Source :- LIVE HINDUSTAN
अगर आप वेब ब्राउजिंग के लिए Google Chrome का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। Gemini अब आपके कई सारे काम खुद संभाल लेगा। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि गूगल ने भारत में Chrome में Gemini के विस्तार की घोषणा की है। इस कदम के तहत, कंपनी अपना AI ब्राउजिंग असिस्टेंट Android यूजर्स के लिए ला रही है। गूगल का कहना है कि Chrome में Gemini लंबे वेबपेजों की समरी बना सकता है, कंटेंट से जुड़े सवालों के जवाब दे सकता है, गूगल ऐप्स के साथ काम कर सकता है और Nano Banana का इस्तेमाल करके इमेज बना सकता है और एडिट भी कर सकता है। इसके अलावा, गूगल का एजेंटिक फीचर ‘Auto Browse’ भी डेस्कटॉप और Android दोनों पर रोलआउट किया जा रहा है। चलिए डिटेल में जानते हैं कैसे काम करेगा नया ऑटो ब्राउज फीचर…
भारत में अब क्रोम में आया जेमिनी
गैजेट्स360 की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि Chrome में Gemini अब भारत के सभी Android यूजर्स के लिए उपलब्ध है। यह AI असिस्टेंट ब्राउजर के अंदर काम करता है और यूजर्स को वेबपेज के साथ इंटरैक्ट करने की सुविधा देता है। कंपनी के अनुसार, इससे यूजर्स को अपना मौजूदा टैब छोड़ने या कई ऐप्स के बीच स्विच करने की जरूरत नहीं पड़ती।
इतने सारे काम आसानी से कर देगा नया फीचर
कहा जा रहा है कि यह फीचर लंबे आर्टिकल्स की समरी बनाने और स्क्रीन पर मौजूद वेबपेज से जुड़े सवालों के जवाब देने में सक्षम है। यह Google की Keep और Calendar जैसी सर्विसेस से भी जुड़ सकता है। इसमें गूगल के AI इमेज जनरेशन और एडिटिंग मॉडल, ‘Nano Banana’ का इन-बिल्ट एक्सेस भी मिलता है। इस फीचर की मदद से, यूजर्स ब्राउजिंग के दौरान इमेज को कस्टमाइज या जेनरेट कर सकते हैं।
लेकिन शायद सबसे खास नया फीचर ‘ऑटो ब्राउज’ है। यह Chrome में Gemini का ज्यादा एक्टिव वर्जन है। यह फीचर जनवरी में कुछ चुनिंदा ग्लोबल मार्केट में लॉन्च किया गया था, लेकिन भारत में यह उपलब्ध नहीं था। अब यह बदल रहा है। भारत में, ऑटो ब्राउज डेस्कटॉप और एंड्रॉयड दोनों पर उपलब्ध है, हालांकि इसका एक्सेस सिर्फ Google AI Pro और Google AI Ultra सब्सक्राइबर्स के लिए ही है।
फॉर्म भरेगा, सामान ऑर्डर करेगा Auto Browse फीचर
गूगल का कहना है कि ‘ऑटो ब्राउज’ सिर्फ वेबपेज से जुड़े सवालों के जवाब देने के बजाय, वेब पर कई स्टेप्स वाले कुछ काम भी कर सकता है। उदाहरण के लिए, यूजर्स इससे किसी इवेंट के लिए पार्किंग बुक करने, कोई लंबा फॉर्म भरने या किराने का सामान ऑर्डर करने जैसे काम करवा सकते हैं।
ऑटो ब्राउज के संवेदनशील कामों को संभालने के तरीके पर कुछ पाबंदियां हैं। कंपनी के अनुसार, इसके जेमिनी मॉडल को ‘प्रॉम्प्ट इंजेक्शन’ जैसे जाने-पहचाने खतरों की पहचान करने के लिए ट्रेन किया गया है; यह एक ऐसी तकनीक है जिससे वेबपेज पर मौजूद कंटेंट के जरिए AI एजेंट को मैनिपुलेट करने की कोशिश की जा सकती है। कहा जाता है कि ऑटो ब्राउज में कुछ संवेदनशील काम करने से पहले यूजर्स से कन्फर्मेशन मांगने की क्षमता भी है।
एक और कमी भाषाओं की उपलब्धता से जुड़ी है। एंड्रॉयड पर क्रोम में Gemini शुरू में US English और UK English में उपलब्ध है। कंपनी का प्लान है कि समय के साथ इसमें और भाषाओं का सपोर्ट जोड़ा जाए। तुलना के तौर पर देखें तो, इसके डेस्कटॉप वर्जन में आठ भारतीय भाषाओं का सपोर्ट मिलता है, जिनमें हिंदी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तेलुगु और तमिल शामिल हैं।
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