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मछली पकड़ने के जाल के भरोसे पाकिस्तानी सेना! TTP के ड्रोन से बचने के लिए किया ये अजीब जुगाड़

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सस्ते ड्रोन पाकिस्तानी सेना को लगातार निशाना बना रहे हैं। एंटी-ड्रोन सिस्टम के बावजूद पाकिस्तान इन हमलों को पूरी तरह रोकने में नाकाम नजर आ रहा है।

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के तंगहाली की खबरें समय-समय पर आती रहती हैं। वहीं अब पाकिस्तानी सेना को लेकर एक ऐसी खबर आई है, जिससे आपको उस मुल्क के असली हालात के बारे में बता चलेगा। पाकिस्तान अफगान तालिबान यानी टीटीपी के हमलों से इतना डर गया है कि बचने के लिए तरह-तरह के काम कर रहा है। वहीं पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अफगानिस्तान की सीमा के पास सेना की चौकियों को ड्रोन हमलों से बचाने के लिए एक अजीब तरीका अपनाया है। ड्रोन हमलों से बचने के लिए पाक सेना को इससे बचने के लिए मछली पकड़ने वाले जाल का सहारा लेना पड़ रहा है।

आसिम मुनीर का सस्ता जुगाड़

अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सस्ते ड्रोन पाकिस्तानी सेना को लगातार निशाना बना रहे हैं। एंटी-ड्रोन सिस्टम के बावजूद पाकिस्तान इन हमलों को पूरी तरह रोकने में नाकाम नजर आ रहा है। यही वजह है कि अब पाकिस्तानी सेना ने कम खर्च वाले इस अजीब जुगाड़ को आजमाना शुरू किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कुछ कमजोर पुलिस और सेना की चौकियों को मछली पकड़ने वाले जाल से ढका जा रहा है। यह कदम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बढ़ते ड्रोन हमलों के बीच उठाया गया है।

करीब तीन महीने के बाद पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव और लड़ाई बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह पाकिस्तान का पुराना आरोप है कि अफगानिस्तान, टीटीपी यानी पाकिस्तानी तालिबान को अपने यहां पनाह दे रहा है। हालांकि, अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के इस आरोप को खारिज किया है। वहीं, पाकिस्तान का दावा है कि टीटीपी उसके सुरक्षा बलों पर होने वाले कई हमलों के पीछे है।

डर के साए में पाकिस्तान

अप्रैल में अफगानिस्तान की सीमा से करीब 30 किलोमीटर दूर हंगू जिले में ड्रोन हमला हुआ। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने ड्रोन से निपटने के लिए एक अजीब तरीका अपनाने का फैसला किया। सेना ने मछली पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि दुश्मन के ड्रोन को रोकने के लिए मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल शुरू किया। 16 अप्रैल को एक ड्रोन ने सरकी पियाला पुलिस चौकी पर बम गिराए। हमले के बाद टीटीपी के लड़ाकों ने वहां मौजूद सुरक्षा जवानों पर गोलीबारी भी की। इस हमले में एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।

यह पहली बार नहीं है जब हंगू जिले में ऐसा हमला हुआ है। अफगानिस्तान की सीमा के पास होने की वजह से हंगू लंबे समय से ड्रोन हमलों का निशाना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक जिले में 16 ड्रोन हमले हो चुके हैं। हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि पाकिस्तानी सुरक्षा जवान बिना सुरक्षा इंतजाम के अपनी बैरक से बाहर निकलने से भी बचते हैं। लगातार बढ़ते खतरे के बावजूद पाकिस्तान ने महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने के बजाय कम खर्च वाला एक अलग तरीका अपनाया है।

पाकिस्तानी सेना ने अब मछली पकड़ने वाले बड़े जालों को चौकियों की छतों और दीवारों के ऊपर लगाना शुरू कर दिया है। इसका मकसद ड्रोन को ऊपर से सीधे हमला करने से रोकना है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक सुरक्षा चौकी को इन जालों से ढकने में करीब 1,400 डॉलर यानी लगभग 1.30 लाख रुपये का खर्च आता है। वहीं, एक एंटी-ड्रोन सिस्टम की कीमत करीब 5 हजार डॉलर से लेकर 50 लाख डॉलर तक हो सकती है। ऐसे में आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए मछली पकड़ने वाले जाल सस्ता विकल्प बन गए हैं। पिछले कुछ महीनों में अफगानिस्तान सीमा के पास स्थित कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे पांच जिलों की कई सैन्य चौकियों पर ये जाल लगाए गए हैं।

अफगान तालिबान ने सिखाया सबक

पाकिस्तान में बढ़ती चिंता की एक बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की बदलती हमले से है। सस्ते और आसानी से मिलने वाले ड्रोन अब टीटीपी के हमलों का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। दिसंबर 2025 में टीटीपी ने मौलवी सलीम हक्कानी की अगुवाई में एक अलग ड्रोन यूनिट बनाई। यह यूनिट मुख्य रूप से बाजार में आसानी से मिलने वाले सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल करती है, जिन्हें जरूरत के हिसाब से बदला भी जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में टीटीपी ने क्वाडकॉप्टर ड्रोन चलाने की अपनी क्षमता को भी लगातार बेहतर किया है। ग्लोबल नेटवर्क ऑन एक्सट्रीमिज्म एंड टेक्नोलॉजी की एक रिसर्च के मुताबिक, टीटीपी ड्रोन की उड़ान का समय बढ़ाने के लिए होंडा मोटरसाइकिल की बैटरी का इस्तेमाल कर रहा है।

द डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का दावा है कि उसने 2026 के पहले छह महीनों में खैबर पख्तूनख्वा में 341 ड्रोन हमलों को नाकाम किया। वहीं, करीब 100 अन्य ड्रोन हमलों में लगभग 30 सुरक्षाकर्मियों की मौत और 90 के घायल होने की बात कही गई है। लगातार हो रहे इन हमलों ने पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी रणनीति की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। टीटीपी के बदलते हमले के तरीकों के सामने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। ऐसे में वो मछली पकड़ने वाले जाल जैसे सस्ते तरीको का सहारा लेना पाकिस्तान की मजबूरी को दिखाता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN