Home rss business hindi शेयर बाजार फिर भरभराया, ₹7 लाख करोड़ स्वाहा… अब क्यों बिगड़ा निवेशकों...

शेयर बाजार फिर भरभराया, ₹7 लाख करोड़ स्वाहा… अब क्यों बिगड़ा निवेशकों का मूड?

3
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ सामने आए हैं
  • RBI की सख्त नीति, बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। सप्ताह के चौथे दिन गुरुवार को एक बार फिर से शेयर बाजार का सेंसेक्स और निफ्टी इंडेक्स भरभरा गया। दोपहर 12 बजे सेंसेक्स 700 से ज्यादा अंक गिरकर 71,900 के नीचे आ गया जबकि निफ्टी 50 में 200 से अधिक अंकों की गिरावट हुई और यह 22,400 के स्तर से नीचे ट्रेड करने लगा। इस तेज गिरावट के कारण BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से लगभग 7 लाख करोड़ रुपये कम हो गए। मतलब ये कि बाजार खुलने के 3 घंटे से भी कम समय में निवेशकों को करीब 7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। आइए जानते हैं कि आखिर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई है?

RBI के फैसले का असर

शेयर बाजार में गिरावट के कई बड़े कारण हैं। इसमें RBI की सख्त नीति ने निवेशकों की ज्यादा चिंता बढ़ाई है। दरअसल, RBI ने करीब चार साल बाद पहली बार ब्याज दर बढ़ाने के साथ अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। जेफरीज को मौजूदा चक्र में करीब 100 बेसिस पॉइंट तक और बढ़ोतरी की उम्मीद है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल

इसके अलावा, वैश्विक बॉन्ड बिकवाली के कारण अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। US के 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.71% से ऊपर चली गई। बेंचमार्क 10-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.3% से ऊपर पहुंच गई जबकि 2-साल के बॉन्ड की यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से आम तौर पर डेट मार्केट निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं, जिससे इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ता है।

ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार

मिडिल ईस्ट तनाव के कारण एक बार फिर से ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हमले बढ़े हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जोखिम के कारण सप्लाई को लेकर चिंता भी बढ़ी है। महंगा कच्चा तेल, भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों बढ़ा सकता है। इन सभी वजहों से निवेशकों में सतर्कता बढ़ी और शेयर बाजार पर दबाव देखने को मिला।

– NSE के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भी भारतीय शेयरों की बिकवाली जारी रखी और 6,121 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे। बुधवार तक लगातार नौ सेशन में FII ने लगभग 57,000 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं। कुल मिलाकर, सितंबर की शुरुआत से अब तक 25 में से 20 सेशन में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) भारतीय शेयरों के नेट सेलर रहे हैं।

-वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में चिंता है। CME FedWatch के मुताबिक, ट्रेडर्स को इस महीने दर बढ़ने की सिर्फ 18% संभावना दिख रही है, लेकिन दिसंबर में बढ़ोतरी की संभावना करीब 80% आंकी जा रही है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN