Source :- LIVE HINDUSTAN
लोगों को ठगने के लिए और उनसे पैसे ऐंठने के लिए धोखेबाजों ने अब नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की नकली वेबसाइट बना ली है। अगर आप किसी साइबर क्राइम की रिपोर्ट करने जा रहे हैं, तो सावधान रहिएगा, वरना जरा सी गलती भी भारी पड़ सकती है।
ऑनलाइन धोखाधड़ी का ग्राफ दिनोंदिन तेजी से बढ़ता जा रहा है। ठग भी अब एडवांस हो गए हैं और लोगों को जाल में फंसाने के लिए नए-नए तरीके तलाश रहे हैं। अब फोन, लैपटॉप अनब्लॉक कराने के नाम पर लोगों से पैसे लूटे जा रहे हैं। खुद सरकार ने इस बारे में चेतावनी दी है। गृह मंत्रालय के तहत आने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने चेतावनी जारी की है कि स्कैमर्स ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ के नकली वर्जन बना रहे हैं और लोगों को धोखा देकर उनसे पैसे या संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह मामला काफी गंभीर है और कई लोग डर के कारण पैसे दे देते हैं। चलिए डिटेल में बताते हैं सबकुछ…
धोखेबाजों ने बनाई नकली वेबसाइट
हैकर्स के निशाने पर खासतौर से ऐसे लोग होते हैं जो साइबर क्राइम की रिपोर्ट करने की जल्दी में होते हैं। दरअसल, धोखेबाजों ने लोगों को फंसाने के लिए नकली वेबसाइट्स बना ली हैं जो बिल्कुल सरकारी पोर्टल जैसी दिखती हैं। एक बार जब आप वहां पहुंचते हैं, तो वे आपसे फीस भरने या अपनी निजी जानकारी डालने के लिए कहते हैं, अक्सर वे दावा करते हैं कि “सुरक्षा कारणों” से आपका फोन या कंप्यूटर ब्लॉक हो गया है। ये फिशिंग साइट्स पेमेंट के विकल्प दिखाती हैं और आपके डिवाइस को ‘अनब्लॉक’ करने के लिए पेमेंट करने को कहती हैं।
सरकार का सुझाव
सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कभी भी आपसे अपना डिवाइस अनलॉक करने के लिए पैसे नहीं मांगेगी, खासकर किसी पॉप-अप, अनजान वेबसाइट या संदिग्ध लिंक के जरिए। अगर आपको ऐसा कोई मैसेज मिलता है, तो घबराएं नहीं। स्कैमर्स लोगों को डरा-धमकाकर उनसे जल्दबाजी में फैसले करवाते हैं।
लोगों को ऐसे शिकार बना रहे ठग
इसकी शुरुआत अक्सर एक साधारण गूगल सर्च से होती है, जैसे “Cyber Crime Portal” या “Report Cyber Fraud” सर्च करना। धोखेबाज मिलते-जुलते नामों और लेआउट वाली नकली वेबसाइट्स बना लेते हैं, जिससे आप गलत लिंक पर क्लिक कर देते हैं। इसके बाद, वे आपसे पेमेंट, बैंक की जानकारी या दूसरी संवेदनशील जानकारी मांगने लगते हैं। इस तरह आप फाइनेंशियल फ्रॉड या आइडेंटिटी थेफ्ट (पहचान की चोरी) का शिकार बन जाते हैं।
I4C ने इन स्कैम से बचने के लिए कुछ तरीके बताए हैं:
– हमेशा अपने ब्राउजर में सीधे ‘cybercrime.gov.in’ टाइप करें। सर्च रिजल्ट पर भरोसा न करें।
– ऐसे किसी भी मैसेज पर ध्यान न दें जिसमें कहा गया हो कि आपका डिवाइस ब्लॉक हो गया है और पेमेंट की मांग की जा रही हो।
– सरकारी सर्विसेस के नाम पर पैसे मांगने वाले पॉप-अप या लिंक पर कभी भरोसा न करें।
– अपनी जानकारी डालने से पहले वेबसाइट के एड्रेस को अच्छी तरह से चेक कर लें।
– किसी भी संदिग्ध वेबसाइट की रिपोर्ट असली साइबर क्राइम पोर्टल पर मौजूद ‘Check & Report’ फीचर के जरिए करें।
अगर कुछ भी गड़बड़ लगे, तो तुरंत रिपोर्ट करें!
अगर आपको धोखाधड़ी का शक हो, तो तुरंत कार्रवाई करें। इसकी रिपोर्ट फौरन करें। नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। आप जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, चोरों को रोकने और अपने पैसे वापस पाने की संभावना उतनी ही बेहतर होगी।
हम सभी जानते हैं कि स्कैमर्स रुक नहीं रहे हैं। वे लगातार ऐसे चालाक फिशिंग तरीके ईजाद करते रहते हैं जो देखने में असली या ऑफिशियल लगते हैं। इसलिए हर समय सतर्क रहने में ही फायदा है। सुरक्षित रहने के लिए हमेशा सीधे ऑफिशियल वेबसाइट पर ही जाएं। पैसे की मांग होने पर कोई पेमेंट न करें और अपनी फाइनेंशियल डिटेल्स से जुड़ी पर्सनल जानकारी डालने से पहले वेब एड्रेस (स्पेलिंग वगैरह) को अच्छी तरह जांच लें। इन सेफ्टी टिप्स का खुद भी ध्यान रखें और अपनों को भी बताएं, ताकि वे भी जानरूक रहें।
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