Home rss world hindi PoK में नई फोर्स भेजी तो… पाकिस्तान को खुली धमकी, किसने बढ़ाई...

PoK में नई फोर्स भेजी तो… पाकिस्तान को खुली धमकी, किसने बढ़ाई शहबाज-मुनीर की टेंशन?

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

पीओके में आंदोलन चला रही जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान को साफ चेतावनी दी है कि इलाके में सुरक्षा बलों की कोई भी नई तैनाती वहां पर बाहरी हमला मानी जाएगी। कमेटी के नेता उमर नजीर कश्मीरी ने दावा किया कि कोटली और कुछ अन्य इलाकों से फौज पहले ही पीछे हट चुकी है।

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कई महीनों से चल रहे आंदोलन के बीच जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी है। कमेटी का कहना है कि इलाके में सुरक्षा बलों की कोई भी नई तैनाती वहां के लोगों पर बाहरी हमला मानी जाएगी। एक्शन कमेटी के नेता उमर नज़ीर कश्मीरी ने दावा किया कि कोटली और आसपास के कुछ इलाकों से पाकिस्तानी सुरक्षा बल के कुछ जवान पहले ही पीछे हट चुके हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर इन जवानों को दोबारा वहां भेजा गया, तो लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनके मुताबिक ऐसा कोई भी कदम इलाके पर बाहर से किया गया हमला माना जाएगा और उसका कड़ा विरोध होगा।

उमर नज़ीर कश्मीरी ने कहा कि कोटली और दूसरे इलाकों से कुछ फोर्स पीछे हट गई हैं। अगर फोर्स को फिर से यहां लाया जाता है, चाहे वे कहीं से भी आएं, हम इसे अपने राज्य पर बाहरी हमला मानेंगे। हम इसकी कड़ी निंदा करेंगे और इसका विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कमेटी सिर्फ एक जिले या एक जगह की तैनाती का विरोध नहीं कर रही। उनका रुख यह है कि किसी भी जिले से, किसी भी जगह से और किसी भी किस्म की सुरक्षा फोर्स को पीओके में दोबारा लाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

क्यों चल रहा आंदोलन?

यह चेतावनी अचानक नहीं आई है। पीओके में जेएएसी कई महीनों से आर्थिक, राजनीतिक और संवैधानिक मांगों को लेकर आंदोलन चला रही है। कमेटी ने बंद, रैलियां और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं। मांगों में सब्सिडी, बेहतर शासन व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व शामिल हैं।

आंदोलन की एक बड़ी मांग यह भी है कि पाकिस्तान के दूसरे इलाकों में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आजाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आरक्षित 12 सीटें खत्म की जाएं। आंदोलनकारियों का कहना है कि ये सीटें स्थानीय लोगों के हक और प्रतिनिधित्व पर असर डालती हैं।

जून के बाद से आंदोलन और तेज हो गया। मुजफ्फराबाद, रावलकोट, मीरपुर और कोटली जैसे इलाकों में बड़े प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की खबरें भी आईं। हिंसा और हताहतों को लेकर सरकारी अधिकारियों और आंदोलन के नेताओं के बयान अलग-अलग रहे।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

इन घटनाओं के बाद आजाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने जेएएसी पर बैन लगा दिया। कुछ नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की गई। अधिकारियों का आरोप है कि संगठन ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ी और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया। आंदोलनकारियों ने इन आरोपों को गलत बताया है और कहा है कि वे अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं। इसी माहौल में उमर नजीर कश्मीरी की नई चेतावनी आई है। उनका संदेश साफ है कि जिन इलाकों में पहले विरोध हुआ है, वहां अगर दोबारा सुरक्षा बल भेजे गए तो आंदोलन और तेज हो सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN