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MEA ने कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों को चीन के परमिट और वीजा यात्रा से पहले सुरक्षित करने की सलाह दी

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विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारतीय नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है, जिसमें उन्हें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने से पहले सभी आवश्यक यात्रा दस्तावेजों को सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। यह परामर्श उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिसमें लगभग 52 भारतीय तीर्थयात्रियों के काठमांडू, नेपाल में फंसे होने की खबरें आई हैं, क्योंकि उनके पास आवश्यक चीनी प्रवेश परमिट और वीजा नहीं थे।

**काठमांडू में फंसे तीर्थयात्री**

वे तीर्थयात्री, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए थे, चीन में प्रवेश करने के लिए आवश्यक परमिट और वीजा न होने के कारण आगे बढ़ने में असमर्थ थे। इस स्थिति के चलते विदेश मंत्रालय ने नागरिकों को बिना सभी जरूरी यात्रा दस्तावेज प्राप्त किए यात्रा शुरू न करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना पुष्ट दस्तावेजों के यात्रा शुरू करने पर फंसे रहने की संभावना बढ़ जाती है।

**विदेश मंत्रालय से सलाह**

फंसे हुए तीर्थयात्रियों के संदर्भ में, विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों से अनुरोध किया है कि जब तक वे सभी आवश्यक यात्रा दस्तावेज प्राप्त न कर लें, तब तक निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू न करें। मंत्रालय ने यह भी बताया कि बिना परमिट और वीजा के यात्रा शुरू करने पर यात्रा में बड़े व्यवधान आने की संभावना होती है।

**यात्रा में हाल की घटनाएँ**

कैलाश मानसरोवर यात्रा, जो हिन्दू, बौद्ध, जैन और बोन परंपरा के अनुयायियों के लिए एक प्रतिष्ठित तीर्थयात्रा है, पांच वर्षों के विराम के बाद पुनः शुरू हो गई है। 2026 की पहली खेप के तीर्थयात्रियों ने 20 जून को नाथू ला पास के माध्यम से चीन की सीमा पार की। इस पहली खेप को सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने हरी झंडी दिखाई, जिनके साथ पर्यटन मंत्री छेरिंग थेन्दुप भुतिया और सिक्किम टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (STDC) के अधिकारी भी मौजूद थे।

**यात्रा मार्ग और व्यवस्था**

यह यात्रा दो प्रमुख मार्गों से संचालित होती है:

– **उत्तराखंड में लिपुलेख पास**: यह मार्ग 2025 से संचालित है, जो तीर्थयात्रियों को उत्तराखंड के रास्ते कैलाश मानसरोवर तक पहुँचने की सुविधा देता है।

– **सिक्किम में नाथू ला पास**: यह मार्ग पांच साल के स्थगन के बाद 2025 में पुनः शुरू हुआ, जो सिक्किम के माध्यम से यात्रा को संभव बनाता है।

दोनों मार्ग अब पूरी तरह से मोटरेबल हैं, जिससे तीर्थयात्रियों के लिए लंबी पैदल यात्रा की आवश्यकता कम हो गई है और यात्रा और अधिक सुगम हो गई है।

**तीर्थयात्रियों का चयन प्रक्रिया**

2026 की यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों का चयन कम्प्यूटरीकृत, यादृच्छिक और लिंग-संतुलित ड्रॉ के माध्यम से किया गया, ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे। कुल 1,000 तीर्थयात्रियों का चयन किया गया, जिन्हें 20 बैचों में बांटा गया है, प्रत्येक में 50-50 तीर्थयात्री, जो लिपुलेख और नाथूला मार्ग से यात्रा करेंगे।

**यात्रा पुनः शुरू होना**

2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनः शुरू होना कोविड-19 महामारी और सीमा व्यवस्थाओं के कारण पांच वर्षों के स्थगन के बाद भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। यात्रा की पुनरारंभ से भक्तों और अधिकारियों दोनों ने संतोष और उत्साह व्यक्त किया है, क्योंकि इससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आध्यात्मिक साधना को बढ़ावा मिलता है।

**तीर्थयात्रियों के लिए सिफारिशें**

विदेश मंत्रालय सभी संभावित तीर्थयात्रियों को निम्नलिखित बातों का कड़ाई से पालन करने की सलाह देता है:

– **आवश्यक परमिट और वीज़ा प्राप्त करें**: यात्रा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों को सुनिश्चित करें।

– **अंतिम समय पर व्यवस्था न करें**: प्रवेश या यात्रा के दौरान परमिट और वीजा प्राप्त करने पर भरोसा न करें।

– **पूर्व योजना बनाएं**: देरी और जटिलताओं से बचने के लिए आवेदन प्रक्रिया समय रहते शुरू करें।

इन निर्देशों का पालन करने से तीर्थयात्री अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा को सुगम एवं व्यवधानमुक्त बना सकते हैं।

विदेश मंत्रालय की यह सलाह यात्रा की तैयारी और यात्रा नियमों के पालन के महत्व की समयोचित याद दिलाती है, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्राओं के दौरान। सभी आवश्यक दस्तावेजों को सुव्यवस्थित रखना न केवल यात्रा को सरल बनाता है, बल्कि तीर्थयात्रा के पवित्रता और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।

जैसे-जैसे कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरे भारत से भक्तों को आकर्षित करती रहती है, सभी प्रतिभागियों के लिए आवश्यक है कि वे यात्रा संबंधी नियमों की जानकारी रखें और उनका पालन करें। इस सक्रिय दृष्टिकोण से तीर्थयात्रा की सफलता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे भक्त अपने आध्यात्मिक उद्देश्य बिना किसी रुकावट के पूरा कर सकेंगे।

अंत में, विदेश मंत्रालय की यह सलाह सभी तीर्थयात्रियों के लिए आग्रह करती है कि वे कैलाश मानसरोवर यात्रा आरंभ करने से पहले सभी आवश्यक परमिट और वीजा प्राप्त कर लें। तीर्थयात्रियों को सूक्ष्म योजना बनाकर यात्रा दस्तावेजों को व्यवस्थित करने की सलाह दी जाती है ताकि उनकी पवित्र यात्रा में किसी प्रकार की बाधा न आए।

यह लेख AI-जनित सामग्री है। कृपया इस लेख पर आधारित कोई भी कार्रवाई करने से पहले जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।