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पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने देश में तैयार किए गए फ़तह-4 क्रूज़ मिसाइल के नए और ज़्यादा दूरी तक मार करने वाले वर्ज़न का सफल परीक्षण किया है.
यह एक ‘ग्राउंड लॉन्च्ड क्रूज़ मिसाइल’ है. यानी इसे ज़मीन से दागा जाता है.
पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने एक बयान में कहा कि इस मिसाइल में उड़ान और दिशा तय करने वाली बेहद आधुनिक तकनीक और उपकरण लगाए गए हैं.
आईएसपीआर के मुताबिक़, यह मिसाइल लंबी दूरी पर मौजूद ठिकानों पर बहुत सटीक हमला कर सकती है और भारी तबाही मचा सकती है.
बयान में कहा गया है कि परीक्षण के दौरान मिसाइल में लगाई गई अलग-अलग प्रणालियों की तकनीकी जांच भी की गई.
इन प्रणालियों को मिसाइल की सटीकता और क्षमता बढ़ाने के लिए लगाया गया है.
आईएसपीआर ने बताया कि पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इसे बनाने वाले संस्थान के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने भी यह परीक्षण देखा.
पाकिस्तानी सेना के बयान के मुताबिक़, यह मिसाइल ज़मीन के काफ़ी पास उड़ सकती है.
इस कारण यह दुश्मन की मिसाइल सुरक्षा प्रणाली को चकमा देकर अपने लक्ष्य पर बेहद सटीक हमला कर सकती है.
पाकिस्तान के पास फ़तह सीरीज़ के तीन मिसाइलें यानी फ़तह-1, फ़तह-2 और फ़तह-3 पहले से मौजूद हैं.
इस साल सात मई को आईएसपीआर ने एक वीडियो में फ़तह-3 क्रूज़ मिसाइल को पहली बार दिखाया था. उस समय इसकी तुलना भारत के ब्रह्मोस मिसाइल से की जा रही थी.
टोरंटो स्थित रक्षा ख़बरों और उनके विश्लेषण से जुड़े समूह ‘क़ुवा’ के मुताबिक़, पाकिस्तान ने साल 2021 में पहली बार फ़तह-1 सीरीज़ की मिसाइल का परीक्षण किया था. यह मिसाइल 140 किलोमीटर तक मार कर सकती थी.
साल 2024 में पाकिस्तान ने फ़तह-2 को अपने हथियारों में शामिल किया. यह मिसाइल 400 किलोमीटर तक मार कर सकती है. इसके बाद इस साल मई में फ़तह-3 मिसाइल को पहली बार दुनिया के सामने पेश किया गया.
‘यह ज़मीन से बहुत कम ऊंचाई पर उड़ सकती है’
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पाकिस्तानी वायु सेना के रिटायर्ड एयर कमोडोर ओवैस ख़ान कहते हैं कि पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुई झड़प के बाद पाकिस्तान ने फ़तह सीरीज़ की मिसाइलें बनाने पर ज़्यादा ध्यान दिया है.
उन्होंने बीबीसी न्यूज़ उर्दू से कहा कि फ़तह-4 की नई मिसाइल 330 किलो तक का पारंपरिक पेलोड ले जा सकती है.
उन्होंने कहा कि मिसाइल को दिशा दिखाने वाला सिस्टम तेज़ इलेक्ट्रॉनिक रुकावट के बावजूद अपने आप काम कर सकता है.
इलेक्ट्रॉनिक रुकावट पैदा करके मिसाइल को रास्ता दिखाने वाले सिस्टम को बिगाड़ने की कोशिश को जैमिंग कहा जाता है.
ओवैस ख़ान कहते हैं, “इसकी गति मैक 0.7 यानी 864 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है. यह सबसोनिक मिसाइल है. यानी इसकी गति आवाज़ की रफ़्तार से कम है. यह भी बताया गया है कि इसके निशाने की सटीकता करीब पांच मीटर है. मिसाइल के 750 किलोमीटर तक मार करने का परीक्षण पहले ही किया जा चुका है.”
“ज़्यादा दूरी के लिए भी इसे कम ऊंचाई पर उड़ाकर परीक्षण किए गए हैं. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत दुश्मन की रडार प्रणाली को चकमा देकर अपने लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता है.”
उनका कहना था, “दुश्मन के रडार नेटवर्क से बचने के लिए यह ज़मीन से केवल 50 मीटर ऊपर उड़ सकती है.”
फ़तह-4 का नया वर्ज़न
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रक्षा मामलों के शोधकर्ता बिलाल हुसैन ख़ान के मुताबिक़, पाकिस्तानी सेना के जारी किए गए वीडियो से पता चलता है कि यह फ़तह-4 का नया वर्ज़न है, जिसे फ़तह-4 ईआर कहा जाता है.
उन्होंने बीबीसी न्यूज़ उर्दू से कहा, “फ़तह-4 ईआर आकार में पहले के फ़तह-4 से बड़ा दिखाई देता है.”
आईएसपीआर ने पुष्टि की है कि यह नया वर्ज़न पहले से ज़्यादा दूरी तक मार कर सकता है.
हालांकि, उसने यह नहीं बताया कि इसकी मार करने की दूरी कितनी बढ़ाई गई है.
बिलाल हुसैन कहते हैं, “अपनी हाल की रिपोर्टिंग में हम इस नतीजे पर पहुंचे थे कि पाकिस्तानी सेना ज़्यादा लंबी दूरी तक मार करने वाले क्रूज़ मिसाइल हासिल करने पर काम कर रही है.”
“ख़ास तौर पर ऐसी मिसाइलों पर काम हो रहा है, जो एक हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा दूरी तक मार कर सकें.”
उनके मुताबिक़, “मौजूदा फ़तह-4 की मार करने की दूरी 750 किलोमीटर है. इससे पहले बाबर-1 की दूरी 900 किलोमीटर बताई गई थी.”
“इसलिए फ़तह-4 ईआर असल में कितनी दूरी तक मार कर सकती है, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती.”
“लेकिन मेरे ख़्याल में यह मानना उचित होगा कि इसकी मार करने की दूरी एक हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा हो सकती है.”
उनका कहना है कि इसकी मार करने की दूरी बढ़ाकर 1,200 से 1,500 किलोमीटर करना पाकिस्तानी सेना का अगला संभावित लक्ष्य हो सकता है.
बिलाल हुसैन के मुताबिक़, दूरी बढ़ने के अलावा फ़तह-4 की बनावट में भी कुछ अहम बदलाव दिखाई देते हैं.
वह कहते हैं, “इसके मुड़ने वाले पंखों को मिसाइल के अंदर रखने के बजाय बाहर लगाया गया है.”
“इससे मिसाइल को बनाना पहले के मुक़ाबले आसान हो सकता है और इस पर ख़र्च भी कम आ सकता है.”
“मार करने की दूरी बढ़ाने के लिए मिसाइल का ढांचा भी बड़ा किया गया है, ताकि इसमें ज़्यादा ईंधन रखा जा सके.”
बिलाल हुसैन कहते हैं, “यह एक सबसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी पर मौजूद ज़मीनी ठिकानों पर हमला करने के लिए बनाया गया है.”
“इसकी भूमिका फ़तह-1, फ़तह-2 और फ़तह-3 से अलग है. इसका इस्तेमाल लंबी दूरी तक हमला करने के लिए किया जाएगा.”
भविष्य की लड़ाइयों में क्रूज़ मिसाइलों की क्या भूमिका होगी?
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रक्षा मामलों के जानकार इस ओर भी ध्यान दिलाते हैं कि भारत और पाकिस्तान, दोनों के पास सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल हैं.
ये मिसाइल भविष्य की लड़ाइयों को पिछली लड़ाइयों से बहुत अलग बना सकती हैं. सुपरसोनिक मिसाइल आवाज़ की रफ़्तार से ज़्यादा तेज़ उड़ती हैं.
पाकिस्तानी सेना के पूर्व ब्रिगेडियर और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ डॉक्टर तुग़रल यामीन ने मई में बीबीसी के उमैर सलीमी को बताया था कि क्रूज़ मिसाइल रडार की नज़र से छिपी रह सकती हैं.
लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ ऐसा नहीं होता.
उन्होंने कहा था कि क्रूज़ मिसाइलों की गति सुपरसोनिक होती है, लेकिन उनकी मार करने की दूरी कुछ कम होती है.
यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में चल रही लड़ाइयों का उदाहरण देते हुए वह कहते हैं कि अब युद्ध में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है.
पिछले साल अगस्त में रॉकेट फ़ोर्स बनाए जाने के बाद से पाकिस्तान की सेनाओं ने कई मिसाइलों का परीक्षण किया है.
डॉक्टर तुग़रल यामीन बताते हैं कि रॉकेट फ़ोर्स बनाने का मक़सद पाकिस्तान की रणनीतिक परमाणु मिसाइलों को पारंपरिक मिसाइलों से अलग रखना था.
उनका कहना था, “युद्ध में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक मिसाइलों को इसलिए अलग किया गया, ताकि इनके इस्तेमाल से जुड़े फ़ैसले जल्दी और आसानी से लिए जा सकें.”
सटीक जवाबी हमला
कैनबरा की नेशनल यूनिवर्सिटी में रणनीति और रक्षा मामलों के अध्यापक डॉक्टर मंसूर अहमद ने मई 2025 में बीबीसी न्यूज़ उर्दू की मुनज़्ज़ा अनवार को बताया था कि फ़तह मिसाइल पाकिस्तान की लंबी दूरी तक मार करने वाली रॉकेट तोप प्रणाली में एक नया और आधुनिक हथियार है.
इन मिसाइलों का इस्तेमाल बेहद सटीक जवाबी हमले करने के लिए किया जाता है.
इनके निशाने पर हवाई अड्डे, सैन्य आदेश देने और कार्रवाई को नियंत्रित करने वाले केंद्र, गोला-बारूद रखने की जगहें, सैनिकों तक सामान पहुंचाने वाले रास्ते, दुश्मन के अगले मोर्चे पर मौजूद सप्लाई टैंक और तोपख़ाने हो सकते हैं.
डॉक्टर मंसूर के मुताबिक़, फ़तह सीरीज़ पाकिस्तान की एक बहुत असरदार मिसाइल प्रणाली है.
इसका इस्तेमाल वायु सेना के साथ मिलकर दुश्मन की हमला करने की क्षमता को निशाना बनाने और उसकी सुरक्षा से जुड़े बेहद अहम ठिकानों को बेअसर करने के लिए किया जाता है.
उन्होंने बताया कि इन मिसाइलों की सबसे अहम ख़ासियत यह है कि इन्हें दुश्मन की सुरक्षा प्रणाली की पहुंच से बाहर रहकर दागा जा सकता है.
इसे ‘स्टैंड ऑफ़ रेंज’ कहा जाता है. इन मिसाइल प्रणालियों में ‘शूट एंड स्कूट’ की क्षमता भी होती है. यानी मिसाइल दागने के तुरंत बाद इन्हें दूसरी जगह ले जाया जा सकता है.
इस वजह से ये दुश्मन की जवाबी गोलाबारी से बच सकती हैं. इनकी जगह तुरंत बदल जाने के कारण इन्हें निशाना बनाना या रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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