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खाड़ी में हूतियों से टेंशन, पाकिस्तान ने सऊदी में बढ़ाई फौजी ताकत; बड़े टकराव की तैयारी?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच पाकिस्तान सऊदी अरब में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम नए मक्का रक्षा समझौते के तहत उठाया जा रहा है, जिसके तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की सामूहिक सुरक्षा के लिए सहमत हैं।

लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत के बाद सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। सऊदी समर्थित यमनी सेना ने हूतियों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। इसी बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी सेना और ज्यादा तैनात करने की तैयारी में है। न्यूज 18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि, इस्लामाबाद नए मक्का रक्षा समझौते के तहत अपनी सेना को बड़े पैमाने पर जुटाने की योजना बना रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सऊदी समर्थित यमनी सेना ने सऊदी हवाई मदद से बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास हूतियों पर बड़ा हमला किया है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सऊदी अरब को और सैन्य मदद देने की तैयारी कर रहा है। इसमें सैनिक और हथियार दोनों शामिल हो सकते हैं, क्योंकि रियाद पर हूती हमले बढ़ रहे हैं। दावा किया गया है कि इस तैनाती में पाकिस्तान की थल सेना, वायु सेना और नौसेना के साथ मिसाइल और रॉकेट क्षमता भी शामिल हो सकती है। कितने सैनिक जाएंगे और उनकी क्या भूमिका होगी, यह अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह फैसला 5 अक्टूबर को रियाद में मक्का रक्षा गठबंधन की आपात बैठक के बाद आया। बैठक में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की शामिल थे। तीनों देश सामूहिक रक्षा वादे को तुरंत लागू करने और सऊदी अरब में तय सैन्य बल जल्दी भेजने पर सहमत हुए। संयुक्त बयान में सैनिकों की संख्या या हथियारों का जिक्र नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना सऊदी इलाके और महत्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा कर सकती है। पाकिस्तानी नौसेना लाल सागर और बाब अल-मंडेब के आसपास सऊदी हितों की रक्षा में शामिल हो सकती है। तोप, रॉकेट, ड्रोन और कम दूरी की मिसाइल क्षमता देने की भी बात कही जा रही है। इस्लामाबाद या रियाद ने इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सूत्रों ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी वायु सेना सऊदी कार्रवाई में मदद कर सकती है। यमन के अंदर हवाई हमलों में पाकिस्तान की सीधी भूमिका अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं बताई गई है। पाकिस्तान का सार्वजनिक रुख अब तक सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा पर रहा है। इस्लामाबाद ने सऊदी इलाके पर हूती हमलों की निंदा की है और रियाद के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है।

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने अगस्त में हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता सामूहिक रक्षा का ढांचा देता है। अब तीनों देश इसे व्यावहारिक सैन्य कदमों में बदलने पर सहमत हो गए हैं। 5 अक्टूबर के बयान में कहा गया कि गठबंधन मौजूदा व्यवस्थाओं और अपने कानूनों के अनुसार सऊदी अरब में तय सैन्य बल और क्षमताएं जल्दी भेजेगा। समझौते में यह भी कहा गया है कि हर सदस्य की सुरक्षा तीनों की साझा सुरक्षा का हिस्सा है।

यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़ा जवाबी हमला शुरू किया है। हमला मुख्य रूप से बाब अल-मंडेब के आसपास के इलाकों पर केंद्रित है। सऊदी अरब ने इस अभियान को भारी हवाई सहायता दी है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि इसमें करीब 100 लड़ाकू विमान शामिल थे। इसी बीच हूती सऊदी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए हैं। इनमें तेल से जुड़ी जगहें और अन्य महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN