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हूती हमलों से परेशान सऊदी अरब प्रिंस सलमान, फिर भी नेतन्याहू की मदद लेने से किया इनकार; क्या वजह?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

हूती हमलों से परेशान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस सलमान ने नेतन्याहू की मदद लेने से इनकार कर दिया है। इजरायली अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक तेल अवीव की तरफ से अमेरिका के जरिए सऊदी को मदद की पेशकश की गई थी। हालांकि, सऊदी ने इससे इनकार कर दिया है।

ईरान पर अमेरिकी हमलों के साथ शुरू हुई पश्चिम एशिया की जंग अब सऊदी अरब के लिए भारी पड़ रही है। ईरान के साथ सीधी लड़ाई लेकर हूती विद्रोहियों से उलझ चुका सऊदी अरब इस युद्ध की कीमत अपने शांतिपूर्ण शहरों में धमाकों की आवाजों के साथ चुका रहा है। इसी बीच एक खबर सामने आई है कि इजरायल ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की मदद करने की पेशकश की थी। लेकिन प्रिंस सलमान ने उसे ठुकरा दिया है।

इजरायली अखबार हारेट्ज के मुताबिक, तेल अवीव की तरफ से अमेरिकी मध्यस्थों के जरिए रियाद तक यह प्रस्ताव पहुंचाया गया था। इसमें पीएम नेतन्याहू चाहते थे कि इजरायली सेना भी सऊदी फोर्स के साथ समन्वय करके हूती विद्रोहियों के खिलाफ एयर स्ट्राइक में उनकी मदद करे। हालांकि, सऊदी अरब ने इस प्रस्ताव से इनकार कर दिया है। बता दें, सऊदी अरब ने अभी तक इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं दी है। लेकिन इसके बाद भी दोनों देशों के बीच में अमेरिकी मध्यस्थता में एक सम्मानजनक डिप्लौमैटिक रिश्ते बने रहते हैं।

क्राउन प्रिंस सलमान ने इजरायल की मदद लेने से क्यों किया इनकार?

सऊदी अरब पश्चिम एशिया के उन देशों में शामिल है, जो अमेरिकी सहयोगी होते हुए भी अभी तक इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है। सऊदी अरब में इस्लामिक दुनिया के दो सबसे बड़े तीर्थ स्थल हैं। ऐसे में वह अपने आप को इस्लामिक दुनिया का नेता साबित करने की रेस में रहता है। अगर हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब इजरायल की मदद लेता है, तो इससे उसके इस सपने को एक बड़ा धक्का लग सकता है। इसके अलावा फिलिस्तीन से सहानुभूति रखने वाली सऊदी जनता के मन में भी सत्ता के प्रति विरोध आ सकता है।

सऊदी अरब की मदद को क्यों तैयार हुए नेतन्याहू?

इजरायल शुरुआत से ही पश्चिमी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाता रहा है। अब्राहम अकोर्ड के साथ कई देशों के साथ उसके कूटनीतिक संबंध बने भी हैं। हालांकि, ट्रंप के दबाव के बाद भी सऊदी अरब इससे दूरी बनाकर रखे हुए हैं। इजरायली अखबार के मुताबिक, हूती विद्रोहियों से परेशान सऊदी अरब की मदद करके नेतन्याहू न केवल एक साझा दुश्मन के खिलाफ अभियान चलाना चाहते हैं। बल्कि वह यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध हों।

बता दें, अभी तक न तो इजरायल और न ही सऊदी अरब की तरफ से ऐसे किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा की गई है।

सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले तेज

इस्लामिक जगत के नेतृत्व का दंभ भरने वाले सऊदी अरब के सामने यहूदी देश का यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब रियाद खुद को असहाय महसूस कर रहा है। यमन के हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब के एयरपोर्ट को निशाना बना रहा है। होर्मुज के बंद होने की वजह से परेशान सऊदी अरब की परेशानी उस वक्त बढ़ गई थी जब हूतियों ने बाब अल मंडेब पर भी नियंत्रण करके रियाद की मुश्किलें बढ़ा दी थी। तब से, सऊदी समर्थित यमनी सेनाओं ने लगातार हवाई हमलों के ज़रिए हूतियों को उनके कब्जे वाले कुछ इलाकों से पीछे धकेल दिया है, जिसमें मोखा को वापस हासिल करना भी शामिल है।

हालांकि, हूती पूरे यमन में लड़ते रहे हैं। इससे भी अहम बात यह है कि उन्होंने सऊदी अरब के इलाके में ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए हैं, जिनमें देश भर में आम नागरिकों और तेल उत्पादन से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है।

इन हमलों में सबसे ताजा हमला राजधानी रियाद में किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुआ। शनिवार को हुए इस हमले में एक भारतीय नागरिक समेत कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए। रविवार को हुए एक और हमले में एक और व्यक्ति की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN