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भारत वाले अमेरिका नहीं गए तो USA से काम ही इंडिया आ जाएगा; विनीत नायर को दिखा मौका

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Source :- LIVE HINDUSTAN

एचसीएल टेक्नोलॉजी के पूर्व सीईओ विनीत नायर अमेरिका द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड करने को देश के लिए एक मौका के तौर पर देख रहे हैं।

अमेरिका द्वारा इन्फोसिस, विप्रो, टीसीएस, एचसीएल टेक समेत आठ आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM- Program Electronic Review Management) से सस्पेंड करने के कारण भारतीय पेशेवरों को यूएसए में नौकरी मिलने में आने वाली दिक्कतों को एचसीएल टेक के पूर्व सीईओ विनीत नायर भारत के लिए एक सुनहरे मौके के तौर पर देख रहे हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने अमेरिका में काम करने वाले ऐसे पेशेवरों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ बताया और चार भारतीय समेत कुल आठ कंपनियों को ‘वीजा मिल’ करार दिया। आठ कंपनियों में माइक्रोसॉफ्ट, कॉग्निजेंट, केपजेमनी और एडोबी भी शामिल है, जो यूएसए की कंपनियां हैं। विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में PERM से मंजूरी पहला कदम है।

जेडी वेंस ने कहा कि इन कंपनियों ने अमेरिकी लोगों को नौकरी से निकालकर विदेश से सस्ते स्टाफ रखे। अमेरिकी कंपनियों को पीईआरएम के तहत विदेशी नागरिकों को नौकरी देने के लिए सरकार को बताना पड़ता है कि उस काम के लिए कोई अमेरिकी नागरिक योग्य, इच्छुक या उपलब्ध नहीं है। वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट का नाम लेकर कहा कि इस कंपनी ने 2025 में 6000 अमेरिकी को नौकरी से निकाल दिया, उसी दौरान उसे 6300 H1B वीजा और 3000 ग्रीन कार्ड मिले। अमेरिकी सरकार ने इसी तरह कई नामी यूनिवर्सिटी द्वारा विदेशी रिसर्च स्कॉलरों को बड़े पैमाने पर लाने के कदम को भी निशाने पर लिया है।

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भारत की प्रमुख आईटी टेक फर्म एचसीएल टेक भी अमेरिका सरकार की कार्रवाई का शिकार बनी है। एचसीएल टेक के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने इस मसले पर सोशल साइट एक्स पर अपने पोस्ट में इसे भारत के लिए एक मौका बताते हुए कहा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि भारत के लोग काम करने अमेरिका ना आएं तो इसका अनचाहा असर ये हो सकता है कि अमेरिका से बहुत सारा काम ही भारत आ जाए। पिछले साल PERM के तहत 117849 मंजूर आवेदनों में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी 1400 से भी कम यानी महज 2 फीसदी बताते हुए नायर ने कहा कि फैसले का सीधा असर मामूली होगा। उन्होंने कहा कि अंदर ही अंदर कुछ दिलचस्प हो रहा है।

भारत में अमेरिकी काम का आना तेज हो सकता है: विनीत नायर

नायर ने कहा कि भारत का आईटी मॉडल सरल था। अमेरिका में ग्राहक के पास महत्वपूर्ण काम था, जिसे करने हम भारतीय इंजीनियर वहां भेजते थे। फिर हमें समझ आया कि इसमें बहुत सारा काम भारत से ही हो सकता है, जिससे ऑनसाइट-ऑफशोर मॉडल का जन्म हुआ। नायर का मानना है कि अमेरिका भले वहां भारतीय टैलेंट के आने के रास्ते में बाधाएं पैदा कर रहा है, लेकिन तकनीक ने भारत में छोटी टीम के लिए सलीकेदार काम की जिम्मेदारी लेने को आसान बनाया है। नायर ने कहा कि विडंबना यह है कि भारतीय टैलेंट को अमेरिका आने से रोकने की इस कोशिश से उलटे भारत में अमेरिकी काम आना तेज हो सकता है।

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विनीत नायर ने यह साफ किया कि आर्किटेक्चर, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, साइबर सिक्योरिटी, एआई के इस्तेमाल जैसे सेक्टर में यह काम होंगे। नायर ने आईटी सेक्टर में आने वाली चुनौतियों पर बात रखते हुए कहा कि पिछले 30 साल में भारतीय आईटी सेक्टर और इस सेक्टर में रोजगार दोनों साथ बढ़े हैं, लेकिन एआई इस रिश्ते को बदल देगा। उन्होंने कहा कि 30 साल से भारतीय आईटी सेक्टर इंडियन टैलेंट की कीमत पर सफल रहा, लेकिन अगले 30 साल भारतीय पेशेवरों की क्षमता पर ही निर्भर होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप भले भारतीय इंजीनियर के लिए अमेरिका में काम करना मुश्किल कर दें, यह मौका है अमेरिकी काम को भारतीय इंजीनियर के पास लाने का।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN