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बैंक से शेयर तक, हर जानकारी एक ही जगह… ग्राहकों के लिए RBI का बड़ा ऐलान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • रिजर्व बैंक ने ग्राहकों की सुविधा के लिए समन्वय की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है
  • इसके तहत, अब ग्राहक अपनी पसंद के किसी एक अकाउंट एग्रीगेटर के जरिए अलग-अलग संस्थानों में मौजूद वित्तीय जानकारी को एक जगह देख सकेंगे

अगर आपकी बैंक की जानकारी एक जगह है और निवेश से जुड़ी जानकारी किसी दूसरी जगह, तो दोनों जानकारी देखने या शेयर करने के लिए अलग-अलग अकाउंट एग्रीगेटर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। रिजर्व बैंक ने ग्राहकों की सुविधा के लिए समन्वय की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है।

आसान भाषा में समझें तो अब ग्राहक अपनी पसंद के किसी एक अकाउंट एग्रीगेटर के जरिए अलग-अलग संस्थानों में मौजूद वित्तीय जानकारी को एक जगह देख सकेंगे। ग्राहक की अनुमति से इस जानकारी को शेयर भी किया जा सकेगा। अकाउंट एग्रीगेटर की बात करें तो यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमन के तहत काम करने वाली ऐसी व्यवस्था और मध्यस्थ इकाई है, जो ग्राहक की सहमति से विभिन्न संस्थानों के बीच उसकी वित्तीय जानकारी को सुरक्षित और डिजिटल तरीके से साझा करने की सुविधा देती है।

आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा?

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा, ”ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने के मकसद से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-‘अकाउंट एग्रीगेटर’ के बीच समन्वय की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया गया है।” आरबीआई के बयान के अनुसार, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमन के तहत आने वाली डिपॉजिटरी को एनबीएफसी-अकाउंट एग्रीगेटर के माध्यम से अपने एकीकृत खाता विवरण (सीएएस) में बैंक जमा खातों से जुड़ी जानकारी शामिल करने की सुविधा दी जा रही है।

इसका मतलब है कि अगर आपके पास डीमैट अकाउंट है, तो उसमें रखे शेयर और दूसरी सिक्योरिटीज के साथ बैंक खाते में जमा पैसे की जानकारी भी एक ही स्टेटमेंट में देखना आसान हो सकता है। जरूरत पड़ने पर इस जानकारी को आपकी मंजूरी से संबंधित संस्था के साथ शेयर भी किया जा सकेगा।

कब लागू होगी नई व्यवस्था?

RBI के मुताबिक इन दोनों सुविधाओं का मकसद ग्राहकों के लिए वित्तीय जानकारी को एक जगह देखना और जरूरत के समय आसानी से शेयर करना है। इस व्यवस्था को 31 दिसंबर 2026 तक लागू किए जाने की उम्मीद है। बता दें कि रिजर्व बैंक ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक प्रमुख नीतिगत ब्याज दर रेपो को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल में यह रेपो दर में पहली वृद्धि है। मल्होत्रा के दिसंबर 2024 में गवर्नर का कार्यभार संभालने के बाद रेपो दर में यह पहली वृद्धि है। इससे पहले फरवरी, 2023 में नीतिगत दर में वृद्धि की गयी थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN