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शशि थरूर ने कहा कि जो लोग इस बात की उम्मीद लगाए बैठे थे कि अमेरिका में मध्यावधि चुनाव हारने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों में बदलाव होगा, उन्हें खुश होने की जरूरत नहींहै। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों की ताकत अब भी ट्रंप के ही पास है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले ही कई जानकार भविष्यवाणी कर रहे थे कि अगर डोनाल्ड ट्रंप की हार होती है तो उनके भारत के प्रति रवैये में भी बड़ा बदलाव आएगा। अब कि जब डोनाल ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की मध्यावधि चुनावों में करारी हार हुई है तो कांग्रेस सांसदशशि थरूर का कहना है कि इसका भारत पर बहुत ही सीमित प्रभाव पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव परिणाम से अमेरिका का टैरिफ, प्रतिबंधों और युद्धों को लेकर कोई रवैया नहीं बदलने वाला है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों पर डोनाल्ड ट्रंप भारी
उन्होंने कहा, बात चाहे रूस से तेल खरीदने की हो या फिर टैरिफ की, इस चुनाव से इसपर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि वित्तीय मांमलों में कांग्रेस की बड़ी भूमिका होती है। कांग्रेस चाहे तो बजट का आवंटन रोक सकती है। हालांकि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को लेकर राष्ट्रपति के पास ज्यादा शक्ति होती है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप को रोकने वाला कोई नहीं है। वह जो चाहेंगे वही करेंगे।
थरूर ने कहा अगर किसी देश से युद्ध करने या हमला करने की बात होती है तो अमेरिका के राष्ट्रपति के पास विशेष शक्तियां होती हैं। 60 दिनों तक बिना कांग्रेस की अनुमति के भी युद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में जिन लोगों को उम्मीद है कि मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को लगे झटके के बाद दोनों देशों के संबंधों में कोई सकारात्मक बदलाव होगा, वे गलती कर रहे हैं। उन्होंने यह जरूर कहा कि मध्यवधि चुनाव सत्ताधारी और विरोधी पार्टी दोनों के लिए जरूरी होते हैं। थरूर ने कहा कि भारत को टैरिफ, रूस से तेल खरीद और व्यापार को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत जारी रकनी चाहिए।
क्या होते हैं मिडटर्म इलेक्शन
अमेरिका में राष्ट्रपति के कार्यकाल केबीच होने वाले चुनाव को मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है। अकसर इन चुनावों में सत्ताधारी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है। इन चुनावों के जरिए जनता सरकार के प्रति अपनी नाराजगी भी जाहिर कर देती है। इसके बाद सत्ताधारी दल को जनता के हिसाब से अपना कोर्स करेक्शन करना होता है। इस चुनाव में डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा के साथ सीनेट में भी बहुमत हासिल किया है। टेक्सास में जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को करारी हार दी है।
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