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EMI बाउंस का असर: क्रेडिट स्कोर से पेनाल्टी तक कितना होता है नुकसान?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सैलरी लेट में क्रेडिट होना, खाते में पैसे कम होना या कोई टेक्निकल दिक्कत हुई तो आपका EMI का पेमेंट फेल हो जाता है। इससे कर्ज लेने वाले को सिर्फ लेंडर की पेनल्टी ही नहीं झेलनी पड़ती बल्कि बाउंस हुई EMI आपका क्रेडिट स्कोर भी गिरा सकती है, क्योंकि मिस या देरी से हुए पेमेंट की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को दी जाती है, लेकिन यह जानकारी कब रिपोर्ट होगी और क्या आपको गलती सुधारने के लिए ग्रेस पीरियड मिलेगा, यह लागू नियमों पर निर्भर करता है। यह प्रावधान उन मामलों में काम आ सकता है जहां ऑटो-डेबिट बैंकिंग पोर्टल की तरफ से हुई टेक्निकल गड़बड़ी या गलती से फेल हुआ हो।

EMI बाउंस क्या होता है?

EMI बाउंस तब होता है, जब लेंडर आपके बैंक खाते से तय EMI को ऑटो-डेबिट करने की कोशिश करता है, लेकिन वह फेल हो जाती है। इसमें खाते में पैसे कम होना आम वजह है, लेकिन ट्रांजैक्शन एक्सपायर्ड या गलत तरीके से लिंक किए गए NACH/ECS मैंडेट की वजह से भी फेल हो सकता है, या फिर किसी टेक्निकल दिक्कत से।

जब तय EMI का पेमेंट नहीं हो पाता, तो कर्ज लेने वाले को बाउंस चार्ज के साथ-साथ और भी खर्चे झेलने पड़ सकते हैं। हालांकि यह हर लेंडर और लोन के टाइप के हिसाब से अलग होता है।

AU Small Finance Bank के एक ब्लॉग पोस्ट में बताया गया है कि पर्सनल लोन में ये चार्जेज आम तौर पर हर फेल पेमेंट पर 300 से 1,200 रुपये तक हो सकते हैं, जबकि कुछ प्राइवेट लेंडर और NBFC ज्यादा चार्ज कर सकते हैं या ओवरड्यू अमाउंट के हिसाब से फीस तय कर सकते हैं।

क्या आपको ग्रेस पीरियड मिलता है?

RBI की 2023 की पेनल चार्जेज से जुड़ी गाइडलाइंस के मुताबिक, बैंकों और दूसरे लेंडर्स को कर्ज लेने वाले को ग्रेस पीरियड के बारे में बताना जरूरी है। यह आम तौर पर करीब सात दिन का होता है। यह ग्रेस पीरियड मिस्ड EMI की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को देने से पहले मिलता है।

ब्लॉग के मुताबिक, इससे उन्हें स्थिति सुधारने और अपना क्रेडिट स्कोर ठीक रखने का थोड़ा मौका मिल जाता है, लेकिन यह सूचना सिर्फ तब मिलती है, जब आप पहली बार पेमेंट चूकते हैं।

उसके बाद लेट-पेमेंट इंटरेस्ट और पेनल्टी चार्जेज बढ़ने लगते हैं, और लेंडर आपको ज्यादा बार कॉल करके पेमेंट मांगने लग सकता है। अगर आप बार-बार पेमेंट की डेडलाइन मिस करते हैं, तो लेंडर आपके अकाउंट को हाई-रिस्क मान सकता है और मामला कलेक्शन एजेंसी तक भेज सकता है।

गंभीर मामलों में, जैसे बड़ी लोन पेमेंट के केस में, लेंडर के पास निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू करने या डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल के जरिए वसूली करने का विकल्प भी होता है। केंद्रीय बैंक सख्ती से कहता है कि पेनल चार्जेज तय हद में हों, लोन एग्रीमेंट में साफ-साफ बताए गए हों, और लेंडर के लिए सिर्फ कमाई का जरिया न बनें।

EMI बाउंस आपका क्रेडिट स्कोर कैसे गिरा सकता है

अगर आपकी बाउंस EMI की जानकारी CIBIL जैसे क्रेडिट ब्यूरो को दी जाती है, तो आपका क्रेडिट स्कोर करीब 30 से 100 पॉइंट तक गिर सकता है। लेकिन इसका असर कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे आपकी पुरानी क्रेडिट हिस्ट्री, आपकी रीपेमेंट आदतें और लेंडर देरी की जानकारी कैसे रिपोर्ट करता है।

क्योंकि, क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल्स में पेमेंट हिस्ट्री का सबसे ज्यादा वेटेज होता है,करीब 35%। इसलिए एक बार की रिपोर्ट हुई बाउंस भी बड़ा असर डालती है। यह रिकॉर्ड आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर कई सालों तक दिख सकता है। ब्लॉग में यह बताते हुए कहा गया कि पेमेंट डिफॉल्ट के गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN