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इंडोनेशिया में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और देश की कई अन्य प्रमुख हस्तियों की अवैध फोन टैपिंग करने के मामले में तीन वरिष्ठ पुलिस जनरलों को हिरासत में लिया गया है। इंडोनेशियाई पुलिस ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। राष्ट्रीय पुलिस की आपराधिक जांच एजेंसी के प्रमुख असेप सफरुद्दीन ने बताया कि तीनों अधिकारियों पर बिना अनुमति संचार माध्यमों को इंटरसेप्ट करने, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाने और डिजिटल डेटा मिटाने के आरोप हैं।
पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए अधिकारियों में राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल लिस्त्यो सिगित प्रबोवो, राष्ट्रीय पुलिस के कानूनी विभाग के प्रमुख इंस्पेक्टर जनरल अहरी सोंटा नसुशन और राष्ट्रीय पुलिस के शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के वरिष्ठ प्रशिक्षक इंस्पेक्टर जनरल एको हादी संतुसो शामिल हैं। तीनों को राष्ट्रीय पुलिस मुख्यालय के हिरासत केंद्र में रखा गया है।
सफरुद्दीन ने जकार्ता स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपियों ने राष्ट्रपति, सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं, मीडिया हस्तियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, एनजीओ कार्यकर्ताओं और कारोबारियों के फोन नंबरों की अवैध निगरानी की।
2025 से 2026 के बीच हुई जासूसी
पुलिस का आरोप है कि अनधिकृत फोन टैपिंग की गतिविधियां 2025 से 2026 के बीच हुईं। इसके लिए 2010 के राष्ट्रीय पुलिस नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। जांचकर्ताओं के मुताबिक, कई फोन नंबरों को बिना उचित सत्यापन के लॉफुल इंटरसेप्शन मैनेजमेंट सिस्टम (LIMS) में दर्ज किया गया था। आरोप है कि हाल ही में आरोपियों ने इस सिस्टम से इंटरसेप्ट की गई बातचीत से जुड़ी फाइलें भी हटाने के आदेश दिए, ताकि कथित गतिविधियों के सबूत मिटाए जा सकें। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अब तक 10 गवाहों और तीन विशेषज्ञों से पूछताछ की है। साथ ही 11 मोबाइल फोन, एक आईपैड और चार पेन ड्राइव भी जब्त की हैं।
राजद्रोह का सबूत नहीं मिला
इंडोनेशिया के कानून, मानवाधिकार, आव्रजन और सुधार मंत्री युसरिल इहजा महेंद्र ने कहा कि जांच में फिलहाल तीनों सक्रिय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ राजद्रोह का कोई संकेत नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि आरोपियों पर इंडोनेशिया की नई आपराधिक संहिता की धारा 258 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। यह धारा निजी इलेक्ट्रॉनिक संचार को गैर-कानूनी तरीके से इंटरसेप्ट करने, रिकॉर्ड करने, बदलने या निगरानी करने से संबंधित है। इसके तहत अधिकतम 10 साल की जेल हो सकती है। इसके अलावा, आरोपियों पर आपराधिक संहिता की धारा 332 और इलेक्ट्रॉनिक सूचना एवं लेन-देन कानून की धारा 32 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। इन धाराओं में क्रमशः छह और आठ साल तक की सजा का प्रावधान है। बता दें कि हाल ही में इंडोनेशिया में महज 24 घंटे के भीतर कई बड़े भूकंप आए थे।
(इनपुट- AP)
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