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Accenture बेचेगी चीन का कारोबार? $1.5 अरब तक मिल सकती है कीमत, AI पर बढ़ाएगी फोकस

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Accenture अपने ग्रेटर चाइना कारोबार को बेचने के विकल्प पर विचार कर रही है, जिसकी संभावित कीमत 1.5 अरब डॉलर तक हो सकती है
  • रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने रणनीतिक समीक्षा के लिए JPMorgan को सलाहकार नियुक्त किया है
  • संभावित बिक्री से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल AI सेवाओं के विस्तार किया जा सकता है

दुनिया की बड़ी IT कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल Accenture अपने कारोबार को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ग्रेटर चाइना में अपने बिजनेस को बेचने के विकल्प पर विचार कर रही है। फाइनेंशियल टाइम्स (Financial Times) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कारोबार की संभावित कीमत 1.5 अरब डॉलर तक हो सकती है। हालांकि, अभी बिक्री को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

इस संभावित कदम के पीछे कंपनी की स्ट्रेटजिक प्रियॉर्टीज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ता फोकस अहम माना जा रहा है। Accenture चाहती है कि निवेशकों को यह भरोसा मिले कि वह AI के तेजी से बढ़ते बाजार में नए अवसरों का फायदा उठा सकती है। अगर कंपनी चीन का कारोबार बेचती है, तो उसे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल AI से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करने और नई क्षमताएं हासिल करने में किया जा सकता है।

चीन का कारोबार बेचने पर क्यों विचार कर रही Accenture?

फाइनेंशियल टाइम्स (Financial Times) की रिपोर्ट के अनुसार, Accenture ने अपने ग्रेटर चाइना बिजनेस की स्ट्रेटजी रिव्यू के लिए JPMorgan को सलाहकार नियुक्त किया है। पिछले एक साल के दौरान इस कारोबार में कुछ संभावित खरीदारों ने दिलचस्पी दिखाई थी। इसी के बाद कंपनी बिक्री समेत दूसरे विकल्पों पर विचार कर रही है।

इस संभावित डील में प्राइवेट इक्विटी फर्मों और कुछ रणनीतिक खरीदारों की दिलचस्पी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, Accenture कारोबार की बिक्री के बाद भी इसमें अपनी कुछ हिस्सेदारी बनाए रखने पर विचार कर सकती है, ताकि मौजूदा ग्राहकों को सेवाएं जारी रखने में परेशानी न हो।हालांकि, रणनीतिक समीक्षा का मतलब यह नहीं है कि कंपनी कारोबार बेचने का फैसला कर ही चुकी है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सौदा होगा या नहीं।

चीन में विदेशी कंसल्टिंग कंपनियों के सामने क्या चुनौतियां?

Accenture का ग्रेटर चाइना कारोबार मुख्य भूमि चीन, हांगकांग और ताइवान में फैला है। चीन में डेटा सुरक्षा और संवेदनशील जानकारी को देश की सीमाओं के पार भेजने से जुड़े कड़े नियम विदेशी प्रोफेशनल सर्विस कंपनियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे नियमों के कारण कंपनियों को अपने IT सिस्टम और डेटा मैनेजमेंट की व्यवस्था अलग-अलग रखनी पड़ सकती है। इससे अलग-अलग देशों में मौजूद टीमों और कारोबार के बीच तालमेल बनाना मुश्किल हो सकता है। Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, McKinsey समेत कुछ अन्य कंपनियों ने भी चीन में अपने ऑपरेशन का दायरा घटाया है।

Accenture दुनिया भर के 120 से अधिक बाजारों में काम करती है। कंपनी ने अगस्त में समाप्त हुए वित्त वर्ष में 74.2 अरब डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके एशिया-प्रशांत कारोबार से पिछले साल करीब 10 अरब डॉलर का रेवेन्यू आया था।

AI से Accenture को फायदा होगा या बढ़ेगा दबाव?

Accenture की रणनीति में AI की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। कंपनी का मानना है कि AI को अपने कारोबार में लागू करने मौजूदा सिस्टम से जोड़ने और कर्मचारियों के कामकाज में इस्तेमाल करने के लिए कंपनियों को बाहरी एक्सपर्ट की जरूरत होगी। इससे AI कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी सेवाओं की मांग बढ़ सकती है।

दूसरी ओर निवेशकों के सामने एक अलग सवाल भी है। अगर AI कंपनियों को कम समय और कम लागत में काम करने में मदद करता है, तो वे कुछ ऐसे काम खुद करने लग सकती हैं, जिन्हें पहले बाहरी कंसल्टिंग या आउटसोर्सिंग कंपनियों को दिया जाता था। इससे पारंपरिक IT सेवाओं के कारोबार पर दबाव पड़ने की आशंका है। फाइनेंशियल टाइम्स (Financial Times) के मुताबिक, निवेशकों के एक कार्यक्रम में Accenture ने संकेत दिया कि अगले दो सालों तक रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रह सकती है। कंपनी को दशक के अंत की ओर AI सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ कारोबार की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कंपनी के लॉन्ग-टर्म आउटलुक और बेहतर नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। जून के निचले स्तर से उसके शेयरों में करीब 85% की तेजी आई थी। हालांकि, शेयरों का पिछला प्रदर्शन भविष्य में रिटर्न की गारंटी नहीं देता।

चीन बिजनेस बेचकर AI में निवेश बढ़ा सकती है कंपनी

अगर Accenture अपने चीन कारोबार की बिक्री करती है, तो इससे मिलने वाली रकम कंपनी की पूंजी रणनीति का हिस्सा बन सकती है। कंपनी AI से जुड़ी सेवाओं का विस्तार करने और ऐसी तकनीकी क्षमताएं हासिल करने के लिए अधिग्रहण कर सकती है, जो उसे प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाएं। कंपनी अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं में भी AI का इस्तेमाल कर रही है। इससे होने वाली संभावित बचत का कुछ हिस्सा ग्राहकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सेवाएं देने और नई तकनीकी क्षमताओं में निवेश करने पर खर्च किया जा सकता है।

इसके अलावा Accenture ने कर्ज को सीमित रखने और शेयर बायबैक तथा डिविडेंड के जरिए शेयरधारकों को पैसा लौटाने की प्रतिबद्धता भी जताई है। कंपनी की CFO Angie Park ने निवेशकों के कार्यक्रम में संकेत दिया कि रणनीति और रिटर्न से जुड़े मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले कारोबार, सेवाओं, देशों या कॉन्ट्रैक्ट से बाहर निकलना कंपनी की पूंजी प्रबंधन रणनीति का हिस्सा रहा है।

निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह संभावित सौदा?

Accenture के चीन कारोबार की संभावित बिक्री सिर्फ एक कारोबारी सौदा नहीं है। यह दिखाती है कि बड़ी IT कंपनियां AI के दौर में अपने निवेश और संसाधनों को कहां लगाना चाहती हैं। एक तरफ कंपनियों को AI सेवाओं से नए रेवेन्यू की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ उन्हें यह भी देखना पड़ रहा है कि तकनीक उनके पुराने बिजनेस मॉडल को किस तरह बदल सकती है।

फिलहाल, Accenture की चीन यूनिट की बिक्री पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आने वाले समय में खरीदारों की दिलचस्पी, संभावित डील की कीमत और कंपनी की AI रणनीति से जुड़े फैसले इस मामले की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ, AI से मिलने वाले नए ऑर्डर और रेगुलर कंसल्टिंग कारोबार के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN