Home National news hindi इराक़ में यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ महिलाओं का नया हथियार: कैमरा, वीडियो...

इराक़ में यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ महिलाओं का नया हथियार: कैमरा, वीडियो और सोशल मीडिया

3
0

Source :- BBC INDIA

सारा जासिम कहती हैं कि उनके पोस्ट किए वीडियो उत्पीड़न के सबूत दर्ज करने में मदद करते हैं.

(चेतावनी: इस लेख में यौन हिंसा से जुड़ी जानकारी है.)

‘कार से बाहर निकलो.’

एक महिला ग़ुस्से में चिल्लाई. उसका आरोप था कि जब वह सड़क से गुज़र रही थी, तब कार के ड्राइवर ने उसे अपना निजी अंग दिखाया और अश्लील बातें कहीं.

यह घटना बग़दाद की एक व्यस्त सड़क पर हुई. महिला अपने फ़ोन से इसका वीडियो बना रही थी. वीडियो में दिखा कि महिला कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन ड्राइवर बाहर निकलने से इनकार कर रहा था. महिला वहीं खड़ी होकर उसका सामना कर रही थी.

यह वीडियो और ऐसे ही कई दूसरे वीडियो इराक़ में महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली सारा जासिम के इंस्टाग्राम पेज पर देखे जा सकते हैं.

सारा ये वीडियो उन महिलाओं की ओर से पोस्ट करती हैं, जो इराक़ी पुरुषों और लड़कों पर यौन शोषण और उत्पीड़न के आरोप लगाती हैं.

‘समाज अक्सर पीड़ित महिला को ही दोषी ठहराता है’

जासिम के पोस्ट किए एक वीडियो में एक महिला उस आदमी पर चिल्लाती दिखाई देती है, जिस पर उसने अपना निजी अंग दिखाने का आरोप लगाया. इसके बाद महिला उसकी कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश करती है.

सारा ने बीबीसी से कहा, “आपका कैमरा आपका हथियार है. अगर कोई महिला उसका उत्पीड़न करने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ मुक़दमा करने का फ़ैसला करती है, तो वीडियो सबूत के तौर पर काम कर सकता है. कम से कम यह उस व्यक्ति को शर्मिंदा करने का ज़रिया तो बन सकता है.”

सारा के मुताबिक़, उनके पोस्ट किए गए एक वीडियो के बाद कथित आरोपी को गिरफ़्तार किया गया था. वह एक पुलिसकर्मी था, जिस पर स्कूली लड़कियों के उत्पीड़न का आरोप था.

सारा ने कहा कि इन वीडियो को पोस्ट करना उनके लिए और संबंधित महिलाओं के लिए ख़तरनाक है.

हमने इराक़ में यौन शोषण का सामना करने वाली कई महिलाओं से बात की. उनका कहना था कि समाज अक्सर पीड़ित महिला को ही दोषी ठहराता है.

सारा ने कहा, “मुझे जान से मारने की धमकियां मिली हैं. मुझ पर तेज़ाब से हमला करने की धमकी भी दी गई है.”

“मुझ पर सार्वजनिक रूप से अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाया गया है, क्योंकि मैं ऐसे समाज में महिलाओं को बोलने के लिए कहती हूं, जो हमसे चुप रहने की उम्मीद करता है.”

अपनी सुरक्षा के कारण सारा अब मुश्किल से ही घर से बाहर निकलती हैं. इसके बजाय वह अपने कुत्ते के साथ कई घंटे बिताती हैं.

उनका कहना है कि देश में और सख़्त क़ानूनों की ज़रूरत है. इनमें ऐसे क़ानून भी होने चाहिए, जिनमें ‘उत्पीड़न’ और ‘लैंगिक हिंसा’ को साफ़ तौर पर अपराध माना जाए. फ़िलहाल इराक़ की दंड संहिता में इन शब्दों का ज़िक्र नहीं है.

वह कहती हैं, “समस्या को स्वीकार करना ही उससे निपटने का सबसे अच्छा तरीक़ा है. हमें सुरक्षा चाहिए और शोषण करने वालों को रोकना होगा.”

‘अगर मैं तुम्हें मार दूंगा तो किसी को सुनाई नहीं देगा’

इराक़ की कई महिलाओं ने बीबीसी से कहा कि न्याय व्यवस्था और पुलिस ने उनका साथ नहीं दिया.

हमने जिन कार्यकर्ताओं और वकीलों से बात की, उनके मुताबिक़ इराक़ में उत्पीड़न या बलात्कार के अभियुक्त के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करना एक लंबी प्रक्रिया है. इसकी प्रक्रियाएं मुश्किल हैं और नतीजे को लेकर भी कोई भरोसा नहीं होता.

महिलाओं के साथ भेदभाव के मामलों को देखने वाली संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने मई में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इराक़ में महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा “बड़े पैमाने पर होती है और इसके ज़्यादातर मामले दर्ज नहीं किए जाते.”

समिति ने क़ानूनों को और मज़बूत करने की मांग की थी.

अपनी दर्जनों सिफ़ारिशों में समिति ने अधिकारियों से उन “भेदभावपूर्ण” क़ानूनों को ख़त्म करने को कहा था, जिनके तहत बलात्कार करने वाला व्यक्ति पीड़िता से शादी करके सज़ा से बच सकता है.

समिति ने उन मामलों में हत्या की सज़ा कम करने की इजाज़त देने वाले क़ानूनों को भी ख़त्म करने को कहा था, जिनमें दोषी व्यक्ति तथाकथित “ऑनर किलिंग” के नाम पर हत्या करता है.

‘बेटी के साथ बार-बार बलात्कार किया’

अमल का आरोप है कि उनके पूर्व पति ने उनकी बेटी के साथ बार-बार बलात्कार किया. उस समय उनकी बेटी की उम्र 18 साल से कम थी.

ये कहानी अमल की है. अमल उनका असली नाम नहीं है. वह क़रीब पांच साल से अदालत में लड़ाई लड़ रही हैं.

उनका आरोप है कि उनके पूर्व पति ने बंदूक के दम पर उनकी बेटी के साथ बार-बार बलात्कार किया. उस समय उनकी बेटी की उम्र 18 साल से कम थी.

अमल ने अपनी बेटी की बताई उस डरावनी घटना को याद किया. उनके मुताबिक़, पिता लड़की के कमरे में गया और अपना हथियार उसके बिस्तर पर रख दिया.

उसने लड़की से कहा, ‘अगर मैं तुम्हें मार दूंगा तो किसी को सुनाई नहीं देगा.’

इराक़ में यौन शोषण को लंबे समय से ऐसा विषय माना जाता रहा है, जिस पर बात नहीं की जानी चाहिए.

मैं यौन शोषण का सामना कर चुकी कई महिलाओं के संपर्क में रही हूं. उनका कहना था कि वे अपने साथ हुई घटना को छिपाना बेहतर समझती हैं, क्योंकि उन्हें डर था कि परिवार उनके ख़िलाफ़ हो सकता है.

कुछ महिलाओं ने हमें बताया कि सामाजिक बदनामी और संभावित उत्पीड़न के डर से वे पुलिस के पास नहीं जाना चाहती थीं.

लेकिन अमल ने इंसाफ़ पाने का फ़ैसला किया और घटना की शिकायत करने के लिए तुरंत पुलिस के पास गईं.

अमल ने कहा, ‘उसकी कलाइयों के आसपास चोट के कई निशान थे, क्योंकि उसने उसके हाथ बहुत कसकर पकड़े थे. जब भी वह चीख़ने की कोशिश करती, वह अपने हाथ से उसका मुंह बंद कर देता.’

अमल ने मुझे मेडिकल दस्तावेज़ दिखाए. इनमें डीएनए से जुड़े सबूत भी शामिल थे, जो उनकी बात का समर्थन करते हैं.

अमल के मुताबिक़, उनके पूर्व पति की क्रूरता का एक और उदाहरण तब सामने आया, जब उन्होंने उसे परिवार के एक सदस्य से कहते सुना कि अगर वह गिरफ़्तार हो जाए तो ‘हमारी बदनामी धो देना.’

इराक़ में इस बात का इस्तेमाल तथाकथित ‘ऑनर किलिंग’ के लिए किया जाता है. ऐसी हत्याएं इस सोच के साथ की जाती हैं कि किसी महिला ने परिवार की प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंचाया है.

अमल का मानना है कि पिता ने अपनी बेटी की जान लेने की धमकी दी थी, ‘ताकि मेडिकल रिपोर्ट सामने न आए और हमला साबित न हो सके.’

उनका कहना है कि उनका पूर्व पति फ़रार है और अदालत में मुक़दमा अब भी चल रहा है.

‘मैंने यह पूरी लड़ाई अकेले लड़ी.’

अमल यह बताते हुए रो पड़ीं कि उनके पूर्व पति ने कई वकील रखे, लेकिन उनके पास अपना वकील रखने के लिए पैसे नहीं थे. उनके परिवार ने भी इस स्थिति को नज़रअंदाज़ कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘मैंने यह पूरी लड़ाई अकेले लड़ी.’

अमल को अब भरोसा नहीं है कि अदालत का फ़ैसला उनके पक्ष में आएगा.

उन्होंने मायूसी से सांस लेते हुए कहा, ‘मैं बस चाहती हूं कि वह हमेशा के लिए मेरे रास्ते से दूर रहे.’

महिला अधिकार कार्यकर्ता की हत्या

हना एडवर ने यानार मोहम्मद के साथ अपनी यह तस्वीर साझा की. हना के मुताबिक़, यह तस्वीर यानार की हत्या से केवल दो दिन पहले ली गई थी.

इराक़ में घरेलू यौन शोषण का सामना करने वाली कुछ महिलाओं के मुक़ाबले अमल की बेटी की स्थिति बेहतर है, क्योंकि उसके पास सुरक्षित रहने की जगह है.

यौन शोषण का सामना करने वाली कई महिलाओं की अपनी कोई आमदनी नहीं है और उनके पास जाने के लिए कोई जगह भी नहीं होती.

इराक़ में हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं के लिए बहुत कम आश्रय स्थल हैं.

जिन आश्रय स्थलों के बारे में हमें जानकारी है, उन्हें एक ऐसे संगठन ने बनाया था, जिसकी सह-संस्थापक यानार मोहम्मद थीं. वह महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानी-पहचानी कार्यकर्ता थीं.

पिछले मार्च में हथियारबंद लोगों ने बग़दाद में उनके घर के बाहर उनकी हत्या कर दी थी. हत्या करने वालों के बारे में अब तक पता नहीं चला है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के लिए काम करने वाले विशेषज्ञों ने अप्रैल में लिखा था कि मोहम्मद को कई वर्षों से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं और ऑनलाइन गालियां दी जा रही थीं.

माना जाता था कि ये धमकियां ‘चरमपंथी धार्मिक मिलिशिया’ की ओर से आ रही थीं.

कार्यकर्ताओं ने हमें बार-बार बताया कि हाल के वर्षों में उनके साथियों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमले बढ़े हैं.

महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली एक और प्रमुख कार्यकर्ता हना एडवर ने बताया कि मोहम्मद की हत्या से सिर्फ़ दो दिन पहले उनकी मुलाक़ात उनसे हुई थी.

हना ने कहा कि उन्हें भी धमकियां मिली हैं.

उन्होंने मुझसे कहा, ‘इराक़ में महिलाओं के लिए न क़ानून है, न सुरक्षा और न इंसाफ़.’

इराक़ी ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स के प्रमुख मुस्तफ़ा सादून ने बीबीसी से कहा, ‘इराक़ में समस्या यह नहीं है कि महिलाएं चुप रहती हैं. समस्या यह है कि जब वे बोलती हैं, तो व्यवस्था में उनकी बात सुनने के लिए बहुत कम रास्ते बने हैं.’

‘यौन हिंसा की शिकायत करने वाली महिला को सबसे पहले अपने परिवार से निकलना होता है. इसके बाद उसे पुलिस थाने और फिर अदालत तक जाना पड़ता है. इनमें से हर जगह कोई न कोई उससे यह कह सकता है कि मामले को चुपचाप सुलझा लो.’

‘कार में मेरा पीछा किया गया’

समीरा कहती हैं कि सार्वजनिक परिवहन में उनका उत्पीड़न हुआ और काम पर जाते समय एक व्यक्ति ने कार से उनका पीछा किया.

समीरा भी उन इराक़ी महिलाओं में शामिल हैं, जिन्हें लगता है कि व्यवस्था ने उनका साथ नहीं दिया. समीरा उनका असली नाम नहीं है.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि बार-बार उत्पीड़न का सामना करने के कारण सड़क पर चलते समय भी वह हमेशा डरी और सतर्क रहती हैं.

उन्होंने बताया कि एक बार सार्वजनिक परिवहन में एक व्यक्ति अपने फ़ोन पर अश्लील फ़िल्म देख रहा था और उसने फ़ोन उनके चेहरे के सामने कर दिया.

बग़दाद में हुई एक दूसरी घटना के बारे में समीरा ने बताया कि एक व्यक्ति ने 10 मिनट से ज़्यादा समय तक कार में उनका पीछा किया.

उन्होंने कहा, ‘यह बेहद परेशान करने वाला था. मुझे पुलिस की एक गाड़ी दिखाई दी. मैं उसके पास गई और पुलिसकर्मियों को बताया कि क्या हुआ था. उन्होंने कहा कि उनके पास कुछ करने का अधिकार नहीं है.’

समीरा की मां उनसे बहुत प्यार करती हैं और उनका साथ देती हैं. इसके बावजूद समीरा उन्हें यौन उत्पीड़न की इन घटनाओं के बारे में नहीं बतातीं.

वह कहती हैं, ‘अगर मैं अपने परिवार को बताऊंगी, तो वे मुझे सुरक्षित रखने के लिए तुरंत घर से बाहर नहीं निकलने को कहेंगे.’

समीरा का सरकारी संस्थाओं पर से भरोसा उठ गया है.

वह कहती हैं, ‘पुलिस अधिकारियों समेत कई पुरुषों को यौन उत्पीड़न में कुछ भी ग़लत नहीं लगता. उनके हिसाब से अगर आप उत्पीड़न नहीं करते, तो आप मर्द नहीं हैं.’

इराक़ में जिन महिलाओं से मैंने बात की, उनमें से कई ने पुलिसकर्मियों पर भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मिरी कहते हैं कि “समाज, रीति-रिवाजों और परंपराओं” के कारण यौन हिंसा के कुछ मामलों की शिकायत दर्ज नहीं होती.

मैंने इराक़ के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मुक़दाद मिरी के सामने यह आरोप रखा.

मिरी ने कहा, “पुलिसकर्मियों के उत्पीड़न में शामिल होने के मामले सामने आते हैं, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम हैं. उन्हें बहुत सख़्त सज़ा दी जाती है. इसमें 10 साल तक की जेल हो सकती है और उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया जाता है.”

मैंने उनसे कहा कि कुछ महिलाएं अब सोशल मीडिया पर उत्पीड़न के सबूत इसलिए दर्ज कर रही हैं, क्योंकि वे पुलिस से शिकायत करने से डरती हैं.

उन्होंने कहा कि महिलाएं सोशल मीडिया पर इसलिए पोस्ट करती हैं, क्योंकि यह औपचारिक शिकायत दर्ज कराने से आसान है. किसी मुद्दे की ओर ध्यान खींचने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट करना अब आम तरीक़ा भी बन गया है.

मैंने उनके सामने समीरा का अनुभव भी रखा. समीरा के मुताबिक़, एक पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा था कि उसके पास उत्पीड़न रोकने का अधिकार नहीं है.

मिरी ने कहा कि समीरा उस पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करा सकती थीं.

इराक़ में यौन हिंसा या उत्पीड़न से जुड़े कोई भरोसेमंद आंकड़े मौजूद नहीं हैं.

मिरी ने मुझे बताया कि इस साल की शुरुआत से पुलिस को यौन हिंसा की क़रीब 300 शिकायतें मिली हैं.

हालांकि, उन्होंने माना कि असली संख्या इससे ज़्यादा है.

उन्होंने कहा, “समाज, रीति-रिवाजों और परंपराओं के कारण बहुत से मामले पुलिस तक कभी पहुंचते ही नहीं हैं.”

‘लड़ाई केवल यौन हिंसा के ख़िलाफ़ नहीं’

बीबीसी ने जिन महिलाओं से बात की, उनकी कहानियों से पता चलता है कि उनकी लड़ाई केवल यौन हिंसा के ख़िलाफ़ नहीं है.

वे उस गहरी सोच और उन सामाजिक मान्यताओं से भी लड़ रही हैं, जिनकी वजह से ऐसी हिंसा बनी रहती है.

हना एडवर 50 साल से ज़्यादा समय से महिलाओं के मुद्दों के लिए काम कर रही हैं. लेकिन हालात को लेकर उनका आकलन निराशाजनक है.

उन्होंने कहा, ‘सद्दाम हुसैन की सरकार गिराए जाने के 23 साल बाद ऐसा लगता है कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में हम पीछे जा रहे हैं.’

लेकिन हना और सारा, दोनों ने कहा कि वे हार नहीं मानेंगी.

सारा ने कहा, ‘अगर हम सभी डर जाएंगे तो कोई भी कुछ नहीं बदल पाएगा.’

अतिरिक्त रिपोर्टिंग: सलमा ख़त्ताब.

अगर आप यौन शोषण या हिंसा से जुड़ी किसी समस्या से प्रभावित हुए हैं, तो आप किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ या मदद देने वाले संगठन से बात कर सकते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

SOURCE : BBC NEWS