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इन फोन में नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram; सरकार ला रही सख्त नियम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर आप भी बिना सिम डाले ही फोन में WhatsApp, Telegram चला रहे हैं, तो आपके लिए बड़ी समस्या खड़ी होने वाली है। सरकार का सिम बाइंडिंग नियम 1 जनवरी से लागू होने वाला है, जिसके तहत ऐसे ऐप चलाने के लिए फोन में फिजिकल सिम कार्ड डालना अनिवार्य हो जाएगा।

अगर आप रजिस्टर्ड नंबर से अलग-अलग फोन में WhatsApp या फिर Telegram चला रहे हैं, तो यह खबर खास आपके लिए है। जल्द आप बिना सिम कार्ड डाले फोन में वॉट्सऐप समेत अन्य सर्विसेस इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, क्योंकि सरकार इस सुविधा पर लगाम लगाने वाली है। भारत सरकार का SIM binding नियम 1 जनवरी से लागू होने वाला है। नए नियम के तहत, वॉट्सऐप और टेलीग्राम चलाने के लिए यूजर्स को अपने फोन में रजिस्टर्ड सिम कार्ड अनिवार्य रूप से डालना होगा, ताकि वे इन मैसेजिंग सर्विसेस का इस्तेमाल जारी रख सकें। दरअसल, सरकार फेक सिम कार्ड और सिम क्लोनिंग से होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए यह नियम ला रही है।

ऐसे फोन में नहीं चलेगा वॉट्सऐप और टेलीग्राम

ये नियम मोबाइल नंबर और उससे जुड़े अकाउंट के बीच का कनेक्शन और मजबूत करने के लिए हैं, ताकि जालसाजों के लिए मैसेजिंग सर्विसेस का गलत इस्तेमाल या फ्रॉड करना मुश्किल हो जाए। यह नियम लागू होने के बाद, ऐसे लोगों को दिक्कत हो सकती है, जो फोन में रजिस्टर्ड सिम नहीं डालते है, बल्कि वाई-फाई के जरिए फोन में वॉट्सऐस, टेलीग्राम चला रहे हैं। नया नियम आईफोन और एंड्रॉयड दोनों तरह के फोन्स पर लागू होगा।

इंडियाटूडे की रिपोर्ट के अनुसार, ऐप्पल ने कथित तौर पर आईओएस में सिम बाइंडिंग को सपोर्ट करने के लिए बदलाव किए हैं। कंपनी ने सितंबर में एक सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया गया था, जो यह पता लगाने में मदद करता है कि आईफोन में सिम कार्ड है या नहीं।

चलिए डिटेल में जानते हैं कि सरकार सिम बाइंडिंग नियम क्यों ला रही है और इसका फायदा क्या होगा

सिम बाइंडिंग नियम, यूजर्स को ऑनलाइन होने वाली धोखाधड़ी से सुरक्षित रखेगा। इस नियम के तहत, आपके बैंकिंग, UPI और मैसेजिंग ऐप्स (जैसे WhatsApp, Telegram) को आपके फोन में मौजूद एक्टिव सिम कार्ड और डिवाइस से डिजिटल रूप से बाइंड कर दिया जाएगा। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपका डिजिटल अकाउंट केवल उसी स्मार्टफोन में चले, जिसमें आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड फिजिकली लगा हो।

यह कैसे काम करता है?

– कंटीन्यूअस वेरिफिकेशन: पहले केवल एक बार OTP डालकर ऐप चालू हो जाता था और सिम निकालने के बाद भी ऐप चलता रहता था। सिम बाइंडिंग के तहत ऐप बैकग्राउंड में यह चेक करता रहता है कि रजिस्टर्ड सिम फोन में एक्टिव है या नहीं।

– सिम निकालते ही सर्विस बंद: यदि यूजर अपने फोन से सिम कार्ड निकाल लेता है या किसी कारणवश सिम बंद हो जाती है, तो संबंधित ऐप तुरंत काम करना बंद कर देंगे।

– सिंगल डिवाइस लॉक: एक मोबाइल नंबर से जुड़ा ऐप एक समय में केवल उसी फोन पर चलेगा जिसमें वह सिम लगी होगी।

सिम बाइंडिंग नियम कहां-कहां लागू होगा?

बैंकिंग और UPI ऐप्स: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI के नियमों के तहत PhonePe, Google Pay, Paytm और बैंकिंग ऐप्स (जैसे SBI YONO) में सिम बाइंडिंग पहले से लागू है।

मैसेजिंग ऐप्स (WhatsApp, Telegram आदि): दूरसंचार विभाग (DoT) के नए दिशानिर्देशों के तहत मैसेजिंग ऐप्स के लिए भी सिम बाइंडिंग अनिवार्य की जा रही है। इसके तहत वेब या डेस्कटॉप वर्जन का इस्तेमाल करने पर भी समय-समय पर ऑटो-लॉगआउट और री-वेरिफिकेशन की आवश्यकता होती है।

यह नियम क्यों लाया गया?

साइबर फ्रॉड और ‘डिजिटल अरेस्ट’ से सुरक्षा: ठग और स्कैमर्स किसी से भी OTP लेकर दूसरे डिवाइस में उसके नाम से वॉट्सऐप या अन्य सर्विस नहीं चला पाएंगे। सिम बाइंडिंग से यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है।

सिम स्वैपिंग और क्लोनिंग पर लगाम: यदि कोई आपके नंबर का फर्जी सिम भी बनवा लेता है, तो भी वह आपके रजिस्टर्ड फोन (डिवाइस ID) के बिना आपके ऐप्स एक्सेस नहीं कर पाएगा।

डेटा और पैसों की सुरक्षा: पासवर्ड या OTP लीक होने पर भी कोई दूसरा व्यक्ति आपके अकाउंट का दुरुपयोग नहीं कर पाएगा, जब तक कि आपकी फिजिकल सिम और डिवाइस उसके पास न हो।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN