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शरद पूर्णिमा पर खीर रखने से लेकर मेडिटेशन तक, जानें सदियों पुरानी ये खास परंपराएं

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इस बार 25 अक्टूबर यानी आज शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है। इस दिन सालों से कुछ परंपराएं फॉलो की जा रही हैं, जो मानसिक और शारीरिक हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद साबित होती हैं। यहां हम ऐसी ही कुछ परंपराओं के बारे में बता रहे हैं। जानिए-

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक जरूरी पर्व है। यह त्योहार शरद ऋतु के आगमन, पूर्ण चंद्रमा की मनमोहक चांदनी, माता लक्ष्मी की पूजा और भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से जुड़ा है। इस दिन सालों से कुछ परंपराएं निभाई जा रही हैं, जिन्हें सेहत और मेंटल हेल्थ से जोड़ा जाता है। यहां हम 3 परंपराओं के बारे में बता रहे हैं जो सदियों पुरानी हैं। जानिए, इन परंपराओं के बारे में और इन्हें कैसे फॉलो किया जा सकता है।

चांद की रौशनी में खीर रखना

शरद पूर्णिमा की रात को चांद की रौशनी में खीर रखी जाती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार शरद ऋतु में शरीर में ‘पित्त दोष’ स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। ऐसे में माना जाता है कि चंद्रमा की ठंडक और चांदी के गुण इस गर्मी को शांत करते हैं, शरीर में संतुलन लाते हैं और मन को नई एनर्जी देते हैं। इस तरह यह खीर केवल खाना नहीं रह जाती, बल्कि एक औषधि बन जाती है, जो मन को शांति, शरीर को शक्ति और आध्यात्मिक सामंजस्य देती है। इस परंपरा को फॉलो करने के लिए दूध और चावल से साधारण खीर बनाएं। फिर इसे चांदी के बर्तन में रखें, अगर चांदी का बर्तन न हो, तो उसमें चांदी का चम्मच रख दें। अब इसे पूरी रात खुले आसमान के नीचे, पूर्णिमा के चंद्रमा की रोशनी में रखें। अगली सुबह इसे प्रसाद के रूप में खाएं। चींटियों से बचाने के लिए, खीर वाले बर्तन को पानी से भरे एक दूसरे बर्तन के ऊपर रखें।

पूर्णिमा की रात को मेडिटेशन

शरद पूर्णिमा की रात को ध्यान करने की परंपरा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक साधना से जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि इस रात मन को शांत करने, आत्मचिंतन करने के लिए खास माना जाता है। पूर्णिमा की शांत रात में ध्यान करने से आप अपनी सांसों, विचारों और भावनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इससे तनाव कम करने और मानसिक शांति पाने में मदद मिल सकती है। चांदनी रात में मेडिटेशन करने के लिए खुले आंगन, छत या खिड़की के पास आराम से बैठें। आंखें बंद करके धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें। सांस को जबरदस्ती रोकें नहीं। मन में शांति और कृतज्ञता का भाव रखें। ध्यान करते समय विचार आएं तो उन्हें बिना उलझे जाने दें।

मून वाटर बनाना

पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। आध्यात्मिक मान्यताओं में इस रात को एनर्जी, भावनात्मक संतुलन और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है। इसलिए लोग पूर्णिमा की चांदनी में पानी रखकर उसे मून वाटर बनाते हैं। इसे बनाने के लिए सबसे पहले कांच के जार या बोतल को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। फिर कांच की बोतल लें और उसमें पानी भर लें। अब जार को दोनों हाथों में पकड़ें, आंखें बंद करें और सोचें कि आप इस पानी में कौन सी एनर्जी चाहते हैं। फिर इस बोतल को रात भर चांदनी में रखा रहने दें। सुबह इस पानी को पिएं।

डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN