Home rss business hindi RBI की नई व्यवस्था से डॉलर की मांग पर लगेगी लगाम? जानें...

RBI की नई व्यवस्था से डॉलर की मांग पर लगेगी लगाम? जानें रुपये पर होगा क्या असर

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • भारतीय रुपये पर दबाव कम करने के लिए RBI ने 3 सरकारी तेल कंपनियों IOCL, BPCL और HPCL के लिए विशेष डॉलर सुविधा शुरू करने की घोषणा की है
  • 12 अक्टूबर 2026 से लागू इस व्यवस्था के तहत कंपनियां अपनी रोजाना की पूरी डॉलर जरूरत निर्धारित बैंकों के जरिए पूरी कर सकेंगी

भारतीय रुपये पर दबाव कम करने के लिए RBI ने 3 सरकारी तेल कंपनियों IOCL, BPCL और HPCL के लिए विशेष डॉलर सुविधा शुरू करने की घोषणा की।

भारतीय रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच RBI (Reserve Bank of India) ने सरकारी तेल कंपनियों के लिए एक विशेष डॉलर सुविधा शुरू करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य तेल आयात के लिए डॉलर की मांग से खुले बाजार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। RBI की 10 अक्टूबर 2026 की घोषणा के अनुसार, यह सुविधा सोमवार 12 अक्टूबर से लागू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी। इसके तहत तीन सरकारी OMCs (Oil Marketing Companies) अपनी तेल खरीद के लिए रोजाना की पूरी डॉलर जरूरत निर्धारित बैंकों के माध्यम से पूरी कर सकेंगी। इससे रुपये को सहारा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

किन 3 सरकारी कंपनियों को मिलेगा फायदा?

RBI की इस विशेष सुविधा का लाभ केवल तीन सरकारी तेल कंपनियों को मिलेगा। इनमें IOCL (Indian Oil Corporation), HPCL (Hindustan Petroleum Corporation) और BPCL (Bharat Petroleum Corporation) शामिल हैं। इन कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर की जरूरत होती है। अब ये कंपनियां अपनी डेली डॉलर जरूरत के लिए ओपेन मार्केट में डॉलर खरीदने के बजाय RBI की ओर से निर्धारित बैंकों के जरिए डॉलर हासिल कर सकेंगी।

रुपये को कैसे मिलेगी राहत?

तेल आयात करने वाली कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भुगतान आमतौर पर डॉलर में करना पड़ता है। इसके लिए वे रुपये देकर खुले बाजार से डॉलर खरीदती हैं। जब डॉलर की डिमांड तेजी से बढ़ती है, तो रुपये पर दबाव पड़ सकता है। बसाव कैपिटल (Basav Capital) के सह-संस्थापक संदीप पांडे के मुताबिक, इन तीनों सरकारी कंपनियों की भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में करीब 90% हिस्सेदारी है। उनके अनुसार, IOCL की हिस्सेदारी लगभग 40%, BPCL की 30% और HPCL की 20% है। ऐसे में इन कंपनियों की डॉलर खरीद को अलग व्यवस्था के तहत पूरा करने से खुले बाजार में डॉलर की मांग का दबाव घट सकता है।

डॉलर की व्यवस्था कैसे होगी?

RBI के मुताबिक, इन तीनों कंपनियों को डॉलर निर्धारित बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे कंपनियों की नियमित आयात जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार पर निर्भरता कम होगी। मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, सरकार को डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए FCNR (Foreign Currency Non-Resident) जमा योजनाओं से जुड़े संसाधनों और जमा राशि के Swap जैसे विकल्पों से भी मदद मिल सकती है। हालांकि, डॉलर की वास्तविक उपलब्धता और इस व्यवस्था के वित्तीय प्रभाव का आकलन संबंधित आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

क्या रुपये की गिरावट रुक जाएगी?

RBI की यह पहल रुपये को सहारा देने की दिशा में एक कदम है, लेकिन इससे रुपये की गिरावट पूरी तरह रुकने की गारंटी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, डॉलर की वैश्विक मजबूती और भारत के आयात-निर्यात का अंतर भी रुपये की चाल को प्रभावित करते हैं। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत की डॉलर जरूरत पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में RBI की विशेष सुविधा बाजार में डॉलर की मांग को व्यवस्थित करने में मदद कर सकती है, जबकि रुपये की आगे की दिशा कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी।

निवेशकों के लिए क्या मायने हैं? रुपये और डॉलर की चाल पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह कदम अहम है। इसका असर तेल कंपनियों, आयात लागत और मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि, निवेश का फैसला केवल इस घोषणा के आधार पर लेने के बजाय कच्चे तेल की कीमतों, RBI की आगे की नीतियों और रुपये के वास्तविक रुझान को भी देखना चाहिए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN