Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिकी-भारतीय डॉ. रचना श्रॉफ जिस बीमारी के इलाज के लिए रिसर्च कर रही थीं, उसी ने उनकी जान ले ली। एक साल पहले उन्हें कैंसर का पता चला था लेकिन उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा।
कैंसर को लेकर रिसर्च करने वाली एक भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर रचना श्रॉफ की मौत हो गई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा बेड़ा उठाने वाली डॉक्टर की मौत एक बड़ी क्षति है। वहीं एक गौर करने वाली बात यह भी है कि वह जिस तरह के कैंसर की रिसर्च करती थी, उसी ने उनकी जान ले ली। डॉ. श्रॉफ पैन्क्रियाज और बाइलरी ट्रैक्ट कैंसर के बारे में शोध कर रही थीं। डॉ. श्रॉफ इस तरह के कैंसर का इलाज ढूंढने में लगी थीं।
डॉ. रचना श्रॉफ अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना कैंसर सेंटर की डायरेक्टर थीं। इसके अलावा वह जानी-मानी वैज्ञानिक थीं। अमेरिकी सोसाइटीऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. श्रॉफ को पिछले ही साल कैंसर हो गया था। उनके शरीर में कई जगह सूजन आने लगी। इसके बाद पता चला कि उनकी आंतों में गांठ बन गई है। इसके बाद जांच में कैंसर की पुष्टि हुई।
कैंसर की बात पता चलने के बाद भी उन्होंने अपना काम नही छोड़ा और इस बीमारी से मरीजों को बचाने के लिए दवा ढूंढती रहीं। क्लीनिकल ट्रायल के मामले में उनका कोई जोड़ नहीं था। उन्होंने बाइल डक्ट कैंसर के इलाज के लिए भहुत काम किया। वह पैन्क्रियाज और हीपाटोबिलरी कैंसर के लिए बिल्कुल नए तरीके का इलाज विकसित करना चाहती थीं।
युवा शोधार्थियों को देती थीं पुरस्कार
उनके साथ कई युवा शोधार्थी भी काम कर रही थीं। उनके स्टूडेंट्स का कहना है कि डॉ. श्रॉफ के साथ काम करना एक अलग जिंदगी जीना था जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता था। कैंसर होने के बाद भी डॉ. श्रॉफ जिन संस्थानों से जुड़ी थीं उनकी पूरी मदद कर रही थीं। उन्होंने शोधार्थियों की मदद के लिए एक अवॉर्ड की भी शुरुआत की थी। इसमें शोधार्थी को 13.5 लाख डॉलर दिए जाते थे।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, अगर तुम्हें सूर्य का प्रकाश मिल रहा है तो खुद को भी चमकाने का प्रयास करो ताकि तुमसे अन्य लोगों को भी प्रकाश मिल सके। डॉ. श्रॉफ का एक बेटा सचिन और एक बीटी सिमरन हैं। वह अमेरिका में अपने पति पुनीत श्रॉफ के साथ रहती थीं। उनके पैरंट्स भी अमेरिका में ही रहते हैं।
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