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इस्लामिक नाटो के बाद बद्र समझौता! पाक समेत 4 मुस्लिम देशों की चौकड़ी से भारत पर क्या पड़ेगा असर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तान, कतर, तुर्की और इंडोनेशिया ने बुधवार को रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए’बद्र समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता चारों देशों के बीच हथियार और रक्षा उपकरण बनाने, सैन्य प्रशिक्षण देने और शोध व विकास के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।

मक्का पैक्ट के कुछ महीनों बाद पाकिस्तान, कतर, तुर्की और इंडोनेशिया ने एक नया रक्षा समझौता ‘बद्र’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह समझौता मक्का पैक्ट से अलग है। मक्का पैक्ट में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब शामिल थे और उसका फोकस आपसी रक्षा और हमले को साझा खतरा मानने पर था। जबकि नया ‘बद्र’ समझौता मुख्य रूप से हथियार बनाने, सैन्य प्रशिक्षण और तकनीक के विकास पर केंद्रित है। समझौते पर कतर में हस्ताक्षर हुए। पाकिस्तान की ओर से रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दस्तखत किए। तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर, कतर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुलरहमान तथा इंडोनेशिया के उप रक्षा मंत्री यूसुफ जौहरी भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने भी हस्ताक्षर किए। तुर्की के रक्षा उद्योग सचिवालय के प्रमुख हलुक गोरगुन भी समारोह में शामिल हुए।

क्या है बद्र समझौता?

तुर्की के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ‘बद्र’ समझौते का मुख्य मकसद चारों देशों की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाना और आपसी सहयोग को मजबूत करना है। मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इसमें रक्षा उत्पादन में साझेदारी, सैन्य क्षमताओं का विस्तार और तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण, शोध तथा विकास के क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि हर देश की अपनी खास रक्षा उत्पादन क्षमता का फायदा उठाया जाएगा। इससे सहयोग और एकीकरण आसान होगा, रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ेगी और सहयोगी देशों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

तुर्की के रक्षा उद्योग सचिवालय के प्रमुख हलुक गोरगुन ने कहा कि यह समझौता साझा उत्पादन और तकनीक विकास के लिए ‘रणनीतिक सहयोग’ की नींव रखता है। उन्होंने कहा कि तकनीक साझा करना, साथ मिलकर विकास करना और अपने देश में उत्पादन क्षमता को मजबूत करना स्थायी रक्षा उद्योग की रीढ़ है। तुर्की के तौर पर हम ऐसी साझेदारियों को महत्व देते हैं जो सिर्फ सामान खरीदने से आगे बढ़कर देश के अपने लोगों और उद्योग की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दें। गोरगुन ने आगे कहा कि ‘बद्र’ समझौता ज्ञापन कतर, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और तुर्की को एक-दूसरे की क्षमताओं को ठोस परियोजनाओं में बदलने में मदद करेगा।

मक्का पैक्ट से अलग है यह समझौता

बता दें कि यह समझौता कुछ महीने पहले हुए ‘मक्का पैक्ट’ से अलग है। मक्का पैक्ट में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब शामिल हैं। उस समझौते के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। कतर ने मक्का पैक्ट का स्वागत किया था और कहा था कि इसका मकसद क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है। पाकिस्तान के इन तीनों देशों के साथ लंबे और मजबूत रिश्ते हैं।

खासकर हाल के महीनों में कतर और तुर्की के साथ कूटनीतिक बातचीत काफी बढ़ी है। पाकिस्तान और तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के साथ मिलकर ‘रीजनल फोर’ (R4) समूह के सदस्य हैं। यह समूह मार्च में बना था और तब से कई बार बैठकें हो चुकी हैं। इस्लामाबाद और दोहा अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान बिचौलिये की भूमिका भी निभा रहे हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में गृह मंत्री मोहसिन नकवी दोहा गए थे और उन्होंने कतर के अपने समकक्ष से मुलाकात की। दोनों पक्ष आंतरिक सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN