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UPI के नए चार्ज पर टेंशन में स्टॉक ब्रोकर, सेबी चेयरमैन ने किया रिएक्ट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • हाल ही में NPCI ने यूपीआई यूजर्स को बड़ी राहत देते हुए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का फैसला टाल दिया
  • इस नए चार्ज को लेकर स्टॉक ब्रोकरों ने चिंता जताई है कि उनका खर्च बढ़ सकता है

UPI पेमेंट पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर बाजार नियामक सेबी (SEBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के बीच बातचीत जारी है। स्टॉक ब्रोकरों ने चिंता जताई है कि नए शुल्क से उनका खर्च बढ़ सकता है। इस पर अब सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे का बयान आया है। गुरुवार को एक कार्यक्रम में सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा, “NPCI ने अभी एक बयान जारी किया है और हम अभी भी उनके साथ बातचीत कर रहे हैं।”

स्टॉक ब्रोकरों की क्या है चिंता?

दरअसल, स्टॉक ब्रोकरों की मुख्य चिंता यह है कि निवेशक जब अपने ट्रेडिंग अकाउंट में UPI के जरिए पैसा डालते हैं, तो जरूरी नहीं कि वे उस रकम से शेयरों की खरीद-बिक्री भी करें। कई बार निवेशक पैसा जमा करके उसे अकाउंट में ही छोड़ देते हैं। ऐसे में ब्रोकर को पेमेंट का शुल्क देना पड़ सकता है जबकि उस रकम से कोई ट्रेड नहीं हुआ और ब्रोकरेज के रूप में कमाई भी नहीं हुई। ब्रोकरों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में MDR उनके कारोबार की लागत बढ़ा सकता है। खासकर उन ब्रोकरों के लिए यह चिंता ज्यादा है, जहां निवेशक बार-बार छोटी-बड़ी रकम ट्रेडिंग अकाउंट में ट्रांसफर करते हैं।

निवेशकों से UPI पेमेंट लेने वाले ब्रोकर्स के लिए ये चार्ज एक बड़ी चुनौती हैं। SEBI नियमों के अनुसार रजिस्टर्ड ब्रोकर्स को वैध UPI हैंडल का इस्तेमाल करना होता है और उन्हें अपनी वेबसाइट पर दिखाना होता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निवेशक केवल वेरिफाइड अकाउंट्स में ही पैसे ट्रांसफर करें। ब्रोकर्स को डर है कि इन ट्रांजैक्शन पर लगने वाला MDR, उनके जरिए किए गए ट्रेड से मिलने वाले ब्रोकरेज रेवेन्यू से भी ज्यादा हो सकता है।

MDR पर टला फैसला

हाल ही में NPCI ने यूपीआई यूजर्स को बड़ी राहत देते हुए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लगाने का फैसला टाल दिया। इसे लागू करने की नई तारीख दिवाली के बाद तय की जाएगी। NPCI की पिछले महीने जारी अधिसूचना के अनुसार 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी (पी2एम) को होने वाले यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क (एमडीआर) लगाया जाना था। एमडीआर का भुगतान ग्राहकों को नहीं बल्कि व्यापारियों को करना होगा। 75,000 रुपये या इससे अधिक के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।

रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क लगाया जाना था। पूंजी बाजार से जुड़े ट्रांजैक्शन (म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग) पर 0.02 प्रतिशत की कम दर लागू होनी थी, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई थी। NPCI के अनुसार, इससे जुटाई गई राशि यूपीआई व्यवस्था से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी। वसूले गए एमडीआर में से 40 प्रतिशत राशि ग्राहकों के बैंकों, 30 प्रतिशत भुगतान ‘गेटवे’, 20 प्रतिशत यूपीआई ऐप और शेष 10 प्रतिशत यूपीआई ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN