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नौकरी के लिए शुरू हुई थी गुलवीर की दौड़, एशियन गेम्स 206 में सिल्वर मेडल जीतने तक पहुंची

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूपी के अलीगढ़ के गुलवीर सिंह ने सेना में भर्ती के लिए दौड़ना शुरू किया था। गुलवीर सिंह एशियन गेम्स में रजत और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी बने। गुलवीर सिंह हाफ मैराथन को एक घंटे से कम समय में दौड़कर पूरी करने वाले पहले भारतीय हैं।

यूपी के अलीगढ़ में गांव और खेतों की पगडंडियों से शुरू हुई एक दौड़ शुक्रवार को एशिया के सबसे बड़े खेल मंच तक पहुंच गई। अलीगढ़ के सिरसा गांव से निकलने वाले गुलवीर सिंह ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर एक बार फिर भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने 28:29.38 के समय के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। गुलवीर के लिए यह सिर्फ एक और पदक नहीं है। यह उस सफर का नया अध्याय है, जिसकी शुरुआत अंतरराष्ट्रीय मेडल के सपने से नहीं, बल्कि भारतीय सेना में भर्ती होने की चाहत से हुई थी।

एक जून 1998 को किसान परिवार में जन्मे गुलवीर सिंह के गांव में खेलों की दुनिया से ज्यादा चर्चा सेना में भर्ती की होती थी। गुलवीर भी सेना में जाना चाहते थे। उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स जैसी प्रतियोगिताओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। दौड़ उनके लिए शुरुआत में मेडल जीतने का रास्ता नहीं, बल्कि सेना में नौकरी हासिल करने का जरिया थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके गांव में बहुत कम लोग इन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के बारे में जानते थे।

प्रतिस्पर्धी दौड़ और एथलेटिक्स की असली दुनिया से उनका परिचय सेना में आने के बाद हुआ। साल 2018 में गुलवीर का सेना में जाने का सपना पूरा हुआ। वह खेल कोटे से भारतीय सेना में भर्ती हुए और ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट का हिस्सा बने। यहीं से उनकी जिंदगी की दिशा बदलने लगी। सेना की ट्रेनिंग और अनुशासन के बीच उन्हें अपनी दौड़ की प्रतिभा को निखारने का मौका मिला। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि ट्रैक पर उनकी क्षमता सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं है, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

गुलवीर सिंह की प्रमुख उपलब्धियां

● एशियन गेम्स 2026: 10,000 मीटर में रजत पदक

● कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: 10,000 मीटर में रजत पदक

● कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: 5000 मीटर में कांस्य पदक

● एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025: 5000 मीटर स्वर्ण पदक

● एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025: 10,000 मीटर स्वर्ण पदक

● एशियन गेम्स 2023: 10,000 मीटर कांस्य पदक

● एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023: 5000 मीटर कांस्य पदक

● 10,000 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड: 27:00.22

● 5000 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड: 12:59.77

● 3000 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड: 7:34.49

गुलवीर के पदक जीतने पर झूमकर नाचीं दादी

एशियन गेम्स में गुलवीर ने रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया तो इस खुशी में उनकी दादी झूमकर नाची। उन्होंने कहा जब गोलू आवेगा तब और नाचूंगी। गुलवीर सिंह के रजत पदक जीतने के बाद उनके गांव सिरसा में खुशी की लहर दौड़ गई। नाती गुलवीर की जीत पर मलंग होकर दादी खूब झूमी। गांव वालों और रिश्तेदारों को पदक जीतने की जानकारी मिली तो वह भी बधाई देने पहुंचने लगे। नाती के जीतने की खबर जैसे ही 99 वर्षीय बुजुर्ग दादी गेंदो देवी को लगी, वह मलंग होकर झूम उठीं। डगमगाते कदमों और लड़खड़ाती जुबान से वह कह रही थीं, गुलवीर मेरौ नाती ए, बाने मेडल जीतो ए, मौए भारी खुशी है। उन्होंने कहा कि नाती ने चांदी जीत लियो, अब सोना लायगो। गोलू जब आवेगा तब खूब नाचूंगी।

परिवार की मोबाइल पर टिकी रहीं निगाहें

शुक्रवार शाम हर किसी की निगाहें मोबाइल पर जमीं रही। पूरा परिवार मोबाइल स्क्रीन पर निगाहें टिकाए बैठा था। पिता पप्पू सिंह, मां लक्ष्मी देवी, भाई मोनू चौधरी, नरेश, पत्नी बबिता सहित सभी सदस्य हर पल गुलवीर के प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए थे। पदक जीतने की घोषणा होते ही परिवार और गांव में खुशी का माहौल छा गया। मिठाइयां बांटी गईं और एक-दूसरे को बधाई दी गई।

2025 में बने डबल एशियन चैंपियन

साल 2025 गुलवीर के करियर का बेहद खास साल रहा। उन्होंने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्डों को भी लगातार बेहतर किया। उनकी गति और रेस के आखिरी हिस्से में तेजी ने उन्हें लंबी दूरी की दौड़ में भारत की बड़ी उम्मीद बना दिया।

हाफ मैराथन में भी गुलवीर का रिकॉर्ड

गुलवीर ने ट्रैक के अलावा रोड रेस में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने एक घंटे से कम समय में हाफ मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय बनने का रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि बताती है कि उनकी क्षमता सिर्फ 5000 और 10,000 मीटर तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबी दूरी की अलग-अलग स्पर्धाओं में भी वह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

रजत कांस्य से रचा इतिहास

2026 में गुलवीर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐसा इतिहास रचा, जो भारतीय एथलेटिक्स में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। ग्लासगो में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में उन्होंने 27:49.78 का समय निकालकर रजत पदक जीता। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने।

परिवार से दूर रह हासिल की कामयाबी

अमेरिका में ट्रेनिंग और लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के कारण गुलवीर को लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है। उन्होंने बताया है कि परिवार की याद उन्हें काफी आती है, लेकिन उनके माता-पिता हमेशा उनकी एथलेटिक्स को प्राथमिकता देने के फैसले का समर्थन करते हैं।

2023 में जीता पहला अंतरराष्ट्रीय पदक

सेना में भर्ती होने के बाद सफलता तुरंत नहीं मिली। करीब चार साल तक लगातार मेहनत करने के बाद गुलवीर ने 2022 में फेडरेशन कप में 10,000 मीटर का कांस्य पदक जीता। यह उनके करियर का वह मोड़ था, जहां से राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बनने लगी। गुलवीर का अगला बड़ा पड़ाव 2023 का एशियन गेम्स था। हांगझोउ में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में उन्होंने 28:17.21 का समय निकालकर कांस्य पदक जीता।

2024 में अमेरिका पहुंचे, फिर रिकॉर्ड टूटने लगे

2024 में गुलवीर ने अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में ट्रेनिंग शुरू की। वहां कोच स्कॉट सिमंस के मार्गदर्शन में उनकी तैयारी ने नया स्तर हासिल किया। इसके बाद भारतीय एथलेटिक्स में गुलवीर का नाम रिकॉर्ड के साथ जुड़ने लगा। 3000 मीटर, 5000 मीटर और 10,000 मीटर में उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किए। विश्व एथलेटिक्स के मुताबिक 5000 मीटर में उनका राष्ट्रीय रिकॉर्ड 12:59.77 और 10,000 मीटर में 27:00.22 है। 3000 मीटर में भी उनके नाम 7:34.49 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN