Home National news hindi राहुल पर पीएम मोदी के लगातार हमले लेकिन नेहा बोरा-दीपके पर चुप्पी...

राहुल पर पीएम मोदी के लगातार हमले लेकिन नेहा बोरा-दीपके पर चुप्पी के क्या मायने हैं

4
0

Source :- BBC INDIA

राहुल गांधी (बाएं) और नरेंद्र मोदी (दाएं)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ कहा है.

एक निजी चैनल के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने राहुल गांधी के साथ-साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा, “पार्टी के नेता की साल भर में जितनी बार लॉन्चिंग होती है, उतनी श्रीहरिकोटा से भी नहीं होती.”

नरेंद्र मोदी ने ये भी कहा कि जब दुनिया ‘नई व्यवस्था’ की तलाश कर रही है, तब कुछ लोग ‘अव्यवस्था’ का सपना देख रहे हैं और भारत की वैश्विक छवि को ख़राब करना चाहते हैं.

गुरुवार को ही गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी पर तंज कसा. उन्होंने नई दिल्ली में यमुना से जुड़ी योजनाओं का उद्घाटन करते हुए राहुल गांधी के विदेश दौरों पर तंज़ करते हुए कहा, “मैं जनता के बीच रहता हूं, इसलिए हर छह माह में मुझे विदेश नहीं जाना पड़ता.”

नरेंद्र मोदी और अमित शाह का एक ही दिन यानी गुरुवार को राहुल गांधी पर ये ‘डबल अटैक’ था. इस डबल अटैक की पृष्ठभूमि में कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर हाल ही में हुआ प्रोटेस्ट है.

लेकिन इस साल हुए दो प्रमुख प्रोटेस्ट का चेहरा अभिजीत दीपके और नेहा बोरा भी रहे हैं.

ऐसे में ये सवाल अहम है कि मोदी और शाह सिर्फ़ राहुल गांधी को ही निशाना क्यों बना रहे हैं? क्या ये उनकी ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ मुहिम का हिस्सा है और क्या इन बयानों के ज़रिए भारतीय डायस्पोरा (प्रवासी समुदाय) को भी कोई संकेत दिया जा रहा है?

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी लगातार राहुल गांधी पर आरोप लगाती रही है कि वो विदेश में भारत की छवि ख़राब कर रहे हैं.

पीएम मोदी ने राहुल गांधी को 'नाकाम नेता' बताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को एक निजी टीवी के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे.

उन्होंने इस कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा, “पता नहीं कांग्रेस कब तक अपने फेल्ड प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी. कांग्रेस का ये परिवार उनकी पार्टी के लिए बोझ बन चुका है. कांग्रेस को लाइमलाइट में सिर्फ़ एक नेता को रखना है और ऐसा करके कांग्रेस अपने युवा सांसदों के साथ अन्याय कर रही है.”

अपने इस संबोधन में नरेंद्र मोदी ने ये भी जताने की कोशिश की कि उनकी सरकार किसी तरह के आंदोलन के ख़िलाफ़ नहीं है.

मोदी ने कहा, “कांग्रेस के चलते सरकार के ईमानदार आलोचकों का भी नुकसान हो रहा है. ये लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. जो लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, उनकी बात भी कांग्रेस के शोर में दब जा रही है. कांग्रेस वो परजीवी बन गई है, जो किसी और को आगे नहीं बढ़ने देना चाहती. कांग्रेस पर दिमागी नक्सल का दबदबा है. पहले ये लोग जंगल का विनाश करते थे, अब देश का सर्वनाश कर रहे हैं.”

अमित शाह का भी राहुल और कांग्रेस पर हमला

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस 'वोट चोरी' का बहाना बनाती है

गुरुवार को ही गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, “बीजेपी की सरकार लगातार चुनकर आ रही है, तो इन लोगों के पेट में दर्द हो रहा है. ये लोग वोट चोरी का बहाना बनाकर घुसपैठियों का वोट बचाना चाहते हैं. ये लोग कभी ईवीएम तो कभी वोट चोरी का बहाना बनाते हैं, लेकिन अगले 30 साल तक हमारी सरकार बनेगी.”

अमित शाह ने केरल, तेलंगाना, हिमाचल और तमिलनाडु का ज़िक्र करते हुए कहा, “जहां कांग्रेस या उसके सहयोग से सरकार बन जाती है, वहां चुनाव आयोग अच्छा हो जाता है, लेकिन जहां हार जाते हैं, वहां आयोग ख़राब हो जाता है. ये लोग आस-पास के प्रदेशों से कैडर इकट्ठा करके जनता के जनादेश को झुठला नहीं सकते.”

राहुल पर निशाना लेकिन बाक़ी युवा नेताओं पर चुप क्यों?

नेहा बोरा और अभिजीत दीपके जैसे युवा नेता पीएम मोदी पर खुलकर हमला करते रहे हैं लेकिन नरेंद्र मोदी ने अब तक इनकी आलोचना से परहेज़ किया है

नरेंद्र मोदी और अमित शाह आख़िर हाल के दिनों में हुए आंदोलनों को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर इतने हमलावर क्यों हैं? और मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ राहुल गांधी जितने ही मुखर अभिजीत दीपके, नेहा बोरा और दूसरे युवा नेताओं पर क्यों चुप हैं.

इस सवाल के जवाब अलग-अलग विश्लेषकों से राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष होने से लेकर जेन-ज़ी की हाल के दिनों में दिखाई गई एकजुट ताकत तक में मिलते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार सबा नकवी बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं, “राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, वो चुनावी राजनीति में हैं. जबकि अभिजीत दीपके अभी सिर्फ़ एक इंफ्लुएंसर जैसी भूमिका में हैं. उन्होंने कहा है कि वो अभी चुनाव नहीं लड़ेंगे. नेहा की बात करें, तो उनका जुड़ाव एक पॉलिटिकल पार्टी से है, लेकिन वो स्टूडेंट पॉलिटिक्स में हैं.”

‘जेन-ज़ी की नाराज़गी मोल नहीं लेना चाहती सरकार’

वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी भी कहते हैं, “ज़ाहिर तौर पर राहुल गांधी नरेंद्र मोदी के पॉलिटिकल राइवल हैं, सीजेपी या नेहा नहीं. इसलिए राजनीतिक ताकत में इज़ाफ़ा या कमी अपने पॉलिटिकल राइवल पर निशाना साधकर ही होगी. अभिजीत दीपके और नेहा पर चुप रहकर बीजेपी किसी भी तरह के नुकसान से बचना चाहती है.”

विजय कहते हैं, “अभी जेन-ज़ी का माहौल है. जेन-ज़ी के साथ विवाद में गए, तो हो सकता है कि भविष्य में वैचारिक स्तर पर सीजेपी कांग्रेस के ज़्यादा करीब आ सकती है. बीजेपी अभी सीजेपी को उसके हनीमून पीरियड में ही ख़ुश रखना चाहती है, जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े से शुरू हुआ है. नेहा बोरा पर हमला करके सरकार जेन-ज़ी की नाराज़गी मोल नहीं लेगी.”

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

SOURCE : BBC NEWS