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लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम भरना भूले गए? जानें कितने दिन मिलती है मोहलत और दोबारा कैसे करें चालू

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Life Insurance Premium: अगर आप लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम समय पर जमा नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है
  • प्रीमियम की तारीख निकलते ही आपकी पॉलिसी तुरंत बंद नहीं होती
  • इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम जमा करने के लिए कुछ एक्स्ट्रा दिन देती हैं, जिन्हें ग्रेस पीरियड कहा जाता है

Life Insurance Premium: अगर आप लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम समय पर जमा नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। प्रीमियम की तारीख निकलते ही आपकी पॉलिसी तुरंत बंद नहीं होती। इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम जमा करने के लिए कुछ एक्स्ट्रा दिन देती हैं, जिन्हें ग्रेस पीरियड कहा जाता है। लेकिन इस पीरियड में भी पेमेंट नहीं किया, तो आपका इंश्योरेंस कवर बंद हो सकता है या मिलने वाले फायदे कम हो सकते हैं। ऐसे में जानिए प्रीमियम भरने में देरी होने पर क्या होता है और बंद पड़ी पॉलिसी को दोबारा कैसे शुरू करा सकते हैं।

प्रीमियम भरने के लिए कितने दिन मिलते हैं?

भारतीय इंश्योरेंस नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के 2024 के लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट सर्कुलर के अनुसार, प्रीमियम जमा करने के लिए ग्रेस पीरियड मिलता है। आम तौर पर मंथली प्रीमियम के लिए 15 दिन और तिमाही, छमाही या सालाना प्रीमियम के लिए 30 दिन की मोहलत दी जाती है।

उदाहरण के लिए अगर आपकी पॉलिसी का मंथली प्रीमियम 1 अक्टूबर 2026 को जमा होना था, लेकिन किसी वजह से आप पेमेंट नहीं कर पाए, तो आपको ग्रेस पीरियड के तहत एक्स्ट्रा समय मिल सकता है। इस दौरान प्रीमियम जमा करने पर पॉलिसी का कवर जारी रहता है। जरूरत पड़ने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार क्लेम भी किया जा सकता है। इसलिए नौकरी छूटने, पैसों की कमी या किसी दूसरी परेशानी के कारण प्रीमियम भरने में देरी हो जाए, तो सबसे पहले ग्रेस पीरियड की आखिरी तारीख जरूर चेक कर लें।

ग्रेस पीरियड खत्म होने पर क्या होगा?

अगर तय समय के बाद भी प्रीमियम जमा नहीं किया जाता, तो पॉलिसी का स्टेटस बदल जाता है। टर्म इंश्योरेंस जैसी पॉलिसी लैप्स हो सकती है। ऐसी स्थिति में लाइफ इंश्योरेंस का कवर समाप्त हो सकता है। हालांकि, हर पॉलिसी में ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं है। जिन पॉलिसियों में सरेंडर वैल्यू बन चुकी होती है, वह कुछ शर्तों के तहत कम इंश्योरेंस अमाउंट के साथ जारी रह सकती हैं। इसे रिड्यूस्ड पेड-अप पॉलिसी कहा जाता है। इसमें पहले के मुकाबले कम इंश्योरेंस अमाउंट या कम फायदे मिल सकते हैं। ULIP पॉलिसियों के लिए भी अलग नियम होते हैं।

बंद हो गई पॉलिसी तो कैसे करें चालू?

इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क करें – पता करें कि आपकी पॉलिसी को दोबारा चालू कराने की समय सीमा क्या है।

बकाया प्रीमियम भरें – कंपनी की शर्तों के अनुसार बकाया प्रीमियम के साथ ब्याज या एक्स्ट्रा शुल्क देना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दें – इंश्योरेंस कंपनी मेडिकल जांच या स्वास्थ्य से जुड़ी एक्स्ट्रा जानकारी मांग सकती है।

लिखित पुष्टि लें – केवल पैसे जमा करने से पॉलिसी अपने आप चालू नहीं होती। कंपनी से पॉलिसी दोबारा सक्रिय होने की तारीख की लिखित पुष्टि जरूर लें।

प्रीमियम भरने में न करें यह गलती

पॉलिसी लैप्स होने के दौरान आपकी सेहत या नौकरी से जुड़ी परिस्थितियों में बदलाव हुआ है, तो रीवाइवल के समय इसकी सही जानकारी दें। जरूरी जानकारी छिपाने से पॉलिसी दोबारा चालू कराने या भविष्य में क्लेम मिलने में परेशानी हो सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN