Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- आठवें वेतन आयोग की एक और बैठक पूरी हो गई है
- अब तक की ज्यादातर बैठकों में फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता (DA), महंगाई राहत (DR) और बेसिक सैलरी के मामले में सार्थक सुधार की मांग की गई है
8th Pay Commission latest: आठवें वेतन आयोग की एक और बैठक पूरी हो गई है। बीते 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में कर्मचारी संगठनों के साथ वेतन आयोग की बैठक थी। इससे पहले, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले वेतन आयोग ने दिल्ली, लद्दाख, कोलकाता और बेंगलुरु सहित कई प्रमुख राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें की हैं। अब तक की ज्यादातर बैठकों में फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता (DA), महंगाई राहत (DR) और बेसिक सैलरी के मामले में सार्थक सुधार की मांग की गई है। कुछ कर्मचारी यूनियन मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इन बदलावों में एक निश्चित महंगाई स्तर पर DA को बेसिक सैलरी में मर्जर और भत्ते की गणना के फॉर्मूले में संशोधन करना शामिल है। आइए पिछले कुछ वेतन आयोग के पैटर्न को देख लेते हैं।
5वें, 6वें और 7वें वेतन आयोग में क्या हुआ था?
5वें वेतन आयोग ने सिफारिश की थी कि जब भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बेस इंडेक्स से 50% बढ़ जाए, तो DA को ‘डियरनेस पे में बदल दिया जाए। इस ‘डियरनेस पे’ को रिटायरमेंट बेनिफिट्स सहित सभी उद्देश्यों के लिए गिना जाना था। आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि सभी वेतन स्तरों के कर्मचारियों के लिए DA के माध्यम से महंगाई की 100% भरपाई की जानी चाहिए।
वहीं, 6वें वेतन आयोग ने किसी भी स्तर पर DA को बेसिक सैलरीमें मिलाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। आयोग ने तर्क दिया कि संशोधित वेतन ढांचे में पहले से ही कीमतों में बदलाव के आधार पर भत्तों और लाभों में समय-समय पर बदलाव करने की व्यवस्था मौजूद है। इसके साथ ही वेतन आयोग ने DA की समीक्षा को हर तीन महीने के बजाय साल में दो बार करने की मौजूदा व्यवस्था को ही बनाए रखा।
7वें वेतन आयोग की बात करें तो DA की गणना करने के मौजूदा तरीके को ही जारी रखा। आयोग का मानना था कि यह फॉर्मूला पिछले कई वर्षों से काफी प्रभावी रहा है। इसलिए, इसने पूरी कार्यप्रणाली और गणना के तरीके में कोई बड़ा या बुनियादी बदलाव करने की सिफारिश नहीं की।
8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद?
फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स’ (FNPO) ने मांग की है कि जब DA 25% से अधिक हो जाए तो इसे बेसिक सैलरी में मिला दिया जाना चाहिए। वहीं, भारत पेंशनर्स समाज ने मांग की है कि DA और पेंशनभोगियों के लिए मिलने वाले महंगाई राहत (DR) की समीक्षा साल में दो बार के बजाय हर तीन महीने में होनी चाहिए। यह भी सुझाव दिया है कि एक निश्चित सीमा पार करने के बाद DR को बेसिक पेंशन में मिला दिया जाना चाहिए। यह सुझाव भी है कि ‘ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स’ (AICPI-IW) की गणना के तरीके का बारीकी से विश्लेषण और समीक्षा की जानी चाहिए। अब वेतन आयोग को इस पर फैसला लेना है।
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