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कर्नाटक में वोटर्स के नाम कटवाने के आरोप: कार्यकर्ताओं पर एफ़आईआर के बाद बीजेपी ने येदियुरप्पा को उतारा

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Source :- BBC INDIA

येदियुरप्पा

कर्नाटक में मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच बीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए मैदान में उतारा है.

येदियुरप्पा हाल के दिनों में सार्वजनिक बैठकों या प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं ले रहे थे.

लेकिन आज येदियुरप्पा ने बीजेपी के शीर्ष नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक से मुलाक़ात की.

उन्होंने मांग की कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए कथित तौर पर “बड़ी संख्या में” फॉर्म 7 जमा करने के आरोप में उनके पार्टी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करना बंद किया जाए.

कर्नाटक में कम से कम छह ज़िलों में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं या अन्य मतदाताओं ने शिकायतें दर्ज कराई हैं. इन शिकायतों में बीजेपी के लोगों पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग करते हुए फॉर्म 7 जमा करने का आरोप लगाया गया है.

पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और अन्य बीजेपी नेता

जिन लोगों के नाम हटाने के लिए फ़ॉर्म 7 जमा किए गए हैं, उनमें ज़्यादातर मतदाता अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी समुदायों से संबंधित हैं.

इनमें से ज़्यादातर शिकायतें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत धोखाधड़ी, ग़लत पहचान, जालसाज़ी और आपराधिक साज़िश के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई हैं.

यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के मुताबिक़ नहीं है, जिसके तहत केवल ईसीआई (चुनाव आयोग) शिकायतकर्ता हो सकता है.

डीजीपी एमए सलीम से मुलाक़ात के बाद येदियुरप्पा ने कहा, “एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में, हम पार्टी कार्यकर्ताओं पर ऐसे काम का आरोप लगाया जाना बर्दाश्त नहीं कर सकते, जिसकी कानून में व्यवस्था है. पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए इस तरह काम कर रहे हैं. हमने डीजीपी से कहा है कि यह आज ही ख़त्म होना चाहिए. हम इस मुद्दे को पूरे राज्य में उठाएंगे.”

डीजीपी को दिए पार्टी के ज्ञापन में कहा गया है कि सिर्फ़ बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा करना आपराधिक काम नहीं माना जा सकता. वास्तव में, यह भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की ओर से मतदाताओं को नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति जताने या मतदाता सूची में पहले से मौजूद प्रविष्टियों को हटाने की मांग करने के लिए उपलब्ध कराई गई एक वैध प्रक्रिया है.

प्रतिनिधिमंडल ने ख़ास तौर पर भालकी (बीदर ज़िला), बेलगावी (बेलगावी ज़िला) और नरसिम्हाराजा (मैसूरु) में दर्ज एफआईआर का ज़िक्र किया और कहा कि इन सभी मामलों में आपराधिक जिम्मेदारी तय किए जाने की ज़रूरत है.

प्रियांक खड़गे का कोट कार्ड

आर अशोक ने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दी

आर अशोक का कोट कार्ड

इस मामले को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने अधिकारियों को चेतावनी दी.

उन्होंने कहा, “अगर पुलिस अधिकारी अपनी ताक़त का दुरुपयोग करते हैं, तो उन्हें बाद में इसका पछतावा होगा. राज्य में एनडीए की सरकार आएगी और हम इसका हिसाब बराबर करेंगे.”

बीजेपी नेताओं की यह प्रतिक्रिया ईसीआई की ओर से निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए जाने के बाद आई है.

चुनाव आयोग ने कहा था कि उन्हें उस आवेदक के ख़िलाफ़ कानून के मुताबिक़ कार्रवाई शुरू करनी चाहिए, जिसने “जानबूझकर आवेदन या फॉर्म (फॉर्म 6, 6ए, 7 और 8) में लिखित रूप से ग़लत बयान या घोषणा की है, जैसा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1980 की धारा 31 में प्रावधान है.

ऐसी कार्रवाई से पहले जनप्रतिनिधि नियम, 1960 के नियम 20 के तहत जांच की जाएगी.

नियमों में कहा गया है कि फॉर्म 7 में ग़लत बयान देने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत सज़ा का प्रावधान है. इसमें एक साल तक की जेल की सज़ा या ज़ुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

कर्नाटक में पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर बीएस येदियुरप्पा और उनके सहयोगी

चुनाव आयोग का बयान उस समय आया, जब गुरुवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अपने कई मंत्रियों के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय पहुंचे और वहां “बीजेपी और जेडीएस” के सदस्यों की तरफ से बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए जाने का मुद्दा उठाया.

शिवकुमार ने बताया कि बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म 7 के 1,373 आवेदन थे, मुदिगेरे में 6,259 फॉर्म 7 आवेदन थे, बाबलेश्वर में फॉर्म 7 के 1,373 आवेदन थे, भालकी में फॉर्म 7 के 2,285 आवेदन थे, बल्लारी में 6,500, जयनगर में 5 हज़ार और बीदर में फॉर्म 7 के 3,200 आवेदन थे.

शिवकुमार ने कहा था, “बाबलेश्वर में, कथित तौर पर बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने लिखित माफ़ी मांगी और अधिकारियों से अपने ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया. उसने कहा कि उसने ग़लती से फॉर्म 7 के आवेदन जमा कर दिए थे,”

इन विधानसभा क्षेत्रों में क्या हुआ?

डीके शिवकुमार

इनमें से कुछ विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज एफ़आईआर के अनुसार, फॉर्म 7 के आवेदन नाम, पते और अन्य विवरण के साथ प्रिंट किए गए थे.

एफ़आईआर के मुताबिक़, शिकायतकर्ताओं में से एक, बेलगाम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के ब्लॉक लेवल एजेंट (बीएलए) मीरसाबा सनादी ने देखा कि दो लड़के बड़ी संख्या में फॉर्म 7 के आवेदन लेकर बीएलओ के कार्यालय में आए थे. वे ब्लॉक लेवल अधिकारी (बीएलओ) सविता उपाध्याय के पास गए और कहा कि ये उन मतदाताओं के नाम हैं जिन्हें हटाया जाना है और वे चाह रहे थे कि वह तुरंत फॉर्म पर हस्ताक्षर कर दें.

जब उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उन्हें किसी व्यक्ति का फोन आया, जिसने ख़ुद को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) बताया. लेकिन वह असली ईआरओ नहीं था.

सनादी ने जब दोनों लड़कों से सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें बड़ी संख्या में फॉर्म दिए गए थे, ताकि उन पर हस्ताक्षर करवाए जा सकें. सनादी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में यह बात कही है.

बेलगाम उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक आसिफ राजू सैत हैं, जिन्होंने अपने बीजेपी प्रतिद्वंद्वी रवि बी. पाटिल को 4,200 से कुछ अधिक वोटों के अंतर से हराया था.

सनादी को तब पता चला कि दो युवकों ने बीएलओ को जो फॉर्म 7 के आवेदन दिए थे, उनमें उनके और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी दर्ज थे.

मैसूरु के कृष्णराजा विधानसभा क्षेत्र में रविशंकर एस. ने पुलिस से शिकायत की कि “एक समुदाय (मुस्लिम) से संबंधित मतदाताओं के ख़िलाफ़ 501 फॉर्म 7 आवेदन दाखिल किए गए हैं, जो नफ़रत से भरे हुए हैं और एसआईआर प्रक्रिया भ्रामक है. यह भी एक आपराधिक काम है.”

कर्नाटक में ऐसी कई सीटों पर वोटरों के नाम हटवाने की कोशिश का आरोप लगाया गया है, जहां पिछले विधानसभा चुनावों में मुक़ाबला काफ़ी क़रीबी था (सांकेतिक तस्वीर)

दिलचस्प बात यह है कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कृष्णराजा से चुने गए उम्मीदवार बीजेपी से हैं. टी.एस. श्रीवत्स ने कांग्रेस उम्मीदवार एमके सोमशेखर को सात हज़ार से अधिक वोटों से हराया था.

बीदर ज़िले के भालकी में मोहम्मद अतीक अहमद ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उन्हें पता चला कि किसी व्यक्ति ने उनकी ओर से फॉर्म 7 का आवेदन जमा किया था, जिसमें मतदाता सूची से उनका नाम हटाने की मांग की गई थी.

जब उन्होंने ईआरओ से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि ऐसे 3,244 आवेदन हैं. जांच करने पर ईआरओ ने पाया कि सभी आवेदन “जाली थे और इन पर अतीक अहमद के हस्ताक्षर किए गए थे.”

उनके मुताबिक़, “बिना किसी सत्यापित दस्तावेज़ के और मेरी जानकारी के बिना, वे अलग-अलग मोबाइल नंबर दे रहे हैं.”

भालकी का प्रतिनिधित्व ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री ईश्वर खंड्रे करते हैं. उन्होंने अपने बीजेपी प्रतिद्वंद्वी को 27 हज़ार से अधिक वोटों से हराया था.

प्रियांक खड़गे ने क्या कहा?

प्रियांक खड़गे

इस विवाद पर कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, “मुझे बताइए, कर्नाटक में 1.08 करोड़ लोग एसआईआर से बाहर हैं, मतदाता सूची से बाहर हैं. फिर, जो लोग मतदाता सूची में हैं, उनमें से 43.8 लाख लोगों को तार्किक विसंगतियों के तहत नोटिस मिले हैं. और अब बीजेपी के लोग बड़े पैमाने पर नाम हटा रहे हैं.”

उन्होंने दावा किया, “इसलिए एसआईआर (मतदाता सूची की) शुद्धि है. यह विशेष गहन पुनरीक्षण नहीं है. यह संघ गहन पुनरीक्षण है. आरएसएस के लोग इसे संचालित कर रहे हैं. केवल एससी और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं,”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS