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IRDAI ने ‘धुरंधर’ ही नहीं, इस ‘छोटकू’ की भी लगाई लंका, शेयर 2 दिन में 38% तक लुढ़के

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीय बीमा नियामक IRDAI ने बीमा वितरण की कमाई के पूरे ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव क्या दिया, बड़ी-बड़ी बीमा कंपनियों के शेयर जमीन पर आ गए। IRDAI के प्रस्तावों की सबसे अधिक मार PB Fintech के अलावा एक और स्मॉलकैप शेयर झेल रहा है। 24 सितंबर को 20% के लोअर सर्किट पर फिसलने के बाद 25 सितंबर को Turtlemint के शेयर में एक और 20% की गिरावट आई। इस तरह दो दिन की कुल गिरावट 38% हो गई। Turtlemint एक इंश्योरटेक प्लेटफॉर्म है। यह डिजिटल टूल्स की मदद से बीमा कंपनियों, लोकल फाइनेंशियल एडवाइजर और ग्राहकों को आपस में जोड़ता है।

पीबी फिनटेक और Turtlemint पर दबाव क्यों?

पीबी फिनटेक और टर्टिलमिंट के शेयरों पर जमकर बिकवाली शुरू हो गई है, क्योंकि यह प्रस्ताव IRDAI के ‘Recalibrating Economics of Insurance Distribution’ नाम के एडवाइजरी नोट के बाद आया है। इसमें बीमा वितरण ढांचे, खर्च, कमीशन, बाजार में व्यवहार और पारदर्शिता से जुड़े बदलाव सुझाए गए हैं।

25 सितंबर को शेयर का भाव

25 सितंबर को सुबह 2 बजे Turtlemint का शेयर करीब 20% गिरकर 87.39 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था। दो दिन पहले यह 135.61 रुपये पर बंद हुआ था। वहीं PB Fintech के शेयर दो सत्रों में करीब 40% तक लुढ़क गए। यह 1893 रुपये से लुढ़ककर 1160 रुपये पर आ गया है।

कमीशन नियमों में बदलाव की तैयारी

नियामक ने कमीशन नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। इसमें कमीशन पर कैप लगाना, उसे प्रोडक्ट की जटिलता से जोड़ना और लाइफ इंश्योरेंस के कमीशन को पॉलिसी के पहले साल के बाद भी फैलाना शामिल है। पीबी फिनटेक और Turtlemint के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि नए बिजनेस पर कम कमीशन मिलने से उनकी कमाई पर असर पड़ सकता है। जेफरीज ने कहा है कि कमीशन दरों में 10% की कटौती होती है तो पीबी फिनटेक और टर्टिलमिंट की कमाई 10-12% तक घट सकती है।

IRDAI के प्रस्ताव की मुख्य बातें

1- कमीशन का लेवल प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने में लगने वाली मेहनत से जोड़ने का प्रस्ताव है।

2- ब्रोकर और बैंक जैसे “ओपन आर्किटेक्चर” चैनलों से बिकने वाले प्रोडक्ट पर कम कमीशन तय करने की बात कही गई है। हेल्थ, मोटर और लाइफ इंश्योरेंस में ये बड़े चैनल हैं।

3-थर्ड-पार्टी मोटर पॉलिसी जैसे जरूरी बीमा कवर पर बहुत कम या बिल्कुल भी कमीशन नहीं मिलेगा।

4-बैंक और लोन देने वाली कंपनियां जब लोन के साथ बीमा बेचेंगी, तो उनका कमीशन प्रोडक्ट के हिसाब से 2% से 5% तक कैप किया जा सकता है।

5-लोन के साथ बीमा को जबरन बंडल करना बंद करने का प्रस्ताव है।

6- हेल्थ इंश्योरेंस पर डिस्ट्रीब्यूटर्स का कमीशन पहली बार 15% से 20% के बीच कैप करने का प्रस्ताव है।

7- रिन्यूअल और दूसरी कंपनी में पोर्टिंग पर कमीशन 5% से 10% के निचले लेवल पर कैप करने की बात है।

8- मोटर बीमा और पर्सनल एक्सीडेंट कवर पर कमीशन 5% से 10% तक सीमित करने का प्रस्ताव है।

9-लाइफ इंश्योरेंस में पहले साल का कमीशन पॉलिसी की अवधि के हिसाब से डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए 5% से 20% के बीच कैप किया गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN