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EPS: न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर इस दिन आएगा फैसला? अभी हर महीने मिलते हैं सिर्फ ₹1,000

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) एक पेंशन योजना है, जिसे EPFO के जरिए चलाया जाता है
  • इस योजना का मकसद ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन देना है
  • इसके तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 8.33% हिस्सा नियोक्ता यानी कंपनी की तरफ से पेंशन फंड में जमा किया जाता है

EPS Pension Hike: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के पेंशनधारकों के लिए एक अहम खबर है। लंबे समय से कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन बढ़ाने की मांग की जा रही है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि EPFO की अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 नवंबर 2026 को गुजरात के गिर में EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की 240वीं बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि इस बैठक में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। हालांकि, पेंशन बढ़ाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

क्या है EPS पेंशन योजना?

एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) एक पेंशन योजना है, जिसे EPFO के जरिए चलाया जाता है। इस योजना का मकसद ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन देना है। इसके तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 8.33% हिस्सा नियोक्ता यानी कंपनी की तरफ से पेंशन फंड में जमा किया जाता है। हालांकि, यह योगदान अधिकतम 25,000 रुपये की वेतन सीमा के आधार पर तय होता है। इस हिसाब से हर महीने अधिकतम 2,083 रुपये EPS फंड में जमा होते हैं।

अभी कितनी है न्यूनतम पेंशन?

फिलहाल EPS के तहत पेंशनधारकों को हर महीने कम से कम 1,000 रुपये पेंशन मिलती है। अगर किसी कर्मचारी की नौकरी और वेतन के हिसाब से पेंशन की रकम 1,000 रुपये से कम बनती है, तो सरकार बाकी रकम देकर इसे 1,000 रुपये तक पहुंचाती है। यानी फिलहाल एलिजिबल पेंशनधारकों को न्यूनतम 1,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है। पेंशन कितनी बनेगी, यह कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी और नौकरी के कुल सालों पर निर्भर करता है।

क्या है EPS पेंशन का कैलकुलशन

EPS के तहत पेंशन निकालने का एक तय फॉर्मूला है। इसमें कर्मचारी की पेंशन योग्य औसत सैलरी और कुल पेंशन योग्य नौकरी के सालों को ध्यान में रखा जाता है। ये है पेंशन का फॉर्मूला:

मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य सैलरी × नौकरी के साल) ÷ 70

यहां पेंशन योग्य सैलरी का मतलब नौकरी छोड़ने से पहले के आखिरी 60 महीनों की औसत मासिक सैलरी से है।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी 25,000 रुपये है और उसने 30 साल नौकरी की है, तो फॉर्मूले के हिसाब से उसकी मासिक पेंशन करीब 10,714 रुपये बनेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN