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अमेरिकी जनता ने ट्रंप को वादा तोड़ने की दी सजा, मिडटर्म हार की तीन सबसे बड़ी वजहें

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। उनकी पार्टी सीनेट और हाउस में बहुमत खो चुकी है। ट्रंप ने ईरान युद्ध को इस हार की वजह के रूप में स्वीकार किया है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस युद्ध से पीछे नहीं हटेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप… पिछले दो साल से वह पूरी दुनिया को लगभग अपने हिसाब से चला रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिका के साथी रहे देश आज ट्रंप प्रशासन को शंका की नजर से देख रहे हैं, दूसरी तरफ दुश्मन देश दूर से अमेरिका की पल-पल बदलती विदेश नीति का मुआयना कर रहे हैं। इन सब बातों के केंद्र में हैं, डोनाल्ड ट्रंप… वही डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से दोबारा सत्ता को हासिल किया था। लेकिन जेडी वेंस की मानें, तो दो साल के अंदर ही ट्रंप वह खास समर्थक भी उनसे दूर हो गए, जिन्होंने उन्हें वाइट हाउस पहुंचाने में मदद की थी। आलम यह रहा कि ट्रंप अब राष्ट्रपति हैं, लेकिन सीनेट और हाउस में उनकी पार्टी बहुमत खो चुकी है।

विशेषज्ञों की मानें, तो मिडटर्म चुनाव में हार के पीछे ट्रंप के वो वादे रहे, जिन्हें जनता के सामने रखकर वह सत्ता में आए थे। बाइडेन से परेशान और ट्रंप की बातों से उत्साहित जनता डोनाल्ड ट्रंप के पीछे लामबंद हो गई। ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान एक के बाद एक कई वादे कर दिए। इसमें यूक्रेन युद्ध को खत्म करवाना, महंगाई को कम करना, विदेशी युद्धों से अमेरिका को दूर रखना और अमेरिका-मेक्सिको सीमा की पर व्यवस्था ठीक करना। लेकिन सत्ता में आते ही ट्रंप के यह वादे हवा साबित होने लगे। तमाम कोशिशों और दबाव के बाद भी वह यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने में असफल रहे। इसके अलावा वेनेजुएला में अभियान से उत्साहित ट्रंप ने पश्चिम एशिया को भी सीधे युद्ध में झोंक दिया।

अफगानिस्तान से सेना निकालने का क्रेडिट लेने वाले ट्रंप ने अमेरिकी सेना को इस बार ईरान के साथ युद्ध में उलझा दिया। ईरान का युद्ध एक ऐसा युद्ध है, जिसमें अमेरिका की स्थिति ‘सांप और छछूंदर’ जैसी हो गई है। ट्रंप प्रशासन न तो इसे निगल पा रहा है और न ही उगल पा रहा है।

इसी तरह से कई अन्य वजह भी रहीं, जिन्होंने सुनिश्चित किया कि ट्रंप के पास सत्ता की चाबी तो रहे, लेकिन सीनेट में वह ताकतवर न रहें। आइए जानते हैं मिडटर्म चुनाव में ट्रंप के हारने की मुख्य वजह…

1. ईरान में फंस गए डोनाल्ड ट्रंप, विदेशी युद्ध का वादा तोड़ा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब फरवरी में ईरान पर हमला किया था, तो उस वक्त उनका मानना था कि यह युद्ध कुछ हफ्तों या कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा। लेकिन अनुमान गलत साबित हुआ। वेनेजुएला से उत्साहित ट्रंप ने ईरान पर हमला तो बोल दिया, लेकिन वहां सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ। उल्टा ईरान मजबूत होकर सामने आया और अब होर्मुज पर भी ईरान का कब्जा है। होर्मुज अब केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक कांटा बन गया है। अमेरिका की इस लड़ाई का असर पूरी दुनिया झेल रही है।

ट्रंप भले ही इसे ईरान के तथाकथित परमाणु हथियार से जोड़कर बता रहे हैं, लेकिन विदेशी युद्ध से दूर रखने के जिस वादे पर ट्रंप चुनकर आए थे। वह इस युद्ध की वजह से टूट गया। समर्थक पूछ रहे हैं कि आखिर ईरान का अमेरिका से सीधा क्या बिगाड़ हो रहा था। यह इजरायल का युद्ध था, लेकिन अमेरिका इसमें सीधा कूद गया।

2. टैरिफ से बढ़ी महंगाई, ईरान युद्ध ने लगाए ‘चार चांद’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बाइडेन प्रशासन के दौरान लागतार अर्थव्यवस्था को गर्त में धकेलने के आरोप लगा रहे थे। उनका कहना था कि उनके सत्ता में आने पर महंगाई कम होगी और अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। लेकिन 2024 में सत्ता में आने के बाद दूसरे देशों से आने वाले सामानों पर प्रतिबंध लगाना चालू कर दिया। सामान्य तरीके से देखें, तो यह टैरिफ ट्रंप ने सामने वाले देश को सजा देने के लिए लगाया। लेकिन इसका सीधा असर अमेरिकी जनता की जेब पर पड़ा। क्योंकि एक बार सामान आ जाने के बाद उन्होंने ही इसकी कीमत चुकाई।

ट्रंप का तर्क था कि टैरिफ से अमेरिकी उद्योगों को सुरक्षा मिलेगी, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी सरकारों को बेहतर व्यापार शर्तें देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, वहीं इस नीति से अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ने का जोखिम भी पैदा हो गया।

ट्रंप के इन फैसलों से अमेरिका में मंहगाई बढ़ गई। रही सही कसर होर्मुज बंद होने की वजह से बढ़ती डीजल की कीमतों ने पूरी कर दी। लगातार जेब पर पड़ते बोझ ने उन मतदाताओं को प्रभावित किया, जिन्होंने महंगाई से राहत पाने की उम्मीद में ट्रंप को वोट दिया था।

3. स्थानीय स्तर पर जनता से सीधा टकराव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आने के बाद अप्रवासी नागरिकों से खासे खफा नजर आए। उन्होंने इमिग्रेशन के मुद्दे पर कई बड़े अभियान चलाए। इसका सीधा असर आम जनता के ऊपर पड़ा। इमिग्रेशन के अलावा, प्रशासन को विभिन्न संस्थाओं के साथ टकराव, कार्यकारी शक्तियों के इस्तेमाल और अधिकारियों के बर्ताव को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा है। इन विवादों ने ऐसी धारणा को और मजबूत किया है कि व्हाइट हाउस आम लोगों की रोजमर्रा की चिंताओं को सुलझाने के बजाय राजनीतिक लड़ाइयों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। जो मतदाता ट्रम्प को आम अमेरिकियों के समर्थक के रूप में देखते थे, उनके लिए घरेलू राजनीतिक टकरावों पर बढ़ता फोकस ट्रम्प के प्रति उनके आकर्षण को और कमजोर कर सकता है।

इसके अलावा भी ट्रंप प्रशासन ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने आम अमेरिकी नागरिकों को ट्रंप से दूरी बढ़ाने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, अमेरिकी संविधान के मुताबिक ट्रंप भले ही अभी अपने आखिरी कार्यकाल में हों, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी अपना भविष्य तलाश कर रही है। जेडी वेंस ने साफ तौर पर इस हार के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार ठहराया है और अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी इसे स्वीकार किया है। ट्रंप प्रशासन और रिपब्लिकन पार्टी के तरीके में इस हार के बाद एक बदलाव दिखना स्वाभाविक है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN