थी.

जब यूनुस ख़ान उसी कार्यक्रम में मेहमान बने तो उन्होंने कहा कि अब हर खिलाड़ी दूसरे पर बात डाल रहा है.

हर कोई कह रहा है कि दूसरे खिलाड़ी को उनसे शिकायत थी और उसे ख़ुद कोई शिकायत नहीं थी.

यूनुस ख़ान ने सवाल उठाया कि अगर किसी खिलाड़ी को उनसे कोई शिकायत नहीं थी, तो वह उस बैठक में शामिल क्यों हुआ था?

यूनुस ख़ान ने साफ़ तौर पर कहा था कि पूरा मामला कप्तान बनने की इच्छा से जुड़ा था.

उन्होंने इस बग़ावत के मास्टरमाइंड के रूप में शाहिद अफ़रीदी की तरफ़ इशारा किया था. उनका कहना था कि अफ़रीदी ही कराची से विमान लेकर लाहौर पहुंचे थे और बोर्ड के चेयरमैन एजाज़ बट से मिले थे.

नेताओं ने क्या पेशकश की?

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ (फ़ाइल फ़ोटो)

शाहिद अफ़रीदी ने 2019 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा में पाकिस्तान के कुछ प्रमुख नेताओं से मिली पेशकशों का भी ज़िक्र किया है.

अफ़रीदी के मुताबिक़, ये पेशकशें उनका समर्थन हासिल करने के बदले की गई थीं.

उन्होंने लिखा, “यह उन दिनों की बात है, जब क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन एजाज़ बट से मेरे गंभीर मतभेद हो गए थे और मैं दोबारा टीम से निकाले जाने के क़रीब था.”

“आप अंदाज़ा लगाइए कि सबसे पहले मेरी मदद करने की पेशकश किसने की थी? बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने.”

अफ़रीदी लिखते हैं, “यह पेशकश काफ़ी दिलचस्प थी. पीपुल्स पार्टी के लोगों ने कहा कि एजाज़ बट के साथ मेरा विवाद सुलझाने में मदद की जाएगी.”

“इसके बदले मुझे इस युवा नेता यानी बिलावल के साथ राजनीतिक रैलियों में शामिल होना होगा.”

उन्होंने लिखा, “ज़ाहिर है, मैंने बिलावल की मदद और उनकी पेशकश स्वीकार नहीं की.”

अफ़रीदी ने आगे लिखा, “बदक़िस्मती से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, बेनज़ीर भुट्टो के साथ ही ख़त्म हो गई.”

“जब मैं लंदन में बिलावल से मिला था, उस समय वह राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे. वह मुझसे कह रहे थे कि मैं उनके साथ मिलकर काम करूं और उनकी चुनावी मुहिम में भी शामिल हो जाऊं.”

अफ़रीदी के मुताबिक़, “मैं उनसे केवल इसलिए मिला था, क्योंकि मैं बेनज़ीर भुट्टो के बेटे से मिलना चाहता था. मुझे उम्मीद थी कि वह अपनी दिवंगत मां के नक़्शेक़दम पर चलेंगे.”

“लेकिन जल्द ही मुझे पता चल गया कि पीपुल्स पार्टी में असली फ़ैसले कौन कर रहा है. बिलावल भुट्टो ज़रदारी केवल सामने दिखाई देते हैं. उनके हाथ कठपुतली की तरह बंधे हुए हैं.”

शाहिद अफ़रीदी ने अपनी किताब में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का भी ज़िक्र किया है.

वह लिखते हैं, “मियां साहब ने मुझे अपनी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ में एक पद देने की पेशकश की थी.”

“उन्होंने अपने ख़ास अंदाज़ में यह बात सीधे कहने के बजाय इशारों में कही. उन्होंने कहा कि मैं अपने बल्ले पर शेर का स्टिकर लगा लूं. शेर उनकी मुस्लिम लीग का चुनाव निशान है.”

अफ़रीदी के मुताबिक़, उन्होंने हंसकर यह बात टाल दी थी.

उन्होंने लिखा, “इसी तरह इमरान ख़ान ने भी प्रधानमंत्री बनने से पहले मुझे अपने साथ शामिल होने की पेशकश की थी. यह उस समय की बात है, जब उन्होंने इस्लामाबाद में धरना दिया था.”

यह बताना भी ज़रूरी है कि साल 2011 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और शाहिद अफ़रीदी के बीच विवाद हुआ था.

उस दौरान पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर एक आधिकारिक बयान जारी किया था.

इसमें बोर्ड ने शाहिद अफ़रीदी की लंदन में बिलावल भुट्टो ज़रदारी से मुलाक़ात और क्रिकेट बोर्ड पर राजनीतिक दबाव डलवाने का आरोप लगाया था.

बोर्ड का कहना था कि शाहिद अफ़रीदी टीम में वापस आने के लिए अलग-अलग राजनीतिक लोगों और गुटों से बोर्ड पर दबाव डलवा रहे हैं.

बोर्ड ने यह भी कहा था कि इस मामले में उसे अलग-अलग लोगों की तरफ़ से गंभीर नतीजे भुगतने की धमकियां मिल रही हैं.

यह वह समय था, जब शाहिद अफ़रीदी ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के उस समय के अधिकारियों के रहते खेलने से इनकार कर दिया था.

इसके बाद उन्हें वनडे टीम की कप्तानी से हटा दिया गया था. उनका सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया गया था और विदेश में खेलने के लिए ज़रूरी एनओसी भी वापस ले ली गई.

अफ़रीदी ने इसके ख़िलाफ़ अदालत का रुख़ किया था.

बाद में अफ़रीदी और क्रिकेट बोर्ड के बीच समझौता हो गया. इसके बाद उन्हें विदेश में खेलने के लिए एनओसी जारी कर दी गई.

इसके साथ ही उन पर 45 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था.

मियांदाद ने कहा, मेरी तारीफ़ करना

भारतीय खिलाड़ियों पर टिप्पणी के कारण शाहिद कई बार विवादों में रहे हैं.

शाहिद अफ़रीदी ने अपनी किताब में पाकिस्तान की टीम के 1999 के भारत दौरे का भी ज़िक्र किया है.

उन्होंने लिखा है कि उस दौरे में टीम के कोच जावेद मियांदाद का व्यवहार उनके साथ अच्छा नहीं था.

अफ़रीदी के मुताबिक़, दौरे से पहले ही मियांदाद चाहते थे कि उनकी जगह आसिफ़ मुजतबा को टीम में शामिल किया जाए.

मियांदाद को अफ़रीदी की बल्लेबाज़ी का अंदाज़ और तकनीक पसंद नहीं थी. लेकिन कप्तान वसीम अकरम और मुख्य चयनकर्ता सलाहुद्दीन, अफ़रीदी के पक्ष में थे.

अफ़रीदी लिखते हैं कि उस दौरे के दौरान मियांदाद का व्यवहार उनके साथ अच्छा नहीं था.

लेकिन जब अफ़रीदी ने चेन्नई टेस्ट में शतक बनाया तो मियांदाद ने उनसे कहा, “सुनो, तुम्हें प्रेज़ेंटेशन और इंटरव्यू में मेरा शुक्रिया अदा करना है.”

“तुम्हें बताना है कि मैंने तुम्हें कितना तैयार किया है और एक अच्छा बल्लेबाज़ बनाया है. समझे?”

शाहिद अफ़रीदी और जावेद मियांदाद के बीच बाद में भी गंभीर मतभेद सामने आए.

साल 2016 में शाहिद अफ़रीदी ने जावेद मियांदाद के एक विवादित बयान के बाद उनके ख़िलाफ़ अदालत जाने का फ़ैसला किया था.

मियांदाद ने अफ़रीदी पर मैच फ़िक्सिंग में शामिल होने का आरोप लगाया था. बाद में दोनों के बीच समझौता करा दिया गया था.

विवाद और ज़ुबानी जंग

शाहिद अफ़रीदी और भारतीय क्रिकेटरों के बीच ज़ुबानी जंग भी होती रही है.

इन भारतीय क्रिकेटरों में गौतम गंभीर, शिखर धवन और इरफ़ान पठान शामिल हैं.

इंग्लैंड में हुए एक लीजेंड्स टूर्नामेंट में भारतीय क्रिकेटरों ने शाहिद अफ़रीदी के साथ खेलने से इनकार कर दिया था. इसके बाद वह मैच रद्द करना पड़ा था.

शाहिद अफ़रीदी को कई बार जुर्माने और पाबंदियों का भी सामना करना पड़ा.

इनमें पिच ख़राब करने, गेंद को दांत से काटने और एक दर्शक के चेहरे के पास धमकी भरे अंदाज़ में बल्ला ले जाने जैसी घटनाएं शामिल हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS