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भारत के शेयर बाजार की निगरानी करने वाली संस्था SEBI ने हाल ही में एक ऐसा बड़ा खुलासा किया है, जिसने यह साबित कर दिया कि अब शेयर बाजार में गड़बड़ी करने वालों का बचना आसान नहीं है। SEBI ने करीब 144 करोड़ रुपये के कथित “पंप एंड डंप” घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि जांच सिर्फ बैंक खातों और ट्रेडिंग रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रही, बल्कि एयरलाइन टिकट, होटल बुकिंग, व्हाट्सऐप चैट, फूड डिलीवरी ऐप, वेबसाइट डेटा, डोमेन रजिस्ट्रेशन, SMS रिकॉर्ड और मोबाइल नंबरों तक की जांच की गई। इन सभी डिजिटल सबूतों की मदद से SEBI ने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
यह मामला मौर्या उद्योग (Mauria Udyog), विशाल फैब्रिक (Vishal Fabrics), 7NR रिटेल, GBL इंडस्ट्रीज और डार्जलिंग रोपवे कंपनी (Darjeeling Ropeway Company) जैसे स्टॉक्स से जुड़ा है। आरोप है कि 2017 से 2020 के बीच इन शेयरों में आर्टिफिशियल तरीके से ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाया गया, ताकि आम निवेशकों को यह लगे कि इन कंपनियों में भारी खरीदारी हो रही है। जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने ऊंचे दाम पर शेयर खरीद लिए, तब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों ने अपने शेयर बेचकर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा लिया। इसे ही शेयर बाजार की भाषा में पंप एंड डंप स्कीम (Pump and Dump Scheme) कहा जाता है।
SEBI ने इस मामले में कुल 394 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी किया है, जिसे हाल के सालों की सबसे बड़ी जांच रिपोर्टों में से एक माना जा रहा है। जांच के बाद SEBI ने करीब 143.79 करोड़ रुपये की अवैध कमाई वापस जमा कराने (Disgorgement) का आदेश दिया है। इसके अलावा 47.8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और कई आरोपियों को 4 से 7 साल तक शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इस जांच की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि SEBI ने आरोपियों के बीच संबंध साबित करने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया। उदाहरण के लिए, एक आरोपी ने दावा किया कि जिन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हुआ, वे उसके नहीं बल्कि कर्मचारियों के थे। लेकिन SEBI ने IndiGo की फ्लाइट बुकिंग, होटल रिजर्वेशन और ईमेल रिकॉर्ड की जांच कर यह साबित कर दिया कि वही व्यक्ति उन नंबरों का उपयोग कर रहा था। इसी तरह वेबसाइट बनाने वाली कंपनियों, GoDaddy के डोमेन रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, एडमिन एक्सेस और डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों के इनवॉइस की भी जांच की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि इन शेयरों को प्रमोट करने के लिए 2.1 करोड़ से ज्यादा Bulk SMS भेजे गए थे और लगभग 60,000 मोबाइल नंबरों तक निवेश संबंधी संदेश पहुंचाए गए। सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप के जरिए भी लोगों को इन शेयरों में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
SEBI ने ट्रेडिंग पैटर्न का भी गहराई से विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि कई खातों से सर्कुलर ट्रेडिंग, सिंक्रोनाइज्ड ट्रेड और छोटे-छोटे ऑर्डर देकर यह दिखाया गया कि शेयरों में लगातार खरीदारी हो रही है। इससे शेयर की कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम दोनों कृत्रिम रूप से बढ़ते गए।
कर्मचारियों और लेबर कॉन्ट्रैक्टरों की भी जांच
इतना ही नहीं, SEBI ने 62 कर्मचारियों और लेबर कॉन्ट्रैक्टरों की भी जांच की, जिनके खातों से शेयर बेचे गए थे। जांच में पाया गया कि कई लोगों ने शेयर बेचकर मिली रकम अपने पास रखने के बजाय कंपनी या उससे जुड़े लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी। इससे SEBI को शक हुआ कि ये लोग सिर्फ नाम के शेयरधारक थे और असली फायदा किसी और को पहुंचाया जा रहा था।
कौन है मास्टरमाइंड?
इस पूरे मामले में हनिफ शेख को कथित मास्टरमाइंड माना गया है। SEBI ने उन पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और उन्हें 7 साल के लिए शेयर बाजार से बाहर कर दिया है।
यह कार्रवाई निवेशकों के लिए भी एक बड़ा संदेश है। आज के दौर में कोई भी डिजिटल गतिविधि पूरी तरह छिप नहीं सकती। चाहे मोबाइल रिकॉर्ड हो, वेबसाइट का डेटा हो, ऑनलाइन बुकिंग हो या फूड डिलीवरी ऐप की जानकारी, जांच एजेंसियां जरूरत पड़ने पर हर डिजिटल सबूत का इस्तेमाल कर सकती हैं। SEBI ने साफ कर दिया है कि शेयर बाजार में हेराफेरी करने वालों पर अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त नजर रखी जा रही है, ताकि आम निवेशकों का भरोसा बना रहे और बाजार पारदर्शी तरीके से काम करता रहे।
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